पश्चिम बंगाल सरकार ने आज एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता पिंकी प्रमाणिक के हिरासत में अपने उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने और न्याय की गुहार लगाने के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही। विधानसभा में मामले के अदालत के विचाराधीन होने के कारण विपक्ष को इसे उठाने की अनुमति नहीं दी गयी।
राज्य के खेल मंत्री मदन मित्रा ने हिरासत के दौरान प्रमाणिक के उत्पीड़न के बारे में पूछे जाने पर कहा, मुझे पिंकी प्रमाणिक के परिवार या किसी भी खेल संगठन से इस बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। किसी ने भी मुझसे इस बारे में बात नहीं की या मुझे इसके बारे में नहीं लिखा।
हालांकि मंत्री ने कहा कि वह मामले पर निगाह रख रहे हैं।
पिंकी को अलग सेल में रखे जाने की मांग पर मंत्री ने कहा कि पिंकी को महिलाओंं के वार्ड में रखा जाना चाहिए या नहीं इस बारे में पुलिस फैसला करेगी।
विपक्ष के नेता सूर्यकांत मिश्रा ने विधानसभा की लॉबी में कहा कि विपक्ष इस मामले को विधानसभा में उठाना चाहता था लेकिन मामले के अदालत के विचाराधीन होने की वजह से विपक्ष की मांग खारिज कर दी गयी।
उन्होंने कहा, यहां स्पष्ट तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है। हालांकि मुख्यमंत्री की मामले को साजिश बताने की आदत है, लेकिन पिंकी के मामले में पूरी तरह मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ हैा
उन्होंने कहा कि महिला आयोग ने भी मानवाधिकारों के उल्लघंन की बात कही है।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने चार जुलाई को गृह, स्वास्थ्य और पुलिस विभागों को पिंकी के साथ पुलिस हिरासत में हुए अमानवीय उत्पीड़न की जांच करने और दो हफ्तों में इसकी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा।
भाषा