facebookmetapixel
Advertisement
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया में बड़ा हंगामा, सामने आया पहला बयान: पार्टी फोरम में बात रखेंअमेरिका के एकतरफा 12.5% टैरिफ प्रस्ताव पर भारत सख्त, कहा: बातचीत से सुलझाएं व्यापारिक मुद्देइंडियन टोनर्स का बड़ा फैसला: 1 शेयर के होंगे 5 टुकड़े, 17 जुलाई को तय हुई स्टॉक स्प्लिट की रिकॉर्ड डेट1 के बदले 2 फ्री बोनस शेयर! फॉर्मा कंपनी ने जबरदस्त मुनाफे के बाद लुटाया प्यार, रिकॉर्ड डेट अगले हफ्तेनिवेशकों के लिए खुशखबरी! मिनोल्टा फाइनेंस के 1 शेयर पर 4 नए शेयर खरीदने का मौका, रिकॉर्ड डेट फिक्सUN Women की रिपोर्ट में खुलासा: संकटग्रस्त इलाकों में 10 लाख से अधिक महिलाओं तक नहीं पहुंच रही मददट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, कहा: मुझ पर हमला हुआ तो 1000 मिसाइलों से तबाह कर देंगेसरकारी बैंकों की बंपर कमाई के बाद शेयरों में जबरदस्त उछाल, इंडियन बैंक-बैंक ऑफ महाराष्ट्र में बड़ी तेजीज्यादा अल्कोहल वाली दवाओं पर सरकार सख्त, अब बिना डॉक्टर के पर्चे और लाइसेंस के नहीं मिलेगी दवाईसस्ती होंगी जगुआर लैंड रोवर जैसी लक्जरी गाड़ियां, ब्रिटेन से आने वाली कारों पर सिर्फ 10% लगेगा आयात शुल्क

नीतियों व दस्तूर को व्यापक ढांचे की जरूरत: पीके मिश्रा

Advertisement

मिश्रा ने भारत के व्यापक उपभोग आधार और जनसांख्यिकीय लाभ के साथ-साथ इसके डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमताओं को देखते हुए सकारात्मक उम्मीद जताई।

Last Updated- March 02, 2025 | 10:05 PM IST
P K Mishra

प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पीके मिश्रा ने गुरुवार को आयोजित बिज़नेस स्टैंडर्ड मंथन कार्यक्रम के दौरान कहा कि किसी भी नीति निर्माण में अनिश्चितता के साथ ही व्यापक रूपरेखा और परिणाम केंद्रित और रचनात्मक मानसिकता पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।  उन्होंने यह भी कहा कि विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और सततता पर केंद्रित नीतियां तैयार की जाती हैं। 

मिश्रा ने कोविड-19 महामारी, यूक्रेन-रूस संघर्ष और पश्चिम एशिया संकट जैसे संकटों से सफलतापूर्वक निपटने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्त्व को दिया।  

उन्होंने कहा कि सभी संकटों को आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करके निपटाया गया।  भूराजनीतिक संकट और कोविड-19 का भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर से आई चुनौतियों के बारे में मिश्रा ने कहा कि कुछ आर्थिक सुधारों के बाद ही आर्थिक वृद्दि की गति को फिर से बहाल किया जा सकता है। साथ ही  इसके लिए प्रोत्साहन पैकेज भी मुहैया कराना होगा।  

1972 बैच के आईएएस अधिकारी ने सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन(पीएलआई) योजना की तारीफ की, लेकिन इनके दीर्घावधि मूल्यांकन के महत्त्व पर जोर दिया। 

ऑस्ट्रेलिया, यूएई और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) के साथ हुए  हाल के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विश्व के साथ आर्थिक जुड़ाव के मामले में भारत का नीतिगत रुख सुसंगत रहा है तथा वह पारस्परिक लाभ के आधार पर अन्य देशों के साथ जुड़ता रहा है।

गुजरात कैडर के अधिकारी मिश्रा ने कहा कि अनिश्चितता से नए तरीके से निपटने की जरूरत है, जहां जोखिम आकलन के अलावा एक ‘एंटी-फ्रैजाइल सिस्टम’ बनाने का भी मकसद होना चाहिए।  

76 साल के अधिकारी मिश्रा ने हाल की मोदी की अमेरिका यात्रा को खासकर व्यापार संबंध बढ़ाने के हिसाब से बहुत सकारात्मक बताया। उन्होंने आगे कहा कि द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय संबंधों के बीच बदलते वैश्विक व्यापार परिवेश में आर्थिक परिदृश्य बदल रहा है।

मिश्रा ने भारत के व्यापक उपभोग आधार और जनसांख्यिकीय लाभ के साथ-साथ इसके डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमताओं को देखते हुए सकारात्मक उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से भारत पूरी ताकत के साथ बातचीत कर सकेगा। कृषि क्षेत्र की जीडीपी में तेजी से घटती हिस्सेदारी के बावजूद मिश्रा ने कहा कि यह सेक्टर अभी भी देश के 46 प्रतिशत काम दे रहा है।  उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सुधार के लिए कृषि क्षेत्र का विविधीकरण जरूरी है। 

सिविल सर्विसेज में सुधार के मसले पर मिश्रा ने कहा कि शासन की बदलती जरूरतों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए सिविल सेवाओं को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

संबलपुर में जन्मे अधिकारी मिश्रा ने कहा कि पिछले एक दशक के दौरान व्यक्तिगत प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक बदलाव हुआ है। मिशन कर्मयोगी और इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग (आईडीओटी) प्लेटफॉर्म जैसी पहल से  कार्मिक प्रबंधन के क्षेत्र में योग्यता पर आधारित और समग्र दृष्टिकोण सामने आया है। 

Advertisement
First Published - March 2, 2025 | 10:05 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement