facebookmetapixel
Advertisement
कर्नाटक में सियासी हलचल: सिद्धरमैया के इस्तीफे की अटकलें तेजप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की देशवासियों से अपील: गर्मी में सावधानी बरतें, लू से बचेंकर्नाटक की नई डेटा सेंटर नीति: कूलिंग इनोवेशन और ग्रीन टेक को मिलेगा बढ़ावाऑनलाइन गेमिंग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 28% GST और राज्यों को प्रतिबंध का अधिकार बरकरारStock Market: एनर्जी व बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से दूसरे दिन टूटे शेयर बाजार, सेंसेक्स 142 अंक टूटा ट्रिलियन डॉलर क्लब में 15 कंपनियां, AI बूम से ग्लोबल मार्केट में बड़ा बदलावखाड़ी की आंधी में सीमेंट कंपनियां की उम्मीदें धूल, लागत दबाव ने बढ़ाई चिंताकारोबार अलग करने का बढ़ता चलन, 2024 के बाद 43 अरब डॉलर के 50 सौदेEditorial: IBC के 10 साल, बेहतर वसूली के बावजूद समाधान में देरी बनी सबसे बड़ी चुनौतीभारत की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल, संपत्ति में गिरावट की आशंका

BFSI Summit: बढ़ती मांग से कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार सुस्त

Advertisement

बीएफएसआई समिट के पैनल में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार यील्ड ऊंचे स्तर पर बने रहने और मांग कम होने के कारण कुल इश्यू पिछले साल के स्तर से काफी कम रहने के आसार हैं।

Last Updated- October 29, 2025 | 11:02 PM IST
BFSI

पिछले साल पीएसयू बैंकों और वित्तीय संस्थानों से प्रेरित देश का कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही से अपनी रफ्तार गंवा रहा है, क्योंकि कंपनियां सस्ती वित्तीय सहायता के लिए बैंक ऋणों का रुख कर रहे हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट के पैनल में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिफल ऊंचे स्तर पर बने रहने और मांग कम होने के कारण कुल इश्यू पिछले साल के स्तर से काफी कम रहने के आसार हैं।

‘वैश्विक उथल-पुथल में मार्ग की तलाश : क्या भारत सही रास्ते पर रह सकता है?’ शीर्षक वाले पैनल में अपने विचार साझा करते हुए ट्रेजरी ऐंड इकनॉमिक रिसर्च के प्रमुख शैलेंद्र झिंगन ने कहा, ‘हमें लगता है कि कुल मिलाकर, पिछले साल जो आंकड़ा 11.1 लाख करोड़ रुपये या उसके आसपास था, हम उससे कम पर समापन (साल 2025-26 का) करने जा रहे हैं। मुझे यह लगता है कि इसका मुख्य कारण ऋण बाजार में दरें काफी सस्ती हैं। एक ऐसा चलन है, जहां कंपनियां बॉन्ड से दूर होकर ऋण बाजार का रुख कर रहीं हैं। रीपो दर 5.5 प्रतिशत पर होने के कारण मौजूदा स्तर पर कॉर्पोरेट कर्ज की तुलना में ईबीएलआर (एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट) ऋण कहीं ज्यादा आकर्षक लगते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह ट्रेंड काफी हद तक साफ है। आगे भी आपूर्ति धीमी रहेगी।’

पहली तिमाही में कॉर्पोरेट बॉन्ड निर्गम में उछाल के बाद दूसरी तिमाही में गतिविधि धीमी हो गई क्योंकि उधार लेने की लागत बढ़ गई। भारतीय कंपनियों ने मौजूदा वित्त वर्ष के पहले चार महीने में डेट के जरिये रिकॉर्ड 4.07 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे।

एचडीएफसी बैंक के ग्रुप ट्रेजरी अरूप रक्षित ने कहा, ‘ऋण बाजार फिलहाल काफी सस्ता है और क्रेडिट ऑफटेक के साथ, जो वास्तव में उस जगह पर नहीं है, जहां उसे होना चाहिए, किसी बैंक के लिए भी इसे कर्ज के रूप में लेना आसान हो जाता है। अकाउंटिंग के सिद्धांत भी बदल चुके हैं कि आप कॉर्पोरेट बॉन्ड से कैसा व्यवहार करते हैं, कैसे रखते हैं। तो, यह कुछ ऐसा है जो धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।’

डेट श्रेणी में एफपीआई प्रवाह के संबंध में पैनल में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि जेपी मोर्गन ईएम बॉन्ड इंडेक्स में भारत के शामिल होने के साथ लगभग 24 से 25 अरब डॉलर के पैसिव निवेश की उम्मीद थी और यह काफी हद तक हुआ भी है। इनमें से ज्यादातर निवेश पैसिव निवेशकों से आए हैं। इसके उलट ऐक्टिव निवेशक, जो आम तौर पर तेजी से आगे बढ़ने वाले भागीदार होते हैं, वे दर कटौती, बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट या करेंसी में संभावित मजबूती की उम्मीदों पर प्रतिक्रिया करते हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे कई निवेशकों ने तब प्रवेश किया था, जब घरेलू जी-सेक बेंचमार्क प्रतिफल लगभग 6.20 प्रतिशत था और जब ऐसा लगा कि दर कटौती का साइकल खत्म होने वाला है, तो वे निकल गए। उनमें से कुछ अब वापस आ गए हैं क्योंकि प्रतिफल 6.50 से 6.55 प्रतिशत के आसपास है और रुपया काफी हद तक अच्छे मूल्य पर लग रहा है।

सिटी के प्रबंध निदेशक आदित्य बागड़ी ने कहा, ‘इन घटनाक्रमों के बावजूद भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी होल्डिंग लगभग 5 प्रतिशत (कुल सीमा का) के कम स्तर पर बनी हुई है और स्टेट डेवलपमेंट लोन तथा कॉर्पोरेट बॉन्ड में तो और भी कम निवेश है। नतीजतन भारत का बॉन्ड बाजार काफी हद तक घरेलू स्तर पर ही चल रहा है, जिसे मुख्य रूप से म्युचुअल फंड, पेंशन फंड, इंश्योरेंस कंपनियों और बैंकों से मदद मिल रही है।’

Advertisement
First Published - October 29, 2025 | 10:57 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement