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UCC in Uttarakhand: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी, 26 जनवरी को सकती है घोषणा

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी अधिनियम की नियमावली को मंजूरी दी; विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे प्रावधानों के साथ उत्तराखंड बनेगा यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य।

Last Updated- January 20, 2025 | 10:42 PM IST
Pushkar Singh Dhami

उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) अधिनियम की नियमावली को मंजूरी दे दी। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यूसीसी अधिनियम की नियमावली को मंजूरी दे दी गई है और उसे आगामी 26 जनवरी से लागू किया जा सकता है।

धामी ने कहा, ‘यूसीसी अधिनियम बनने के बाद उसे लागू करने के लिए हमने प्रशिक्षण समेत सभी तरह की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक में हमने इसे जल्द से जल्द लागू करने को लेकर चर्चा की। सभी चीजों की समीक्षा करने के बाद हम इसे लागू करने की तारीखों का जल्द ऐलान करेंगे।’

धामी ने यूसीसी लागू करने की कोई खास तारीख नहीं बताई। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने पिछले महीने दिसंबर में कहा था कि जनवरी में प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया जाएगा। प्रदेश में 23 जनवरी को नगर निकाय चुनाव होने हैं और 25 जनवरी को उनके नतीजे आ जाएंगे। इसके मददेनजर अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्य सरकार गणतंत्र दिवस पर यूसीसी लागू करने की घोषणा कर सकती है।

एक सवाल के जवाब में धामी ने कहा कि इसके लागू होने से प्रदेश में बड़ा बदलाव आएगा। धामी ने कहा कि उनकी पार्टी ने वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव से पहले सत्ता में दोबारा आने पर जनता से यूसीसी लाने का वादा किया था, जिसकी शुरुआत मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि हमने यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया जिसकी रिपोर्ट आने के बाद हमने राज्य विधान सभा में विधेयक पारित कराया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने भी 12 मार्च, 2024 को उसे अपनी मंजूरी दे दी जिसके बाद वह अधिनियम बन गया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आजाद भारत का ऐसा पहला राज्य बनने वाला है, जहां सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा। धामी ने कहा, ‘देवभूमि उत्तराखंड से गंगोत्री निकलेगी और पूरे देश में जाएगी।’ एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के इस आरोप को खारिज कर दिया कि यह देश और प्रदेश को बांटने की राजनीति है।

उन्होंने कहा, ‘यह कोई बांटने वाली राजनीति नहीं है। यूसीसी में सभी के लिए एक समान व्यवस्था और एक समान कानून है।’ यूसीसी के तहत विवाह, तलाक, विवाह-शून्यता, इच्छापत्रीय एवं गैर इच्छापत्रीय उत्तराधिकार, सहवासी संबंध (लिव-इन रिलेशनशिप) से जुड़े विस्तृत प्रावधान शामिल किए गए हैं। अधिकारियों ने यहां बताया कि यूसीसी के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने अत्याधुनिक तकनीक आधारित व्यवस्थाएं लागू की हैं, जिससे जनता को असुविधा नहीं हो।

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First Published - January 20, 2025 | 10:42 PM IST

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