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खत्म हुआ दिल्ली में चल रहा फिल्मों का सफर

Last Updated- December 07, 2022 | 12:04 PM IST

राजधानी में चल रहा एशियाई और अरब फिल्मों का मेला 10 वां ओसियान सिनेफैन फिल्मोत्सव रविवार को समाप्त हो गया।


हांगकाँग के निर्देशक जॉनी टो की फिल्म ‘स्पैरो’ से शुरू हुआ ओसियान का सफर 11 भारतीय निर्देशकों की ‘मुंबई कटिंग’ पर आकर खत्म हुआ। इन 10 दिनों के दौरान 40 देशों की 200 से भी ज्यादा फीचर और शॉर्ट फिल्में दिखाई गईं और सिनेप्रेमियों को इस फिल्मी मेले में बेहतरीन सिनेमा से रूबरू होने का मौका मिला। इस बार के फिल्मोत्सव में एक करोड़ रुपये की राशि बतौर पुरस्कार दी गई।

साथ ही इन टॉलरेंस नाम की एक नई श्रेणी भी बनाई गई थी। एशियाई और अरब कॉम्पटिशन में जापानी फिल्म ‘टोक्यो सोनाटा’ को पुरस्कार दिया गया। ‘कियोशी कुरोसवा’ द्वारा निर्देशित इस फिल्म में तेजी से बदलते सामाजिक-आर्थिक ढांचे और बदलते पारिवारिक मूल्यों को पर्दे पर दिखाया गया है। इसी श्रेणी में ‘थ्री मंकीज’ के लिए नूरी बिल्ज सेलान को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के पुरस्कार से नवाजा गया।

वहीं ‘अमोर हक्कार’ को उन्हीं की फिल्म ‘द यलो हाउस’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया जबकि हिआम अब्बास और रोना लिपाज को ‘द लैमन ट्री’  के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। इसी श्रेणी में ‘एनामेरी जकीर’ की ‘सॉल्ट ऑफ दिस सी’ को स्पेशन जूरी अवॉर्ड दिया गया। फिलस्तीन-इजरायल समस्या पर बनी इस फिल्म में मानवीय भावनाओं को बेहतरीन तरीके से उकेरा गया है। फर्स्ट फीचर्स श्रेणी में ‘कनफेशनल’ पुरस्कार झटकने में कामयाब रही। इंडियन कॉम्पटिशन की बात की जाए तो इसमें कन्नड़ फिल्म ‘गुलाबी टाकीज’ का बोलबाला रहा।

‘गिरीश कसरवाली’ द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ  फिल्म का अवॉर्ड जीता। जबकि रेमो को ‘ए स्टोरी ऑफ रेड हिल्स’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक चुना गया। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार संयुक्त रूप से रजत कपूर(द प्रिजनर) और गोविंद नामदेव (कबूतर) को दिया गया जबकि उमाश्री को ‘गुलाबी टॉकीज’ में मछुआरी दाई की बेहतरीन भूमिका निभाने के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया।

नेटपैक जूरी अवॉर्ड के एम मधुसूधनन की ‘बायोस्कोप’ को मिला वहीं मानवता को राजनीति की क्रूर भेंट चढ़ते हुए दिखाने के लिए एनामेरी जकीर की ‘सॉल्ट ऑफ दिस सी ‘ और  महरीन जब्बार की पाकिस्तानी फिल्म ‘रामचंद पाकिस्तानी’ को फिकरेस्की कॉम्पटिशन में पुरस्कृत किया गया। इस बार के समारोह में ‘सिनेमा में योगदान के लिए’ मृणाल सेन को ओसियान लाइफटाइम एचीवमेंट से नवाजा गया।

वैसे तो इस फिल्मोत्सव में बेहतरीन फिल्में ही दिखाई जाती हैं लेकिन ‘सॉल्ट ऑफ दिस सी’ का जिक्र करना बेहद जरूरी है। वापस अपनी जड़ों की ओर लौटने की इस कहानी में राजनीति से आहत मानवीय भावनाओं को दिखाया गया है। इस साल सितंबर या अक्टूबर में एनडीटीवी ल्यूमियर के जरिये जब फिल्म भारत में रिलीज होगी तब इसको देखने का मौका मत छोड़िएगा। खैर तब तक इंतजार कीजिए और अगले ‘ओसियान’ का भी।

First Published - July 20, 2008 | 10:36 PM IST

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