facebookmetapixel
Editorial: केंद्र प्रायोजित योजनाओं की छंटनी पर जोर2026 की तीन बड़ी चुनौतियां: बॉन्ड यील्ड, करेंसी दबाव और डिपॉजिट जुटाने की जंगअमेरिका-यूरोप व्यापार समझौतों पर छाए बादल, भारत संभावित चुनौतियों के लिए तैयारTrump का बड़ा वार! रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 500% टैरिफ का खतरा?UIDAI ने ‘उदय’ नामक शुभंकर किया पेश, लोगों को आधार के बारे में समझने में होगी आसानीSEBI का बड़ा फैसला: नई इंसेंटिव स्कीम की डेडलाइन बढ़ी, अब 1 मार्च से लागू होंगे नियमSEBI ने बदले 30 साल पुराने स्टॉकब्रोकरों के नियमों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बढ़ावाRegular vs Direct Mutual Funds: देखें छिपा कमीशन कैसे 10 साल में निवेशकों की 25% वेल्थ खा गयाJioBlackRock MF ने लॉन्च किए 2 नए डेट फंड, ₹500 से SIP शुरू; इन फंड्स में क्या है खास?Titan Share: ऑल टाइम हाई पर टाटा का जूलरी स्टॉक, अब आगे क्या करें निवेशक; जानें ब्रोकरेज की राय

हिमाचल के सार्वजनिक उपक्रम हुए डांवाडोल

Last Updated- December 05, 2022 | 4:31 PM IST

हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए यह वर्ष अच्छा साबित नहीं हुआ है।


इस वर्ष सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों को कुल 978 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।


यह घाटा पिछले वर्ष के 917 करोड़ रुपये के मुकाबले 61 करोड़ रुपये ज्यादा रहा है।


राज्य की आर्थिक स्थिति पर इसका बुरा असर पड़ा है। पिछले साल 31 मार्च तक राज्य के 23 सार्वजनिक उपक्रमों में से 18 लगातार घाटे में चल रहे है।


इनमें हिमाचल रोडवेज ट्रांसपोर्ट कोर्पोरेशन (एचपीएसईबी) 437 करोड़ रुपये के घाटे के साथ पहले पायदान पर है।


इसके अलावा 237 करोड़ रुपये के घाटे के साथ हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड और 112 करोड़ रुपये के घाटे के साथ राज्य वित्त निगम क्रमश: दूसरे औ तीसरे स्थान पर हैं।


 ये तीन कंपनियां ही कुल घाटे के 80 फीसदी हिस्से के लिए जिम्मेदार है। दूसरी ओर राज्य का नागरिक आपूर्ति निगम 13.39 करोड़ रुपये का लाभ देने वाला एकमात्र सार्वजनिक उपक्रम है।

First Published - March 11, 2008 | 8:34 PM IST

संबंधित पोस्ट