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बिजली संकट से निपटने के लिए कोयला आयात करेगी महाराष्ट्र सरकार

Last Updated- December 11, 2022 | 7:36 PM IST

महाराष्ट्र में बिजली की भारी कमी है। बिजली की कमी अब राज्य सरकार भी मानते हुए राज्य के कई हिस्सों में बिजली की कटौती (लोडशेडिंग) की बात स्वीकार करने लगी है। मौजूदा बिजली कटौती संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने देश के बाहर से कोयले का आयात करने का फैसला लिया है।
महाराष्ट्र में गहराते बिजली संकट को स्वीकार करते हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि राज्य में मौजूदा बिजली कटौती संकट से निपटने के लिए सरकार ने कुछ हद तक देश के बाहर से कोयले का आयात करने का फैसला किया है। पवार ने कहा कि देश में कोयले की आपूर्ति उस तरह नहीं हो रही है जैसी होनी चाहिए। राज्य में बिजली की कटौती चल रही है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा एक बैठक की गई थी। मैं हर हफ्ते बिजली कटौती के मुद्दे पर बिजली विभाग की समीक्षा करूंगा और कैबिनेट ने यह जांचने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है कि क्या देश में बिजली की कोई भी उपलब्धता की संभावना है। पवार ने कहा ने कहा कि कई राज्यों को कोयले की आपूर्ति अपर्याप्त है। महाराष्ट्र को भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल रही है और इसलिए हमने देश के बाहर से कुछ हद तक कोयले का आयात करने का निर्णय लिया है। महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) और ऊर्जा मंत्री नितिन राउत इस पर काम कर रहे हैं।
पवार ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी छत्तीसगढ़ सरकार से महाराष्ट्र को एक कोयला खदान आवंटित करने को कहा है। विभिन्न राज्यों को कोयले की आपूर्ति उस तरह नहीं हो रही है जिस तरह से की जानी चाहिए। उन्होने कहा कि रेलवे डिब्बों के मुद्दे हैं। आज कोयले, चीनी, गेहूं और अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए रेलवे के अधिक डिब्बों की आवश्यकता है, जिन्हें बंदरगाहों तक ले जाने की आवश्यकता है। मैं इसमें कोई राजनीति नहीं लाना चाहता। मैं नहीं चाहता इस तरह के आरोप चाहिए, लेकिन यह एक सच्चाई है कि कोयले की कमी है। पिछले हफ्ते, मंत्री नितिन राउत ने कहा था कि राज्य में बिजली की मांग में वृद्धि, कोविड-19 प्रतिबंधों में ढील के कारण बिजली कटौती करनी पड़ी है और केंद्र को कोयले की आपूर्ति के खराब प्रबंधन के लिए दोषी ठहराया गया।
सरकार की तरफ से कहा गया कि राज्य 1400 से 1500 मेगावाट बिजली की कमी से जूझ रहा है। राज्य के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत का कहना है कि लोडशेडिंग कब तक चलेगी, इस बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता। राज्य में बिजली संकट को लेकर गुरुवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद राउत ने कहा कि पूरे देश में बिजली का संकट गहराता जा रहा है। इसका असर महाराष्ट्र पर भी हो रहा है। कोयले की कमी और खुले बाजार में बिजली उपलब्ध नहीं होने की वजह से लोडशेडिंग शुरू करना पड़ रहा है। ऊर्जा मंत्री कहा कि जहां बिजली बिल की रिकवरी नहीं हो रही है और जहां बिजली चोरी के मामले अधिक हैं, ऐसे इलाकों में लोडशेडिंग की जा रही है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में बारिश होने की भविष्यवाणी की है। बारिश होने पर ही लोडशेडिंग कम हो सकेगी।
भाजपा ने लोडशेडिंग के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दी है। जिस पर राउत ने कहा कि भाजपा को तो केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन करना चाहिए, क्योंकि लोडशेडिंग देश भर में जारी है। कोयले के आपूर्ति की जो योजना केंद्र सरकार ने बनाई थी, वह पूरी तरह से विफल हो गई है। रेल मंत्रालय का भी सहयोग नहीं मिल रहा है। दूसरी बात, लोडशेडिंग भाजपा सरकार के शासन में भी हुआ है। साल 2015, 2017 और 2018 में लोडशेडिंग की गई थी। अब तक राज्य में कोई ज्यादा लोडशेडिंग नहीं की जा रही है। यह 1400 से 1500 मेगावाट का भार नियमन है।

First Published - April 22, 2022 | 11:57 PM IST

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