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देवास का कैसे हो विकास!

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Last Updated- December 11, 2022 | 12:36 AM IST

मध्य प्रदेश के देवास का उद्योग जगत जमीन की कमी की वजह से संकुचित होता जा रहा है।
इस शहर में रैनबैक्सी, टाटा लेदर, किर्लोस्कर, एस कुमार और आयशर की इकाई होने के साथ-साथ नोट छापने वाला प्रेस भी है। जिसे यहां की 260 लघु और मझोले उद्यमों से सहयोग मिलता रहा है।
देवास उद्योग संघ के उपाध्यक्ष अशोक खंडेलिया कहते हैं कि यहां के औद्योगिक क्षेत्र में अतिरिक्त जमीन उपलब्ध नहीं होने की वजह से उद्योगपतियों ने निवेश रोक रखा है। उन्होंने कहा कि लघु और मझोले उद्यम बड़े औद्योगिक घरानों की मांग पूर्ति करने में सक्षम नहीं हैं और बडे औद्योगिक घरानों के विस्तार के लिए जगह नहीं है।
राज्य के उद्योग विभाग के प्रधान सचिव सत्य प्रकाश ने बताया कि पिछले दिनों देवास के उद्योगपतियों के साथ हुई बैठक में  बताया गया है कि स्थानीय इकाइयों के विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार अतिरिक्त जमीन मुहैया कराने जा रही है, उन्होंने कहा कि हमारा विभाग सिर्फ नीतिगत मामलों से संबंध रखता है और जमीन का मामला राज्य औद्योगिक विकास निगम और उसकी सहयोगी संस्थाएं देखती हैं।
देवास के उद्योग जगत का सालाना करोबार 3,000 करोड़ रुपये का है। इसमें टाटा लेदर और रैनबैक्सी का योगदान सबसे अधिक है। देवास को हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा निर्यात में बेहतर योगदान के लिए सिटी ऑफ एक्सीलेंस का सम्मान दिया गया है।
देवास के दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में होने के बावजूद यहां के छोटे और मझोले उद्यमों में ठहराव आ गया है। हालांकि, देवास के लिए इस परियोजना को सामने आने में अभी 5 साल और लगेंगे।
हाल ही में यहां किर्लोस्कर ब्रदर्स ने 46 एकड़ का भूखंड उद्योग विभाग को हस्तांतरित किया है। पर इसका एक हिस्सा राज्य सरकार को आवासीय निर्माण के लिए दे दिया गया है। देवास के लघु और मझोले उद्यमों में तकरीबन 25,000 लोगों को रोजगार मिला है। इस उद्योग के पास नए ऑर्डरों की भरमार है।

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First Published - April 15, 2009 | 6:34 PM IST

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