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व्यापार गोष्ठी: मंदी में राहत देंगे महंगाई के घटते आंकड़े?

Last Updated- December 10, 2022 | 5:35 PM IST

उतनी राहत नहीं


महंगाई के गिरते स्तर से जनता को कुछ राहत तो मिली है लेकिन जबर्दस्त वैश्विक मंदी का मुकाबला करने लायक नहीं।

हमारे नीति-निर्धारकों के पास अभी भी ब्याज दर घटाने का हथियार है। लेकिन लोकसभा चुनाव से महंगाई बढ़ने का डर व पूरे वर्ष का बजट पेश न कर पाने की मजबूरी भी है। अत: मंदी का दौर हाल-फिलहाल में समाप्त नहीं होने वाला है।

राजेश कपूर
एसबीआई, एलएचओ, लखनऊ

तभी बनेगी बात

मुद्रास्फीति के नीचे आने से राहत तो मिलेगी लेकिन उन वस्तुओं की कीमतें कम होनी चाहिए, जिनका उपभोग समाज का गरीब तबका व ग्रामीण लोग करते हैं तभी बात बनेगी। देश की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण व कृषि पर उनकी आजीविका आधारित होती है। आवश्यक वस्तुएं सस्ती होने पर ही राहत मिल पाएगी।

प्रो. के. डी. सोमानी
उज्जॅन


आगे सुधार जरूर

आने वाले साल में महंगाई के घटने, पेट्रोल व डीजल के दाम गिरने और अच्छी उपज के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार अवश्य होगा। बाजार में तरलता बढ़ाने के पूरे प्रयास किए गए हैं। इन सब कदमों से कारोबारियों को राहत मिलेगी।

कुल मिलाकर पिछले साल में छाई मंदी का असर इस साल कम दिखेगा। लोक सभा चुनाव निकट आते देख केन्द्र की सरकार कुछ और कदम उठा सकती है जो कारोबार और जनता दोनों को राहत देंगे।

संजय तिवारी
अधिवक्ता जिला न्यायालय, बलरामपुर

सिर्फ फौरी राहत

महंगाई की दरों में कमी से राहत मिलने के आसार कुछ ज्यादा नहीं हैं। फौरी तौर पर कुछ राहत जरूर मिल सकती है।

हॉयर इंवेटरी के कारण कंपनियां तैयार सामानों के मूल्य कम करने के पक्ष में नहीं हैं। हां, कुछ राशन के सामानों के मूल्यों में कमी के कारण उपभोक्ता को राहत मिल रही है। लोगों को अभी भी सस्ते घरों, कारों, कंप्यूटरों के सस्ता होने का इंतजार है।

सुरेंद्र सिंह कच्छ
स्वतंत्र पत्रकार, ई-मेल

पहले क्रय-शक्ति

बात महंगाई दर में आई कमी की नहीं बल्कि सवाल यह है कि क्या देश के आम जन की क्रय-शक्ति इतनी हो गई है कि वह बिना किसी हिचक के अपनी जरूरत के सामानों की खरीदारी कर सके।

शायद ही किसी का जवाब हां होगा क्योंकि सच्चाई यह है कि अभी भी बाजार में महंगाई पहले जैसी ही बनी हुई है और उपभोक्ता हलकान हैं।

सरकार को चाहिए कि वह पहले उपभोक्ताओं के रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों को कम करे और उनकी क्रय-शक्ति को बढ़ाए। इसके बाद ही कोई मंदी से राहत की उम्मीद कर सकता है।

प्रीति कुमारी
जे.डी. वूमेन कॉलेज, पटना

राहत तो मिलेगी

मंदी के इस दौर में महंगाई के घटते आंकड़े राहत जरूर देंगे। वर्तमान समय में केंद्र सरकार की पहल के कारण ही भारतीय रिजर्व बैंकों ने अहम भूमिका निभाई है।

आरबीआई द्वारा हाल ही में रेपो, रिवर्स रेपो और सीआरआर में कटौती एक शुभ संकेत। केंद्र सरकार और आरबीआई द्वारा उठाए जाने वाले कदम मंदी और महंगाई से लड़ने में कारगर साबित होंगे।

ओ.पी. मालवीय
भोपाल


हम होंगे कामयाब

मंदी और घटती महंगाई के बीच सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक के उपायों ने लोगों की क्रय-शक्ति बढ़ाई है। आय में वृध्दि मांग को बढ़ाएगी। इससे आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।परिणामत: मंदी पर अंकुश के साथ-साथ लोगों को भी राहत मिलेगी। यह मेरा विश्वास है।

डॉ. एम. एस. सिद्दीकी
पूर्व विभागाध्यक्ष-अर्थशास्त्र, फर्रुखाबाद

सुकून तो मिला

भारत में बाजार भावनाओं के सहारे भी चलता है। अगर महंगाई दर दहाई के आसपास होती है, तो लोगों में खासी परेशानी देखने को मिलती है।

इस स्थिति में अगर महंगाई दर 6.38 है, तो निश्चित तौर पर यह राहत पहुंचाने वाला स्तर है। वैसे यह गिरावट कच्चे तेल और कुछ प्रमुख जिंसों की कीमतों में गिरावट की वजह से हो रही है। मंदी के इस आलम में ये घटते आंकड़े लोगों का काफी सूकुन देते हैं।

मुकुंद माधव
चंडीगढ़


अगला साल ठीक

महंगाई की दर घटी है और कीमतें भी काबू में हैं। आलोचना करने से पहले नहीं भूलना चाहिए कि सरकार ने मंदी को घटाने के लिए हर संभव प्रयास किया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी और घटेंगी, इसमें कोई शक नहीं है।

आने वाला साल हर हाल में बेहतर होगा और आशा है कि अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। बाजार में तेजी आएगी और शेयरों की हालत में बदलाव होगा। कुल मिलाकर नया साल उम्मीदें यादा और निराशा कम जगा रहा है।

आलोक सक्सेना
प्रिंटर, लखनऊ


कीमतें तो वहीं हैं

महंगाई दर के घटते आंकड़े मंदी को दूर करने में मददगार साबित हो सकते हैं। हालांकि अभी तो वस्तुओं की कीमतों में कोई कमी नहीं देखने को मिल रही है। सर्दियों के मौसम में सब्जियों की कीमतें जमीन छू लेती थीं, वह भी आज सातवें आसमान पर हैं।

मनीष कुमार
नई दिल्ली

चीजें होगीं सस्ती

महंगाई के आंकड़े निश्चित तौर पर राहत देने वाले हैं। महंगाई दरों के नीचे आने से एक ओर जहां रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी, वहीं आम आदमी की बचत भी बढ़ेगी। ऐसे में इस बची हुई आय को अन्य कार्यों में निवेश किया जा सकेगा।

अनवर आलम
लखनऊ

सरकार को राहत

महंगाई के घटते आंकड़े केवल सरकार को राहत दे सकते हैं जनता को नहीं। आम आदमी के रोजमर्रा की जरूरतों का हिसाब-किताब लगाया जाए तो निष्कर्ष यही निकलता है कि महंगाई दिन-प्रतिदिन अश्व गति से बढ़ रही है।

कपिल अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश


पूरा नियंत्रण नहीं

महंगाई के गिरते आंकड़ों से इस समय स्थितियों के सुधरने की आस तो लगाई जा सकती है। पर यह कहना कि हालात पूरी तरह से नियंत्रण में आ जाएंगे, सरासर गलत होगा। क्योंकि इस समय मंदी की घटा ने पूरी दुनिया को घेर रखा है।

शाहनवाज खान
चांदनी चौक, नई दिल्ली

एक शुभ संकेत

मौजूदा वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन और क्षमता में जबरदस्त कमी देखने को मिली है। ऐसी परिस्थिति में महंगाई दर में कमी एक शुभ संकेत है।

इसमें कोई शक नहीं कि महंगाई के घटने से उपभोक्ताओं की क्रय-शक्ति में वृध्दि होगी, जो वस्तुओं के इस्तेमाल के लिए औद्योगिक उत्पादों की मांग को बढ़ाएगी।

ताहिरा खानम
छात्रा, एमए (अर्थशास्त्र), जमशेदपुर

हकीकत अलग

महंगाई सूचकांकों में भी गिरावट का दौर जारी है। लेकिन महंगाई के आंकड़े और जमीनी हकीकत में काफी अंतर होता है। आंकड़े बता रहे हैं कि महंगाई दर में गिरावट हो रही है, लेकिन आज भी बाजार में पैसा नहीं है। लोग निवेश करने से कतरा रहे हैं।

सादिक अहमद
लखनऊ


धीरे-धीरे असर

जिस तरह से बड़ी बीमारी में दवा धीरे-धीरे असर करती है उसी प्रकार यह जो महंगाई के घटते आंकड़े आ रहे हैं, वह भी पिछले राहत पैकेजों के फलस्वरूप हैं। मंदी के दौर में जो हमारे नीति निर्माताओं द्वारा पैकेज दिए जा रहे हैं, उनका असर आगे देखने को मिलेगा और आम जनता के हित में होगा।

सी. पी. जौहरी
75, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश

दाम कम होंगे

महंगाई के गिरते आंकड़े कहीं न कहीं यह तो दिखाते हैं कि हालात सुधर रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था अपने पुराने रंग में आ रही है। मंहगाई कम होने से कच्चे माल की कीमतों में कमी शुरू होगी।

ताह हुसैन
मुरादाबाद


आम जन हैं बाहर

महंगाई की दर घटने का कोई फायदा आम जनता को नहीं हो रहा है। महंगाई के आंकड़े दरअसल उन वस्तुओं के थोक मूल्यों पर आधारित हैं, जिसका आम जन के जीवन पर कम ही असर होता है।

जितेन्द्र खन्ना
एलारसिन फार्मा, लखनऊ

बकौल विश्लेषक

भरत झुनझुनवाला
अर्थशास्त्री

गिरावट तो बढ़ोतरी दर में है, महंगाई तो बढ़ ही रही है इसमें कोई शक नहीं कि महंगाई के घटते आंकड़ों से मंदी के इस दौर में कुछ तो राहत जरूर मिलेगी लेकिन वह बहुत मामूली होगी।

किन्तु यहां यह ध्यान देना होगा कि यह महंगाई की वृध्दि दर में गिरावट है, इसका मतलब यह है कि महंगाई अभी भी बढ़ रही है।

आम जन को इस असमंजस में नहीं रहना चाहिए कि इससे मंदी की कोई समस्या का समाधान होगा। महंगाई अभी भी बढ़ रही है और भारतीय अर्थव्यवस्था में 6 फीसदी से महंगाई दर बढ़ना कोई सुखद संदेश नहीं है।

ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई कमी की वजह से ही महंगाई दर में कमी आई है। पेट्रोल और घरेलू गैस की कीमतों में कमी आई है लेकिन बाकी अन्य चीजों की कीमतों में कोई कमी नहीं दिखाई पड़ती है।

बहरहाल, महंगाई दर भले ही घट रही हो लेकिन लोगों की क्रय-शक्ति में कोई सुधार नहीं आया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में जो भी राहत पैकेज की घोषणा की है, वह वास्तव में निर्यातकों और कंपनियों को सहारा देने के लिए है।

लेकिन सरकार को चाहिए था कि वे गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वाले लोगों के लिए राहत पैकेज बनाते। लेकिन सरकार को तो गरीबी हटाने से कोई मतलब है नहीं। उन्हें तो बस वोट बैंक की राजनीति चलानी है।

अगर सरकार वास्तव में इस मंदी से पार पाना चाहती है तो उसे गरीबों के लिए राहत पैकेज बनाना होगा और गरीबों के नाम पर दी जाने वाली सब्सिडी को अमीरों के  हाथों में जाने से रोकना होगा। सरकार को चाहिए कि वह गरीबों को तमाम तरह की दी जाने वाली सब्सिडी की रकम को सीधे गरीबों के हाथों में थमा दे।

मेरा यह स्पष्ट मानना है कि अगर सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाती है तो एक रात में भारतीय अर्थव्यवस्था की कायापलट हो जाएगी और मांग में भी वृध्दि होगी। 

बातचीत: पवन कुमार सिन्हा

खुद तो हैं ही अंधेरे में, दूसरों को भी उसी राह पर डाल रहे

चंद्र कुमार छाबड़ा
चेयरमैन, चिकन और हस्तशिल्प प्रमोशन काउंसिल, उत्तर प्रदेश


महंगाई के घटने से अभी तक तो कोई राहत नहीं दिख रही है। बीता साल मंदी की मार से प्रभावित रहा और इस साल भी इसमें कोई फर्क पड़ेगा, ऐसा कम से कम मुझे नहीं लगता है।

मंदी एक-दो दिन में दूर हो जाएगी, ऐसा मानने वाले अंधेरे में हैं और दूसरों को भी अंधेरे में रख रहे हैं। जब सरकार इस तरह के बयान देती है तो मुझे अफसोस होता है। हमारे देश के प्रधानमंत्री को देश के सामने हालात को साफ करना चाहिए।

वर्तमान में, मंदी से बचाव के लिए जनता को तैयार करने की जरूरत है न कि फौरी कदमों की। आज भी आप देख सकते हैं कि सरकार ने दुनिया भर में तेल की कीमतों के जमीन पर आ जाने के बाद भी उस अनुपात में दामों में कटौती नहीं की है।

इस वक्त मंदी से तबाह सबसे यादा छोटे कारोबारी हुए हैं पर राहत बड़ों को ही दी जा रही है। चिकन और हस्तशिल्पी विदेशों से ऑर्डर रद्द होने या न मिलने से परेशान हैं। घरेलू बाजार भी मंदी की चपेट में हैं।

छोटे व्यापारी तो रिटेल के क्षेत्र में बड़ों के कूद पड़ने से पहले ही परेशान थे और अब बाजार में मांग घटने से। मेरा विचार है कि सरकार को सबसे पहले छोटों की चिंता करनी चाहिए क्योंकि बड़े तो मंदी को कुछ हद तक झेल लेंगे।

कुल मिलाकर कहा जाए तो हालात इस साल भी सुधरने की आशा नहीं करनी चाहिए। हां यह जरूर है कि सरकार चुनावी फायदे के लिए कुछ लोक-लुभावन घोषणाएं कर सकती है और यों कहें कि लगातार करती जा रही है।

इन कदमों से यह भ्रम जरूर पैदा हुआ है कि मंदी से देश उबर रहा है। हां एक बात की आशा जरूर है कि सरकार बाजार में पूंजी की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए कुछ और कदम इस साल उठाएगी। 

बातचीत: सिध्दार्थ कलहंस

पुरस्कृत पत्र
आम जन को राहत नहीं मिल रहा

महंगाई के घटते आंकड़े उन्हीं उत्पादों को राहत देते हैं, जिनका उपयोग मात्र 10 फीसदी संपन्न वर्ग करता है जबकि महंगाई के झटके नब्बे फीसदी निम्न वर्ग झेलते हैं।

महंगाई के घटते आंकड़े अनाज, दालें, सब्जियां, तेल, यातायात, शिक्षा, चिकित्सा, झुग्गी-झोपड़ी यानी आम जन के उपयोग की वस्तुओं से दूर हैं। घटते आंकड़े आम भारतीय और कारोबार जगत को जरा सी भी राहत देने में विफल रहे हैं।

रश्मिलता
शिक्षिका, हुडील हॉउस, अन्नपूर्णा होटल, सीकर, राजस्थान


…और यह है अगला मुद्दा

सप्ताह के ज्वलंत विषय, जो कारोबारी और कारोबार पर गहरा असर डालते हैं। ऐसे ही विषयों पर हर सोमवार को हम प्रकाशित करते हैं व्यापार गोष्ठी नाम का विशेष पृष्ठ। इसमें आपके विचारों को आपके चित्र के साथ प्रकाशित किया जाता है। साथ ही, होती है दो विशेषज्ञों की राय।

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First Published - January 4, 2009 | 10:50 PM IST

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