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व्यापारिक समझौतों को गति

Last Updated- December 15, 2022 | 4:29 AM IST

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक भारत और अमेरिका जल्दी ही एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बस कुछ मुद्दों पर अंतिम सहमति बनाना बाकी है। इससे पहले गोयल और अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विलबर रॉस के बीच बातचीत हुई। बातचीत को लेकर जारी आधिकारिक वक्तव्य के मुताबिक दोनों पक्षों ने सीमित कारोबार पैकेज को अंतिम रूप देने पर सहमति जताई। इस वर्ष फरवरी में जब अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भारत आए थे तो व्यापार उनके एजेंडे में भी शामिल था। उन्होंने कहा कि वह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बढिय़ा समझौते पर पहुंच सकते हैं। ऐसी बातें सुखद हैं और आशा की जानी चाहिए कि इस दिशा में ठोस पहल होगी। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है और सन 2019-20 में दोनों देशों के बीच 88.75 अरब डॉलर का व्यापार हुआ।
भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों में जो कुछ दांव पर लगा है, खासकर भारत की ओर से उसे देखते हुए इनकी आपसी दिक्कत अपेक्षाकृत छोटी है। भारत को यह समझना होगा कि उसे किसी भी सौदे से कुछ बड़ा हासिल करने के लिए कुछ रियायतें देनी होंगी। इसके लिए अन्य बातों के अलावा नियामकीय पारस्परिकता की भी आवश्यकता होगी। दोनों वाणिज्य मंत्रियों ने ऐसे एक मसले पर भी बात की। भारत के कच्चे झींगे पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि अमेरिकी नियामकों का मानना था कि भारत में जंगली कछुओं का पर्याप्त संरक्षण नहीं हो रहा है। इसमें दो राय नहीं कि इसे समुचित नियमण वाला एक कार्य समूह इस मसले को हल कर सकता है। ऐसी अन्य छिटपुट समस्याएं भी हैं जिन्हें उचित सरकारी रुख के साथ हल किया जा सकता है। बस प्रधानमंत्री कार्यालय को इस पर उचित ध्यान देना होगा। उदाहरण के लिए अमेरिका से डेरी उत्पादों के आयात के सवालों पर भी समझौते पर पहुंचा जा सकता है। पशु वसा वाले डेरी उत्पादों के आयात पर भारत का कड़ा रुख प्रतिबंध के बजाय अलग लेबल लगाकर हल किया जा सकता है। हाल के समय में अमेरिका में भारत को लेकर काफी नकारात्मकता रही है। हालांकि ऐसा काफी हद तक उसकी अपनी नीतियों से हुआ है। कोविड-19 महामारी कई देशों को यह अवसर प्रदान कर रही है कि वे अपने व्यापारिक रिश्तों को नया आकार दें ताकि वैश्विक कारोबार का बड़ा हिस्सा उन्हें मिले। भारत इस अहम मौके पर पीछे नहीं रह सकता। यह आशा की जानी चाहिए कि भारत के वार्ताकार भी उन राजनीतिक बाधाओं को ध्यान में रखेंगे जिनका सामना अमेरिकी प्रशासन कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति दोबारा निर्वाचन की कठिन लड़ाई से दो चार हैं और उन पर यह दबाव होगा कि वह व्यापारिक समझौतों को लेकर रुख कड़ा रखें।
गोयल भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्ते में ऊर्जा और गति पर तो जोर दे रहे हैं लेकिन यह अन्य समझौतों में भी नजर आना चाहिए। मिसाल के तौर पर यूरोपीय संघ के वार्ताकारों के साथ मुक्त व्यापार को लेकर होने वाली बातचीत लंबे समय से लंबित है। इसमें विषयों पर चर्चा अवरुद्ध है जिन्हें व्यापक हित में हल किया जाना चाहिए। यह बात अहम है कि भारत विदेशी बाजारों तक पहुंच बढ़ाने को न केवल स्वीकार करे बल्कि खुलकर यह बात कहे। इसके लिए उसे अपने बाजार भी खोलने होंगे। मुक्त व्यापार दोनों पक्षों को लाभान्वित करता है और खासतौर पर भारतीय उपभोक्ताओं को। इसके साथ ही घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाले सुधार लाए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने आत्म निर्भर भारत से जुड़े अपने भाषण में ऐसे सुधारों का वादा किया था। कोविड-19 संकट और वृद्धि में धीमेपन के इस दौर में भारत को एक बार फिर वैश्वीकरण को अपनाना चाहिए।

First Published - July 22, 2020 | 11:17 PM IST

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