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अब सब्जी-भाजी की तरह मिलेंगी डीवीडी भी

Last Updated- December 05, 2022 | 7:42 PM IST

अब तक आपने ठेलेवालों से सब्जी या फिर आइसक्रीम खरीदी होगी, लेकिन अब आप अपनी मनपसंद फिल्मों की वीसीडी और डीवीडी भी ठेलेवालों से खरीद सकते हैं।


जी नहीं, हम आपके साथ मजाक बिलकुल भी नहीं कर रहे। इस तरह की योजना है मोजर बेयर की। कंपनी ने आपके घर के दरवाजे तक डीवीडी और वीसीडी को पहुंचाने के लिए नए साइकिल कार्टों का सहारा लेगी। यह साइकल कार्ट गली-गली में घूमकर मोजर बेयर की सीडी और डीवीडी बेचेंगे।


कंपनी ने इस तरह के 100 काट्र्स देशभर में लॉन्च कर दिए है। वह तो इन काट्र्स की तादाद को तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रही है।मोजर बेयर की इंटरनेटमेंट डिवीजन के सीओओ जी. धनंजय कहते हैं, ‘इन काट्र्स को रिस्पॉन्स भी जबरदस्त मिल रहा है। हम तो इन साइकल काट्र्स की तादाद को इस वित्तीय वर्ष में 2500 तक ले जाने की योजना बना रहे हैं।


यह न केवल हमारे उत्पादों को उपभोक्ताओं के दरवाजे तक ले जाते हैं, बल्कि यह लोगों को रोजगार भी मुहैया करवाते हैं।’ आज की तारीख में डीवीडी और वीसीडी की कीमतें सब्जियों के बराबर हो चुकी हैं, इसलिए तो कंपनी अब अपने डीवीडी सेगमेंट को बड़े स्तर पर प्रमोट करने में जुटी हुई है। मोजर बेयर के कार्यकारी निदेशक रातुल पुरी का कहना है कि, ‘इस वक्त हमारे सीडी और डीवीडी के जो दाम हैं, उसी आधार पर हम उन्हें एक बड़े बाजार का उत्पाद बनाना चाहते हैं।


फिलहाल तो ज्यादातर उपभोक्ता जानते ही नहीं कि उन्हें हमारे सीडी कहां मिलेंगे। इस तरह की पहल से हमें छोटे शहरों के बाजार में भी पहुंचने में आसानी होगी। वैसे, इसके अलावा हम कई एफएमसीजी कंपनियों से भी बात कर रहे हैं ताकि हमारी सीडीज उन तक आसानी से पहुंच सके।’


आज तो वीसीडी और डीवीडी प्लेयरों का बाजार इतना फैल चुका है कि उन्हें द्वारपाल से लेकर राज्यपाल तक आसानी से खरीद सकते हैं। चीनी समानों की बढ़ती आवक की वजह से एक डीवीडी प्लेयर आज की तारीख में 1500 रुपए भी खरीदा जा सकता है। इस वजह से वीसीडी और डीवीडी की कीमतों में भी काफी गिरावट आई है।


पुरी ने बताया कि,’सीडी की कीमतें, सीडी प्लयेर की कीमतों से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। आज अगर सस्ते डीवीडी प्लेयर उपलब्ध हो रहे हैं, तो इससे डीवीडी की डिमांड भी तेजी से बढ़ जाती है। इसी वजह से तो कीमतों में इतनी गिरावट देखने को मिली है।’ इस कंपनी ने भारतीय फिल्मों की वीसीडी और डीवीडी के बाजार में अपने कदम 28 और 34 रुपये के साथ रखे थे। आज पुरानी और क्लासिक फिल्मों की वीसीडी मोजर बेयर 30 रुपये में बेच रही है।


वहीं नई फिल्मों की वीसीडी 34 रुपये में मिल जाती है। दूसरी तरफ, पुरानी और क्लासिक फिल्मों की डीवीडी कंपनी केवल 39 रुपये में बेच रही है, जबकि नई फिल्मों की डीवीडी की कीमत भी 49 रुपये से ज्यादा नहीं है।


धनंजय कहते हैं, ‘हम बाजार में आजकल डीवीडी को प्रमोट करने में लगे हुए हैं, इसीलिए कार्ट के ज्यादातर हिस्से में वही रहेंगे। वैसे इसका यह मतलब कतई नहीं है कि आपको कार्ट में वीसीडी नहीं मिलेंगे। आप अपनी पसंदीदा फिल्मों की वीसीडी भी वहां से खरीद सकते हैं।’


हालांकि, कंपनी ने पिछले साल अक्टूबर मे अपने वीसीडी और डीवीडी की कीमत बढ़ायी थी। फिर भी कंपनी ने अपने उपभोक्ता बेस पर पूरा भरोसा जताया है। धनंजय का कहना है कि, ‘उपभोक्ता अभी दुकानों पर हमारे डीवीडी और वीसीडी की तलाश में दुकानों पर आते रहते हैं। उन्हें दो तीन रुपये के इजाफे से ज्यादा असर नहीं पड़ता। हालांकि, हमने जो कीमत तय की है, वह हमारी प्रतिद्वंद्विंयों की कीमतों के मुकाबले में है।


हमने कभी इस बात का दावा नहीं किया कि हम सबसे सस्ती सीडी बेचते हैं। लेकिन हमारी कीमत हमेशा हमारे प्रतिद्वंद्विंयों की कीमत के बराबर या उनके थोड़ी कम ही रहेगी।’ कीमतों में इजाफे की वकालत करते हुए पुरी ने बताया कि, ‘सीडी की कीमतों यह इजाफा ऑपरेशनल कॉस्ट के बढ़ने के कारण हुआ है। इस बीच में मालभाड़ा, वैट और दूसरे कई खर्चे भी तो काफी बढ़ गए हैं। इसलिए हमें अपने उपभोक्ताओं पर यह बोझ डालना पड़ा।’


वैसे, इस तरह के कार्ट की शुरुआत अगस्त में कोलकाता में हुई थी। तब ट्रायल के आधार पर ऐसे तीन साइकल काट्र्स को शहर की गलियो में उतारा गया था। वैसे, इस प्रोजेक्ट की असल शुरुआत तो इस साल के शुरू में हुई। इस कार्ट में 35 फिल्मों की वीसीडी और डीवीडी होंगी। कार्ट में हर फिल्म की पांच वीसीडी होगी।


सुनने में तो लगता है कि यह काफी सस्ता पड़ता होगा, पर असल में एक कार्ट पर कंपनी को 20 से 25 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। पुरी का कहना है कि,’अभी तो हम इस प्रोजेक्ट को घाटे में ही चला रहे हैं। आज की तारीख में हम हर रोज 15 सीडी बेच पाते हैं, जबकि अपनी लागत निकालने के लिए भी हमें हर दिन कम से कम 20 सीडी बेचनी पड़ेगी।


उम्मीद है कि हम जल्द ही इस स्तर को भी हासिल कर लेंगे। इस मामले में सबसे ज्यादा दिक्कत यह हो रही है कि लोग बाग नई-नई फिल्में अपने घर में मांगते हैं। अब नई फिल्मों के राइट्स हासिल करना आसान काम तो है नहीं। वैसे हम इस बारे में काफी गंभीरता से सोच रहे हैं।’


औसतन एक कार्ट पर 70 फीसदी नई फिल्में होंगी, जबकि बाकी की 30 फीसदी सीडी क्लासिकी फिल्मों की होगी। उनका कहना है कि,’हर कार्ट पर 35 फिल्में मौजूद होती हैं। इसमें से 15 फिल्में पुरानी होती हैं, जबकि 20 फिल्में नई।’ मोजर बेयर की पोटली में इस वक्त 10 हजार फिल्में हैं। इन कार्टों को इस वक्त तो पूर्वी भारत के कुछ इलाकों में जैसे कोलकाता में उतारा गया है। साथ में, आपको ये दिल्ली में भी दिख जाएंगे।


कंपनी ने दिल्ली मे अगले छह माह में ऐसे 200 कार्टों को उतारने का लक्ष्य रखा है। धनंजय का कहना है कि,’हमने इन्हें फिलहाल पूर्वी और उत्तरी भारत में उतारा है।अगले छह महीनों में हम इन्हें मुल्क के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में भी उतार देंगे।’


साथ ही, जिन इलाकों में इस प्रोजेक्ट को शुरू जाएगा, उस जगह के मुताबिक कार्ट पर वीसीडी और डीवीडी भी रखे जाएंगे। धनंजय ने बताया कि,’अगर कार्ट कोलकाता में है तो उस बंगाली फिल्में तो होंगी ही होंगी। वैसे तो कार्ट का लुक काफी स्टैंडर्ड रखा गया है, लेकिन क्षेत्र के हिसाब से इस बदला भी जा सकता है।’

First Published - April 9, 2008 | 11:55 PM IST

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