facebookmetapixel
Advertisement
लोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष, राहुल गांधी की मांग पर अड़ी विपक्षी पार्टियां16वें वित्त आयोग की नई अंतरण व्यवस्था: राज्यों के लिए फायदे-नुकसान और उठते सवालAI Impact Summit 2026: पंजीयन के नाम पर वसूली से बचें, इंडिया AI मिशन ने जारी किया अलर्टहिंद महासागर में भारत का बड़ा कदम: सेशेल्स के लिए 17.5 करोड़ डॉलर के आर्थिक पैकेज का ऐलानIndia AI Impact Summit 2026: दिल्ली के लग्जरी होटलों में रेट्स आसमान पर, स्वीट्स 30 लाख रुपये तकफार्मा दिग्गजों की हुंकार: चीन से मुकाबले के लिए भारतीय दवा नियमों में बड़े सुधार की जरूरतपीएम इंटर्नशिप योजना में बदलाव की तैयारी; इंटर्नशिप अवधि और आयु सीमा में कटौती संभवमारुति सुजुकी की रफ्तार: 2025 में रेल से 5.85 लाख वाहनों की रिकॉर्ड ढुलाई, 18% का शानदार उछालFY26 की पहली छमाही में कंपनियों का कैपेक्स 6 साल के हाई पर, इंफ्रा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दिखाई तेजीजगुआर लैंड रोवर के वैश्विक नक्शे पर तमिलनाडु: रानीपेट में ₹9,000 करोड़ के TATA-JLR प्लांट का उद्घाटन

बचना है परेशानी से तो मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहले से बनाएं फंड

Advertisement

मेडिकल इमरजेंसी के लिए धन की व्यवस्था करना अक्सर एक कठिन काम होता है क्योंकि इसके लिए तत्काल एक बड़ी रकम जुटानी पड़ती है।

Last Updated- December 01, 2024 | 10:35 PM IST
अचानक बीमारी आए तो इलाज के लिए रकम कहां से लाएं?, If a sudden illness occurs, where will one get the money for treatment?

अचानक आने वाले चिकित्सीय संकट में पैसा जुटाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है, समझदारी इसी में है कि ऐसी मुश्किल घड़ी के लिए पहले से तैयारी कर लें।

मेडिकल इमरजेंसी के लिए धन की व्यवस्था करना अक्सर एक कठिन काम होता है क्योंकि इसके लिए तत्काल एक बड़ी रकम जुटानी पड़ती है। ऐसे में परिवारों के लिए यह जरूरी है कि इस चुनौती से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी कर ली जाए।

प्रमुख समस्याएं

भारत में चिकित्सा के लिए जेब से किए जाने वाले खर्च काफी अधिक हैं। अधिकतर मरीजों के पास कोई चिकित्सा बीमा कवर नहीं होता है। अगर चिकित्सा बीमा कवर है भी तो अक्सर वह भारी-भरकम खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता है। यहां तक कि पर्याप्त चिकित्सा बीमा कवर वाले लोगों को भी अपने घर के आसपास नेटवर्क अस्पताल न होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में उन्हें अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है और बाद में उसकी प्रतिपूर्ति लेनी पड़ती है।

डिजिस्पर्श के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी सौरभ सोनी ने कहा, ‘भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) की पिछली वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 70,000 करोड़ रुपये के पंजीकृत स्वास्थ्य बीमा दावों में से प्रतिपूर्ति वाले दावों की रकम करीब 28,000 करोड़ रुपये थी।’

पर्सनल लोन: महंगा सौदा

पर्सनल लोन ऋण संबंधी जरूरतों को पूरा करता है। बैंकबाजार के मुख्य कार्याधिकारी आदिल शेट्टी ने कहा, ‘ज्यादातर वित्तीय संस्थान नए ग्राहकों के लिए भी पर्सनल लोन की प्रक्रिया कुछ ही घंटों में पूरी कर देते हैं। पहले से स्वीकृत ऋण अथवा वेतन खाते से जुड़े ऋण भी मिनटों में स्वीकृत किए जा सकते हैं।’

मगर पर्सनल लोन बिना रेहन वाले ऋण होते हैं और इसलिए उस पर ब्याज दरें भी अधिक होती हैं। आम तौर पर पर्सनल लोन की ब्याज दर 9.9 से 20.6 फीसदी के दायरे में होती है। मगर उन लोगों को कामकाजी घंटों के इतर पर्सनल लोन लेने में मुश्किलें हो सकती हैं जिनका उस बैंक के साथ कोई संबंध नहीं है यानी जो लोन देने वाले बैंक के ग्राहक नहीं हैं।

क्रेडिट कार्ड: भारी लागत

क्रेडिट कार्ड के जरिये तत्काल रकम मिल सकती है। इसलिए मरीज को भर्ती कराते समय आवश्यक रकम के लिए क्रेडिट कार्ड उपयोगी हो सकता है। क्रेडिट कार्ड पर ब्याज मुक्त ऋण की अवधि 30 से 50 दिनों के लिए होती है।

शेट्टी ने कहा, ‘ब्याज मुक्त अवधि के बाद दरें 2.5 से 4 फीसदी प्रति माह तक हो सकती हैं।’ उन्होंने कहा कि क्रेडिट कार्ड के उपयोग को शुरुआती भुगतान तक सीमित रखना और शेष बिलों के लिए गोल्ड लोन जैसे विकल्पों की तलाश करना बेहतर रहेगा। जिन ग्राहकों को ब्याज मुक्त अवधि के बाद भी भुगतान के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत होती है, उन्हें क्रेडिट कार्ड ऋण की शेष रकम को समान मासिक किस्तों (ईएमआई) में बदल लेना चाहिए। इससे ब्याज लागत कम हो सकती है।

फिनटेक: शर्तों पर दें ध्यान

फिनटेक कंपनियां अब सबवेंशन मॉडल के तहत चिकित्सा ऋण उपलब्ध कराती हैं। इसमें अस्पताल ही ब्याज का बोझ उठाता है। केयरपाल मनी के मुख्य कारोबार अधिकारी साहिल लक्ष्मणन ने कहा, ‘इससे हमारा प्लेटफॉर्म ग्राहकों को शून्य फीसदी ब्याज पर ऋण देने में समर्थ है।’ यह मॉडल मोबाइल फोन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के लिए उपलब्ध शून्य फीसदी ब्याज वाले ऋण जैसा ही है।

फिनटेक अक्सर पारंपरिक ऋणदाताओं के मुकाबले तेजी से और आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराती हैं। लोनटैप फाइनैंशियल टेक्नोलॉजिज की वरिष्ठ उपाध्यक्ष सौम्या अरोड़ा ने कहा, ‘हम 8,000 रुपये से 15 लाख रुपये तक के ऋण देते हैं। उसमें आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) जैसी प्रक्रियाओं के लिए ऋण भी शामिल है जो आम तौर पर बीमा कवर के दायरे में नहीं होते।’ मगर ऐसे ऋण उन अस्पतालों तक ही सीमित हैं, जिनकी इन ऋणदाताओं के साथ साझेदारी है।

क्या करें और क्या न करें

अंतिम समय में रकम जुटाने के तनाव से बचने के लिए एक मेडिकल इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी है। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और सहजमनी के संस्थापक अभिषेक कुमार ने कहा, ‘ऐसी परिस्थितियों के लिए करीब 10 लाख रुपये का कोष होना चाहिए। यह खासकर उन परिवारों के लिए जरूरी है जहां बुजुर्ग सदस्य हैं। इस रकम को बचत खाते और लिक्विड फंड के बीच बांटकर रखना चाहिए।’ फिनटेक से ऋण लेते समय बारीक अक्षरों में लिखी शर्तों को सावधानीपूर्वक समझने की जरूरत है।

कुमार ने कहा, ‘कुछ फिनटेक ऋणदाता एकमुश्त ईएमआई की मांग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, 12 ईएमआई वाले ऋण में से 4 ईएमआई का भुगतान एकमुश्त करना पड़ सकता है।’

Advertisement
First Published - December 1, 2024 | 10:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement