भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने शुक्रवार को रीपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की कटौती करते हुए इसे 5.25% कर दिया है। मजबूत आर्थिक वृद्धि (GDP) और मुद्रास्फीति (Inflation) में नरमी के बीच आरबीआई ने नीतिगत दर में यह कटौती की है। वहीं, तरलता (Liquidity) की मौजूदा स्थिति को देखते हुए रिजर्व बैंक ने सिस्टम में अतिरिक्त नकदी डालने का निर्णय लिया है। एक्सपर्ट्स का मानना हैं कि केंद्रीय बैंक के इन कदमों से फिक्स्ड डिपॉजिट (FDs) की चमक फीकी हो गई है। वहीं, दूसरी तरफ डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट के साथ-साथ बॉन्ड बाजार की चमक बढ़ सकती है।
एडलवाइस म्युचुअल फंड ने कहा कि हमारी नजर में दिसंबर की एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) बैठक मिली जुली रही। आरबीआई ने बॉन्ड मार्केट की उम्मीद से थोड़ा ज्यादा कदम तो उठाए, लेकिन इसके बाद भी लंबी अवधि वाले बॉन्ड्स (15 साल और उससे अधिक) की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं दिखा।
अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि OMO (ओपन मार्केट ऑपरेशन) के लिए आरबीआई किस तरह के सरकारी बॉन्ड खरीदने का फैसला करती है। आरबीआई अलग-अलग अवधि वाले बॉन्ड खरीदती है, लेकिन कौन-से बॉन्ड खरीदे जाते हैं, यह बात बाजार के लिए बहुत मायने रखती है।
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आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा घोषित इस कटौती के बाद, भले ही फिक्स्ड डिपॉजिट (FDs) दरों में तुरंत कमी न हो, लेकिन आने वाले हफ्तों में बैंक खासकर शॉर्ट और मीडियम टेन्योर पर अपनी दरों में बदलाव कर सकते हैं।
बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी ने कहा, “परंपरागत निवेशक और रिटायर लोगों के लिए यह सही समय है कि वे लंबी अवधि वाली एफडी में निवेश करके मौजूदा उच्च ब्याज दरों को सुरक्षित कर लें, इससे पहले कि ये स्लैब खत्म होने लगें। वरिष्ठ नागरिकों को अभी भी नियमित दरों के मुकाबले 50 बेसिस पॉइंट तक का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है।”
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि तरलता (Liquidity) की मौजूदा स्थिति को देखते हुए रिजर्व बैंक ने सिस्टम में अतिरिक्त नकदी डालने का निर्णय लिया है। इसके लिए RBI दिसंबर महीने में 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड की खरीद (OMO Purchase) करेगा। इसके अलावा 5 अरब अमेरिकी डॉलर का तीन साल का डॉलर-रुपया स्वैप भी किया जाएगा, जिससे आर्थिक प्रणाली में और स्थिरता आएगी।
एडलवाइस म्युचुअल फंड ने एक नोट में कहा, फॉरेक्स स्वैप (FX Swap) बैंकिंग सिस्टम को व्यापक रूप से तरलता (liquidity) प्रदान करेगा, जो आमतौर पर यील्ड कर्व के शॉर्ट एंड के पक्ष में रहता है। इन उपायों से कम समय में लगभग 1.45 लाख करोड़ रुपये की स्थायी नकदी उपलब्ध कराने के चलते, अगले 2–3 महीनों में अतिरिक्त स्थायी तरलता उपायों की आवश्यकता घट गई है। इससे यह अनिश्चितता बनी रहती है कि निर्धारित राशि से आगे भविष्य में OMO कब किए जाएंगे और कितनी मात्रा में होंगे।
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इन उम्मीदों के साथ, एडलवाइस म्युचुअल फंड ने अनुमान लगाया हैं कि निकट भविष्य में यील्ड कर्व का लॉन्ग एंड अस्थिर बना रहेगा, जबकि शॉर्ट एंड, विशेषकर मनी मार्केट सेगमेंट, इसका मुख्य लाभार्थी होगा।
वास्तव में, नीति के बाद कर्व में और ढलान (steepening) आई है। अब 10 साल की परिपक्वता वाले बॉन्ड और रीपो रेट के बीच स्प्रेड बढ़कर लगभग 120 बेसिस पॉइंट हो गया है, जबकि 30 साल से ज्यादा सेगमेंट में यह स्प्रेड लगभग 210 बेसिस पॉइंट तक पहुंच गया है।
निवेशकों को अगले 2–3 महीनों तक यील्ड कर्व के शॉर्ट एंड में स्थित पोर्टफोलियो पर ध्यान देना जारी रखना चाहिए, और लो ड्यूरेशन, मनी मार्केट तथा लिक्विड जैसी अक़्रुअल-आधारित रणनीतियों को अपनाना चाहिए।
कोटक महिंद्रा एएमसी के मैनेजिंग डायरेक्टर निलेश शाह ने कहा कि बदलती बाजार परिस्थितियों के बीच, फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में स्थिरता लाने और जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत का ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में शामिल होने का मौका भी अब और मजबूत हो गया है। इसका औपचारिक फैसला जनवरी 2026 में आने की उम्मीद है, और इससे लगभग 25 अरब डॉलर तक का विदेशी निवेश आ सकता है। मजबूत मैक्रो आर्थिक स्थिति और मांग व आपूर्ति का अच्छा संतुलन बॉन्ड मार्केट के लिए सकारात्मक माहौल बना रहे हैं।
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मिरे असेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सीईओ (फिक्स्ड इनकम) महेंद्र कुमार जागू का कहना है कि रिजर्व बैंक ने रेट कट के साथ 1 लाख करोड़ की OMO खरीद और 5 अरब डॉलर FX स्वैप जैसे मजबूत लिक्विडिटी उपायों की भी घोषणा की। मार्केट सर्वे के अनुसार, मनी और बॉन्ड मार्केट पहले से ही रेट में कटौती की उम्मीद कर रहे थे। पॉलिसी ऐलान के बाद मार्केट ने पिछले कुछ दिनों की खोई हुई जमीन को काफी हद तक वापस पा लिया, जहां रुपये के उतार-चढ़ाव के जवाब में यील्ड थोड़ी बढ़ गई थी। आगे, क्योंकि आगे रेट्स बढ़ने की संभावना बनी हुई है। इसलिए उम्मीद है कि इंटरेस्ट रेट्स धीरे-धीरे और थोड़ी कम होंगी, क्योंकि आज बताए गए लिक्विडिटी इंजेक्शन के तरीकों का पूरा असर मार्केट में आ जाएगा।