प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
2025 का साल खत्म होने को है और निवेशक इस साल को पीछे मुड़कर देख रहे हैं। ये साल हर तरह की संपत्ति में उम्मीदों को चुनौती देने वाला रहा। साल की शुरुआत में ज्यादातर लोग महंगाई के कम होने, ब्याज दरों में धीरे-धीरे कटौती और शेयरों से स्थिर रिटर्न की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन बाजार ने कुछ और ही तस्वीर दिखाई। आइए देखते हैं इस साल के सबसे बड़े सरप्राइज और 2026 के लिए क्या सबक ले सकते हैं।
इस साल सोना सबसे बड़ा सरप्राइज बनकर उभरा। ब्याज दरें स्थिर रहने के बावजूद सोने की कीमत साल भर में 53 फीसदी चढ़ गई और ये करीब 1,32,294 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू गया। आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड में म्यूचुअल फंड्स की हेड श्वेता राजानी के मुताबिक, कई निवेशकों ने अच्छा प्रदर्शन देखकर सोने के पीछे भागना शुरू कर दिया। नतीजा ये हुआ कि गोल्ड ETF में निवेश पिछले साल की तुलना में 578 फीसदी बढ़ गया।
राजानी ने एक निवेशक का उदाहरण दिया जिन्होंने अपना 38 फीसदी पोर्टफोलियो सोने में डाल दिया। अक्टूबर में जब सोने की कीमत 9.6 फीसदी गिर गई, तो इतना ज्यादा आवंटन होने की वजह से पूरा पोर्टफोलियो नीचे खिसक गया। राजानी कहती हैं कि गलती ये थी कि सोने को शेयरों की जगह इस्तेमाल किया गया। जबकि सोना सबसे अच्छा तब काम करता है जब इसे सुरक्षा देने वाले हिस्से के तौर पर रखा जाए और इसका हिस्सा 20 फीसदी से ज्यादा न हो।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में इस साल काफी झूलें देखने को मिले। अप्रैल में इनमें 17 से 23 फीसदी तक की गिरावट आई।
राजानी बताती हैं कि कई निवेशकों ने इन सामान्य चक्रों को गलत समझा और अपने पोर्टफोलियो में मिड और स्मॉलकैप का हिस्सा 50-60 फीसदी तक पहुंचा दिया। एक 34 साल के निवेशक का मामला सामने आया जिनका पोर्टफोलियो इनमें 65 फीसदी निवेश की वजह से 16 फीसदी नीचे चला गया। बाद में बड़े, मिड और स्मॉलकैप को 55:23:22 के अनुपात में बांटकर जोखिम कम किया गया और पोर्टफोलियो फिर संतुलित हो गया।
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कई निवेशकों ने जल्दी ब्याज दर कटौती की उम्मीद में लंबी अवधि वाले डेट फंड्स में पैसा लगाया। राजानी कहती हैं कि ऐसे taktikल दांव से रिटर्न कुछ खास नहीं मिला, बल्कि औसत ही रहा।
एक क्लाइंट ने ज्यादा लंबी अवधि वाले फंड्स में शिफ्ट किया तो उनकी स्थिरता खराब हो गई। राजानी ने उन्हें शेयरों और टैक्स बचत वाले आर्बिट्राज फंड्स में डाल दिया। उनका मानना है कि डेट का काम तरलता और सुरक्षा देना है, न कि ब्याज चक्र का अनुमान लगाना।
क्रिप्टो बाजार ने भी तेज उछाल और गहरी गिरावट दिखाई। बिटकॉइन अपने ऊपरी स्तर से करीब 25 फीसदी नीचे गिर गया। राजानी ने एक युवा निवेशक की बात कही जिन्होंने क्रिप्टो को अपने पोर्टफोलियो का 30 फीसदी बना लिया। गिरावट आने पर सारे फायदे मिट गए। फिर उन्हें विविधता वाले इक्विटी फंड्स में वापस लाया गया। राजानी कहती हैं कि लंबे समय तक अच्छा कंपाउंडिंग अनुशासित इक्विटी निवेश से ही आता है।
राजानी के अनुसार इस साल साफ दिखा कि भावनाओं से चलने वाली तेजी जल्दी पलट सकती है। जैसे डिफेंस सेक्टर ने पहली छमाही में 37 फीसदी की छलांग लगाई लेकिन दूसरी छमाही में 13 फीसदी गिर गया।
ये तरीके घरेलू निवेशकों को ऐसे साल के लिए तैयार रख सकते हैं जहां बाजार फिर से उम्मीदों के उलट चलें।