facebookmetapixel
Advertisement
Mirae Asset ने उतारा Nifty Metal ETF FoF, ₹5,000 से मेटल और माइनिंग सेक्टर में निवेश का मौकाUP Economic Survey 26: ₹36 लाख करोड़ की होगी प्रदेश की अर्थव्यवस्था, कर्ज घटा व निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरीPFC और REC का बड़ा मर्जर: सरकार की हिस्सेदारी और पावर सेक्टर निवेश पर सबकी नजरFY27 में 6.4% रहेगी भारत की GDP ग्रोथ, मूडीज ने जताया अनुमान; कहा- G20 में सबसे तेजKalyan Jewellers: 76% उछल सकता है ये शेयर, BUY रेटिंग बरकरार; Q3 नतीजों के बाद बना ब्रोकरेज की पसंदAI और मजबूत ग्रोथ से IT शेयर चमक सकते हैं, ब्रोकरेज ने इन 6 स्टॉक्स पर दी BUY की सलाहTata Steel का भारत का कारोबार चमक रहा! 4 ब्रोकरेज ने दिए ₹240 तक के टारगेटराजस्थान की धूप से चलेंगी देश की फैक्ट्रियां! अदाणी को जापान से लंबी अवधि की फंडिंग2025 में भारत के चाय निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड, ऑल-टाइम हाई पर पहुंचाSBI ने बनाया 52-वीक हाई, Q3 नतीजों के बाद जबरदस्त छलांग, ब्रोकरेज बोले- खरीदो

एक फंड कई समाधान : फंड ऑफ फंड्स करेंगे आपकी राह आसान

Advertisement

एफओएफ निवेशकों को एक जगह कई समाधान उपलब्ध कराता है जिससे उन्हें काफी सहूलियत होती है

Last Updated- September 16, 2024 | 10:52 PM IST
Large cap cutoff may increase for the fifth time, likely to cross Rs 1 lakh crore for the first time पांचवीं बार बढ़ सकता है लार्जकैप का कटऑफ, पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचने की संभावना

ऐसे समय में जब शेयर और सोना जैसे परिसंपत्ति वर्गों ने निवेशकों को अधिक रिटर्न दिया हो और वे लगभग अपने शीर्ष स्तर पर कारोबार कर रहे हों, निवेशकों को अक्सर अपने निवेश के लिए सही विकल्प तलाशने में मुश्किल आती है। ऐसे में आपके पोर्टफोलियो आवंटन के लिए फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। हालिया बजट में किए गए कर बदलावों ने इन फंडों का आकर्षण और बढ़ा दिया है।

एफओएफ कई अन्य म्युचुअल फंड योजनाओं में निवेश करते हैं। एफओएफ फंड मैनेजर एफओएफ के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न योजनाएं चुनता है। क्वांटम ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) के मुख्य निवेश अधिकारी चिराग मेहता ने कहा, ‘एफओएफ एक तरह से उसी का विस्तार है जिसके कारण निवेशक म्युचुअल फंडों में आते हैं – पेशेवर प्रबंधन की तलाश। एफओएफ निवेशकों को एक जगह कई समाधान उपलब्ध कराता है जिससे उन्हें काफी सहूलियत होती है।’

एफओएफ में निवेश करने से निवेशकों को विविधीकरण का लाभ मिलता है। मोतीलाल ओसवाल एएमसी के मुख्य कारोबार अधिकारी और कार्यकारी निदेशक अखिल चतुर्वेदी ने कहा, ‘तमाम फंडों में निवेश करते हुए एफओएफ खराब प्रदर्शन करने वाले फंडों के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। इस प्रकार इससे निवेश के समग्र जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।’

निवेश में विविधता

एफओएफ विभिन्न प्रकार के होते हैं। कुछ एफओएफ परिसंपत्ति आवंटन पर आधारित होते हैं, जो इक्विटी, डेट और सोना-चांदी जैसी कमोडिटी के मेल वाले साधनों में निवेश करते हैं। ऐसी योजनाओं में जोखिम भी अलग-अलग होता है। इसलिए इनमें विभिन्न जोखिम प्रोफाइल- आक्रामक, मध्यम अथवा कंजर्वेटिव- की योजनाएं शामिल हो सकती हैं।

इक्विटी एफओएफ जैसी कुछ योजनाएं परिसंपत्ति विशेष पर केंद्रित होती हैं। वे घरेलू इक्विटी फंड या विदेशी म्युचुअल फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेश कर सकती हैं। कुछ एफओएफ इनहाउस फंड तक ही सीमित रहते हैं, जबकि कुछ अन्य दूसरे फंड हाउस की योजनाओं में भी निवेश करते हैं।
एफओएफ, ऐक्टिव अथवा पैसिव दोनों फंडों में निवेश कर सकते हैं। मेहता ने कहा, ‘पैसिव एफओएफ पोर्टफोलियो में किसी परिसंपत्ति वर्ग की कमी को दूर करते हैं। मल्टी-ऐसेट अथवा इक्विटी रणनीतियों के लिए ऐक्टिव एफओएफ बेहतर हैं, क्योंकि भारतीय बाजार में लंबी अवधि में ही बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश दिखती है।’

निहित लागत

एफओएफ किसी लक्ष्य वाले म्युचुअल फंड योजनाओं के डायरेक्ट प्लान में निवेश करते हैं। मगर एफओएफ का अतिरिक्त खर्च भी होता है जिसे वे निवेशक से वसूलते हैं। वित्तीय योजनाकार पारुल माहेश्वरी ने कहा, ‘एफओएफ का एक नुकसान यह है कि इसमें अतिरिक्त खर्च होता है। इस अतिरिक्त खर्च का वहन निवेशक को करना पड़ता है।’

एफओएफ किसी निवेशक के पोर्टफोलियो में जरूरत से ज्यादा विविधता ला सकता है। चतुर्वेदी ने कहा, ‘इससे पोर्टफोलियो के भीतर एकल रूप से शानदार प्रदर्शन करने वाली परिसंपत्तियों से अधिक लाभ हासिल करने की संभावना सीमित हो सकती है अथवा बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंडों का प्रभाव घट हो सकता है।’

बेहतर कराधान

केंद्रीय बजट 2024 में कराधान संबंधी नियमों में बदलाव ने एफओएफ में निवेशकों की रुचि बढ़ा दी है। इन योजनाओं पर पहले डेट योजनाओं के तौर पर कर लगाया जाता था, जहां स्लैब दर के हिसाब से लाभ पर कर लगाया जाता था।

बजट के बाद नियम बदल गए हैं। अब इक्विटी ईटीएफ में 90 फीसदी से अधिक रकम निवेश करने वाले एफओएफ पर 12.5 फीसदी कर लगाया जाता है, बशर्ते लाभ 12 महीने की होल्डिंग अवधि के बाद बुक किया गया हो। अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (12 महीने से कम समय की होल्डिंग अवधि पर) पर 20 फीसदी कर लगाया जाता है।

चतुर्वेदी ने कहा, ‘कर कुशलता बेहतर होने के कारण इक्विटी एफओएफ को अब अलग इक्विटी फंड जैसा ही माना जाता है।’

दीर्घकालिक हो नजरिया

पहली बार निवेश करने वाले या एक जगह कई समाधान तलाशने वाले निवेशकों के लिए एफओएफ आदर्श विकल्प है। माहेश्वरी ने कहा, ‘एफओएफ उन निवेशकों के लिए अच्छा विकल्प है जिन्हें अधिक जानकारी नहीं होती अथवा जो अपने पोर्टफोलियो में खुद कोई बदलाव नहीं करना चाहते हैं।’ निवेशक को इक्विटी केंद्रित एफओएफ में कम से कम 5 साल के लिए निवेश करना चाहिए।

Advertisement
First Published - September 16, 2024 | 10:51 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement