बाजार अपने निचले स्तरों से वापसी कर चुके हैं, क्योंकि विदेशी निवेशक जुलाई से भारतीय इक्विटी की तरफ लौटे हैं। सेंट्रम ब्रोकिंग में कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य निवेश अधिकारी (इक्विटी) अनिल सरीन ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि मौजूदा हालात मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश के लिए अनुकूल हैं। पेश हैं मुख्य अंश:
क्या इक्विटी बाजारों में ताजा तेजी से आप आश्चर्यचकित हैं?
नहीं। कुछ समय से मुद्रास्फीति और इसकी वजह से ऊंची ब्याज दरों को लेकर चर्चा जारी रही है। जब बाजार ने जुलाई में अमेरिका की 9.1 प्रतिशत मुद्रास्फीति को लेकर ज्यादा नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं की तो इससे संकेत गया था कि बाजार में खराब मुद्रास्फीति का असर देखा जा चुका है। दूसरा काराक जुलाई में विदेशी संस्थागत निवेशक प्रवाह में आया सकारात्मक बदलाव था। इन दोनों बदलावों से बाजारों में संभावत तेजी की उम्मीद पैदा हुई थी। भविष्य के लिहाज से देखें तो यह कहा जा सकता है कि जब तक कोई बड़ा भूराजनीतिक घटनाक्रम नहीं होता है, तब तक बाजार मौजूदा स्तरों पर काफी मजबूती के साथ डटे रह सकते हैं।
इस तेजी को लेकर छोटे निवेशक आशंकित क्यों हैं?
छोटे निवेशकों में आशंका और हिचकिचाहट बनी हुई है। म्युचुअल फंडों में पूंजी प्रवाह बाजार उतार-चढ़ाव से संबंधित है। यदि बाजार उतार-चढ़ाव लंबी अवधि तक सकारात्मक बना रहता है तो प्रवाह मजबूत बन जाएगा।
क्या चीन के घटनाक्रम से
वैश्विक वित्तीय बाजार फिर से प्रभावित हो सकते हैं?
चीनी ऋण स्तर काफी ऊपर हैं। कंपनियों पर काफी अधिक कर्ज है और उपभोक्ता (खासकर घर खरीदार) भी ऊंचे कर्ज बोझ से जूझ रहे हैं। रियल एस्टेट का इस देश की अर्थव्यवस्था में 30 प्रतिशत का योगदान है और इसकी कीमतें जून में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत नीचे आ गईं। रियल एस्टेट के बाद दूसरी समस्या निर्यात की है, जो ‘जीरो कोविड’ नीति से प्रभावित हुआ है।
क्या स्मॉलकैप और मिडकैप में जोखिम लेने पर फायदा होगा?
हम इस सेगमेंट को लगातार पसंद कर रहे हैं। हमने महसूस किया है कि स्मॉलकैप और मिडकैप ने कमजोर जीडीपी वृद्धि अवधियों के दौरान खराब प्रदर्शन किया और आर्थिक तेजी की अवधि के दौरान काफी अच्छा प्रदर्शन किया। मजबूत अवधि उभरते उद्योगों (लॉजिस्टिक, ई-कॉमर्स, स्टाफिंग आदि जैसे) के लिए तेज वृद्धि में मददगार होती है। नकदी प्रवाह भी आसान होता है और छोटी कंपनियों के लिए अवसर भी बढ़ते हैं।
क्या आप मानते हैं कि निचले स्तर पर निवेश कर चुके घरेलू संस्थान बिकवाली पर विचार करेंगे? विदेशी प्रवाह के बारे में क्या स्थिति है?
घरेलू संस्थागत संस्थानों को एसआईपी और अन्य विकल्पों से लगातार मजबूत पूंजी प्रवाह हासिल हो रहा है। मूल्यांकन ऊंचे हैं, लेकिन बहुत ज्यादा ऊंचे नहीं। इनमें बिकवाली की खास वजह भी नहीं है। विदेशी प्रवाह सकारात्मक हो सकता है, क्योंकि लंबे समय से वैश्विक आर्थिक संदर्भ में कोई नया झटका नहीं लगा है। दीर्घावधि में अंतरराष्ट्रीय उभरते बाजारों में भारत के लिए कुछ ही विकल्प हैं।
जून तिमाही के आय सीजन के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
इसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया है। जून तिमाही मेंमजबूत राजस्व वृद्धि और कमजोर सकल मार्जिन दर्ज किया गया है। कोविड-19 ने आधार तिमाही को प्रभावित किया था, जिससे तुलना करना कठिन हो गया। इसलिए विश्लेषकों ने कोविड-पूर्व की पहली तिमाही के साथ तुलना पर जोर दिया है। कुल मिलाकर, मार्जिन प्रभावित हुआ है, और पूरे वर्ष का अनुमान घटाकर संशोधित किए जाने की जरूरत है। लेकिन यह नकारात्मक घटनाक्रम कुछ हद तक पूंजीगत वस्तु और इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों की ऑर्डर बुक में तेजी और बैंक ऋणों में वृद्धि की वजह से बदला है।
जिंस कीमतों में ताजा गिरावट को बाजार ने किस नजरिये से
देखा है?
जिंसों में धीरे धीरे तेजी आ सकती है, क्योंकि अन्वेषण और पर्यावरण, सामाजिक एवं प्रशासनिक वजहों से खनन पर काफी प्रतिबंध लगाए गए हैं। कुछ जिंसों में आपूर्ति संबंधित समस्याएं बढ़ी हैं। दूसरी तरफ, चीन में धीमी वृद्धि देखी जा रही है।