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टाटा पावर का बड़ा लक्ष्य: 15% ऑपरेशन प्रॉफिट और मुंद्रा प्लांट जल्द फिर से शुरू होने की उम्मीद

वित्त वर्ष 2025-30 के दौरान 15 फीसदी परिचालन लाभ हासिल करने के लिए कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-30 के दौरान 24,000-25,000 करोड़ रुपये का सालाना पूंजीगत खर्च निर्धारित किया है

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देवांशु दत्ता   
Last Updated- December 25, 2025 | 10:04 PM IST

टाटा पावर देश में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी एकीकृत यूटिलिटी है और वह निर्माण, ट्रांसमिशन और वितरण की पूरी वैल्यू चेन चलाती है। उसने वृद्धि के बड़े लक्ष्य तय किए हैं। कंपनी घरेलू सोलर (इंजीनियरिंग खरीद और निर्माण या ईपीसी) और मॉड्यूल/सेल निर्माण के जरिये बैकवर्ड इंटीग्रेशन कर रही है और रिन्यूएबल एनर्जी का अपना पोर्टफोलियो बना रही है। कंपनी ने 2021 में अधिग्रहित ओडिशा डिस्कॉम्स को भी फिर से खड़ा किया है। उसके पास हाइड्रो/पीएसपी और ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स के कई बड़े ऑर्डर हैं।

वित्त वर्ष 2025-30 के दौरान 15 फीसदी परिचालन लाभ हासिल करने के लिए कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-30 के दौरान 24,000-25,000 करोड़ रुपये का सालाना पूंजीगत खर्च निर्धारित किया है। टाटा पावर के 15,000 करोड़ रुपये का सालाना परिचालन नकदी प्रवाह दर्ज किए जाने की संभावना है और उसके पास 1.1 गुना के शुद्ध कर्ज-पूंजी अनुपात के साथ बैलेंस शीट में आवश्यक मजबूती भी है।

मुंद्रा थर्मल प्लांट को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, क्योंकि इसमें कॉस्ट-प्लस आधार पर अस्थायी व्यवस्था के तहत परिचालन बरकरार था। इसे जून, 2025 से आगे नहीं बढ़ाया गया। नतीजे में संयंत्र की सभी पांचों यूनिट बंद पड़ी हैं। कंपनी विद्युत खरीद समझौते (पीपीए) काउंटरपार्टी और राज्य सरकार के साथ दीर्घावधि करार पर काम कर रही है। इस समाधान पर नजर बनी हुई है। इस दीर्घावधि समाधान के मोर्चे पर अच्छी खबर यह है कि गुजरात सरकार के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।

टाटा पावर के अनुसार संयंत्र से अगली जनवरी तक परिचालन फिर शुरू हो जाने की उम्मीद है। नए पीपीए मसौदे में एक सस्टेनेबल टैरिफ स्ट्रक्चर के तहत आयातित कोयले की लागत को शामिल करने की अनुमति होगी, जिससे तदर्थ धारा 11 पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। दूसरी तिमाही में 300 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज करने के बाद मुंद्रा के फिर से मुनाफे में आ जाने की उम्मीद है।

First Published : December 25, 2025 | 10:02 PM IST