टैरिफ संबंधी चिंताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण बिकवाली के दबाव से मंगलवार को कारोबारी सत्र के दौरान बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स में 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह करीब आठ महीने के निचले स्तर 47,627.96 को छू गया। अंत में यह इंडेक्स 2.7 फीसदी की नरमी के साथ 47,719.07 पर बंद हुआ।
बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स अब 9 मई, 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर है। उसने 7 अप्रैल, 2025 को 41,013.68 का 52 सप्ताह का न्यूनतम स्तर छुआ था। जनवरी 2026 में अभी तक स्मॉलकैप इंडेक्स ने बाजार के मुकाबले खराब प्रदर्शन किया है और उसमें 7.6 फीसदी की गिरावट आई है जबकि बीएसई सेंसेक्स में 3.6 फीसदी और बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 4.5 फीसदी की नरमी दर्ज हुई है।
इक्विनॉमिक्स के संस्थापक और शोध प्रमुख जी चोकालिंगम ने कहा कि सितंबर 2024 में अपने उच्चतम मूल्यांकन के बाद से स्मॉलकैप शेयरों में भारी गिरावट आई है। उनका मानना है कि गुणवत्ता वाले स्मॉलकैप शेयरों का बड़ा हिस्सा अब आकर्षक मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है।
उन्होंने कहा, हमारा अनुमान है कि स्मॉल ऐंड मिडकैप सेगमेंट में, विशेष रूप से मजबूत फंडामेंटल्स वाले स्मॉलकैप शेयरों में, मार्च 2026 के मध्य से महत्त्वपूर्ण सुधार देखने को मिलेगा। यह सेगमेंट कैलेंडर वर्ष 2026 में सेंसेक्स और निफ्टी से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। हमारा मानना है कि अगले 1 से 2 वर्षों में संपत्ति सृजन के लिए गुणवत्तापूर्ण स्मॉलकैप शेयरों को खरीदने के लिए मार्च 2026 के अंत तक का सही समय होगा।
इस बीच, मंगलवार को दिन के कारोबार में बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स के 266 शेयरों ने अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर को छुआ। आवास फाइनैंसियर्स, बाटा इंडिया, गोदरेज प्रॉपर्टीज, गोकलदास एक्सपोर्ट्स, जस्ट डायल, एमटीएनएल, अशोका बिल्डकॉन, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (आईईएक्स), पीसीबीएल, रेमंड, प्राज इंडस्ट्रीज, स्पाइसजेट और टाटा केमिकल्स उन प्रमुख शेयरों में शामिल हैं, जिन्होंने 52 सप्ताह के निचले स्तर को छुआ।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने हाल में एक नोट में कहा, चिंता का विषय यह है कि दिसंबर 2025 की शुरुआत में जारी तिमाही नतीजे आय वृद्धि में सुधार का संकेत नहीं देते हैं। ऑटो कंपनियों के नतीजे शुरू होने पर यह स्थिति बदलने की संभावना है, क्योंकि इस क्षेत्र ने तीसरी तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है। यह अच्छी बात है कि इस क्षेत्र में वृद्धि की रफ्तार जारी है।
लेकिन उनका मानना है कि अच्छी खबर यह है कि आईएमएफ ने भारत की वित्त वर्ष 2026 की जीडीपी वृद्धि दर को बढ़ाकर 7.3 फीसदी कर दिया है। इससे कई चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन की पुष्टि होती है।
विश्लेषक का मानना है कि निकट भविष्य में भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक मुद्दे हावी रहेंगे और बाजार की दिशा को प्रभावित करेंगे। उनका सुझाव है कि निवेशक इन घटनाक्रमों पर नजर रख सकते हैं और गिरावट के समय उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों को धीरे-धीरे खरीदने की रणनीति अपना सकते हैं।
विजयकुमार ने कहा, ग्रीनलैंड टैरिफ पर अमेरिका-यूरोप के गतिरोध को लेकर स्पष्टता आने तक निकट भविष्य में बाजार में अस्थिरता जारी रहने की संभावना है। चूंकि दोनों पक्षों ने अपना रुख कड़ा कर लिया है, इसलिए अनिश्चितता कुछ समय तक बनी रहेगी। अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप के खिलाफ जाता है तो नया घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। हालांकि, यह निश्चित नहीं है कि फैसला आज ही आएगा।