कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के एक रिसर्च नोट में कहा गया है कि रिटेल निवेशकों के इक्विटी पोर्टफोलियो ने पिछले 16 से 18 महीनों में प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले काफी कमजोर प्रदर्शन किया है और शायद ही किसी ने रिटर्न दिया हो। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष इक्विटी होल्डिंग, जिसमें म्युचुअल फंड और पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाएं यानी पीएमएस शामिल हैं, के विश्लेषण से पता चलता है कि खुदरा पोर्टफोलियो न केवल इंडेक्स रिटर्न से पीछे हैं, बल्कि उनको व्य़ापक बाजार में लंबे समय तक गिरावट के दौरान निवेश पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (केआईई) के इक्विटी म्युचुअल फंडों की वेटेड-एवरेज नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) के विश्लेषण से पता चलता है कि जुलाई 2024 और दिसंबर 2025 के बीच रिटेल निवेशकों ने सिर्फ मामूली रिटर्न कमाया, जबकि इस दौरान कैलेंडर वर्ष 2022-25 के दौरान जुटाए गए फंडों में आए कुल पूंजी प्रवाह का योगदान लगभग 53 प्रतिशत था।
मिडकैप फंडों की वेटेड-एवरेज एनएवी सितंबर 2024 के पीक से 3 प्रतिशत, स्मॉलकैप फंडों की 13 प्रतिशत और थीमेटिक फंडों की 13 प्रतिशत गिर गई। कुल मिलाकर, वेटेड-एवरेज एनएवी सितंबर 2024 से 1.4 प्रतिशत कम थी। यह खराब प्रदर्शन उसी दौरान बड़े इक्विटी सूचकांकों द्वारा दिए गए सकारात्मक रिटर्न के बिल्कुल उलट है।
मिडकैप, स्मॉलकैप और थीमेटिक फंड ऐसे सेगमेंट हैं जिन्होंने पिछले दो साल में सबसे ज़्यादा निवेश आकर्षित किया। लेकिन इनसे मिलने वाला रिटर्न पिछले 18 महीनों में संपूर्ण इक्विटी म्युचुअल फंड रिटर्न के बराबर या उससे भी खराब रहा, जिससे पोर्टफोलियो प्रदर्शन और भी बिगड़ गया।
रिटेल निवेशकों की डायरेक्ट इक्विटी होल्डिंग को भी नहीं बढ़ पा रही है। पिछले 18 महीनों में एनएसई पर सूचीबद्ध शेयरों में में रिटेल निवेशकों की एयूएम मोटे तौर पर 43 लाख करोड़ रुपये के आसपास ही रही है।
हालांकि रिटेल इक्विटी एयूएम 2021 और 2025 के बीच लगभग 15 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ी। लेकिन इस बढ़ोतरी का ज्यादातर हिस्सा मार्च 2023 और जून 2024 के बीच आया। हाल के महीनों में इक्विटी में डायरेक्ट रिटेल का निवेश भी कमजोर पड़ा है।
केआईई के निफ्टी 500 इंडेक्स में टॉप 20 रिटेल-आधारित शेयरों के विश्लेषण से पता चलता है कि मार्च 2023 और जून 2024 के बीच तेज बढ़ोतरी के बाद जून 2024 से इस बास्केट ने नकारात्मक रिटर्न दिया है।
ज्यादा रिटेल स्वामित्व वाले कुछ ‘नैरेटिव’ शेयरों में भी ऐसा ही पैटर्न देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार कई मुख्य निवेश नैरेटिव फेल होने के कारण हाल में आई गिरावट के बाद भी इनमें से कई शेयरों के मूल्यांकनों और फंडामेंटलों में कोई तारतम्य नहीं है।
अध्ययन से पता चला है कि पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा (पीएमएस) का प्रदर्शन भी कुछ खास नहीं रहा है। एयूएम के हिसाब से टॉप 20 पीएमएस स्ट्रैटजी के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले 12 महीनों में सिर्फ कुछ ही ने अच्छा रिटर्न दिया है।
कमजोर प्रदर्शन के बावजूद, इस दौरान पीएमएस उद्योग में लगातार मजबूत निवेश बरकरार रहा। केआईई ने आगाह किया है कि लगातार खराब प्रदर्शन से इस सेगमेंट में भविष्य के प्रवाह के लिए जोखिम हो सकता है।