निफ्टी-50 सूचकांक अपने 5 जनवरी के ऊंचे स्तर 26,373.20 से 5.5 फीसदी गिर गया है और आंकड़ों के हिसाब से इस महीने में एक दशक में यह सबसे खराब प्रदर्शन दर्ज कर सकता है। सूचकांक अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज (200-डीएमए) के करीब है। यह जनवरी में 3.7 प्रतिशत फिसल चुका है। इससे पहले निफ्टी 50 सूचकांक में बड़ी गिरावट जनवरी 2016 में आई थी। तब यह 4.8 प्रतिशत तक लुढ़क गया था। अगर गिरावट जारी रही, तो 2011 के बाद जनवरी में यह तीसरी सबसे बड़ी गिरावट होगी। 2011 में सूचकांक 10 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया था।
विश्लेषक इस गिरावट का कारण भू-राजनीतिक और टैरिफ से जुड़े घटनाक्रम को मान रहे हैं। प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों के अनुसार भू-राजनीति व्यापार समीकरणों को फिर से बदल रही है और भौगोलिक सीमाओं के प्रभावित होने का जोखिम है। उन्होंने कहा कि वैश्विक घटनाएं व्यापार में अनिश्चितता और अस्थिरता पैदा कर रही हैं, खासकर भारत के लिए, क्योंकि अमेरिका के साथ निरंतर टैरिफ विवाद और संबंधित घटनाक्रम बाजार की रफ्तार में बाधा डाल रहे हैं।
पीएल कैपिटल ग्रुप में इंस्टीट्यूशनल रिसर्च के डायरेक्टर अमनीश अग्रवाल ने कहा, ‘मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितता को देखते हुए बाजारों के सतर्क रहने का अनुमान है। हमने पिछले 12 महीनों में मिड/स्मॉलकैप की तुलना में लार्जकैप में अच्छा रिटर्न (16-17 प्रतिशत) देखा है। हमें नहीं लगता कि यह रुझान जल्द ही बदलेगा। हम निफ्टी की वैल्यू 15-साल के औसत पीई 18.7 गुना पर 3 प्रतिशत डिस्काउंट पर करते हैं, जिसमें दिसंबर 2027 के लिए ईपीएस 1,539 रुपये है और 12 महीने का लक्ष्य 28,814 (पहले 29,094) तय किया है।’
बुधवार को कारोबार में निफ्टी 24,920 के निचले स्तर पर पहुंच गया। उसने मई 2025 के बाद पहली बार 200-डीएमए (25,124 स्तर) को परखा। 200-डीएमए किसी खास सूचकांक या शेयर के दीर्घावधि रुझान को पहचानने के लिए जरूरी तकनीकी संकेतक है। अगर कीमतें इस अहम एवरेज से ऊपर रहती हैं, तो रुझान पॉजिटिव माना जाता है और इसके उलट होने पर नेगेटिव।