आगामी केंद्रीय बजट से निवेशकों की उम्मीदें कम दिख रही हैं और इसकी झलक बजट से पहले बाजार के कमजोर प्रदर्शन में स्पष्ट तौर पर दिख रही है। बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चला है कि बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स जनवरी में अब तक करीब 4 फीसदी लुढ़क चुका है जो 2016 के बाद बजट पूर्व महीने का उसका सबसे खराब रिटर्न है।
कॉरपोरेट आय में नरमी, विदेशी निवेशकों द्वारा की गई भारी बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने जैसे कारकों से बाजार की रफ्तार प्रभावित हुई। व्यापक बाजार में और भी तेज गिरावट दर्ज की गई है। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक में 5.4 फीसदी की गिरावट आई है जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक इस महीने अब तक 7.3 फीसदी से अधिक गिर चुका है। ये दोनों सूचकांक पिछले साल के रुझान को ही दर्शा रहे हैं। पिछले साल बजट पूर्व महीने में निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक में 7 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 10 फीसदी की गिरावट आई थी।
आगामी केंद्रीय बजट ऐसे समय में पेश किया जाना है जब भू-राजनीतिक अनिश्चितता काफी बढ़ गई है। इसमें लंबे समय से चले आ रहे व्यापार तनाव और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी शामिल हैं। नीतिगत मोर्चे पर अचंभित करने वाली बातों की कम संभावनाओं के बीच निवेशक भी सतर्क रुख अपना रहे हैं।
कंपनी जगत की कमजोर आय और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली से बाजार धारणा प्रभावित हो रही है। चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही के शुरुआती नतीजों ने लाभप्रदता के बारे में चिंताओं को केवल बढ़ाया है।
मॉर्गन स्टैनली के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य इक्विटी रणनीतिकार (भारत) रिधम देसाई ने कहा कि बाजारों पर बजट का प्रभाव दीर्घकालिक संरचनात्मक गिरावट का रहा है। मगर बाजार का वास्तविक प्रदर्शन बजट पूर्व उम्मीदों पर निर्भर करता है और उसकी झलक बाजार की चाल में दिखती है।
देसाई ने एक नोट में कहा, ‘फिलहाल बाजार काफी संशय के साथ बजट की ओर बढ़ रहा है। अगर इतिहास पर गौर करें तो बजट के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव और तेजी का जोखिम दोनों हो सकता है। बाजार की नजर मुख्य तौर पर राजकोषीय मजबूती, पूंजीगत व्यय और क्षेत्र स्तर पर उठाए गए कदमों पर होगी।’
नोट में कहा गया है कि निवेशक एफपीआई निवेश को रफ्तार देने के उद्देश्य से होने वाले पूंजी बाजार के सुधारों पर बारीक नजर रखेंगे। एफपीआई ने जनवरी में अब तक 36,811 करोड़ रुपये की बिकवाली की है जो जनवरी 2025 के बाद से सबसे अधिक मासिक बिकवाली है। उन्होंने कहा, ‘संभव है कि बजट में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक आधार को व्यापक बनाने, पुनर्खरीद पर कराधान को सरल बनाने और गिफ्ट सिटी में कर लाभ बढ़ाने जैसे उपायों की घोषणा की जाए।’
बाजार प्रतिभागियों ने कहा कि बजट से पहले उम्मीदें कम होने का मतलब यह है कि नीतिगत मोर्चे पर मामूली सकारात्मक संकेत भी राहत भरी तेजी की शुरुआत कर सकता है।
हीलियस कैपिटल मैनेजमेंट के संस्थापक और फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने कहा कि शेयर बाजार में लंबे समय तक नरमी पूरे निवेश चक्र को धीमा कर देती है जिससे सरकार के निवेश एवं आर्थिक विकास लक्ष्यों को पूरा करने में समय का काफी नुकसान होता है।
गोल्डमैन सैक्स ने एक नोट में कहा कि बजट में जिन मुद्दों पर नजर रहेगी उनमें राजकोषीय मजबूती की रफ्तार, बेहद अनिश्चित वैश्विक माहौल में व्यय संबंधी सरकार की प्राथमिकताएं और सरकारी प्रतिभूतियों की शुद्ध आपूर्ति शामिल हैं।