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अगस्त में लगातार दूसरे महीने नकदी कारोबार नरम, डेरिवेटिव वॉल्यूम में उछाल

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एनएसई और बीएसई में दोनों के नकदी खंड का संयुक्त रूप से रोजाना का औसत कारोबार (एडीटीवी) 1.03 लाख करोड़ रुपये रहा। यह मासिक आधार पर 0.5 फीसदी की मामूली वृद्धि है।

Last Updated- September 02, 2025 | 9:44 PM IST
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शेयर बाजार में व्यापक आधारित गिरावट के बीच नकदी कारोबार लगातार दूसरे महीने अगस्त में धीमा रहा। मगर इस दौरान डेरिवेटिव कारोबार में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई और उतार चढ़ाव के बीच अगस्त में इसकी वृद्धि दर दो अंकों में रही। एनएसई और बीएसई में दोनों के नकदी खंड का संयुक्त रूप से रोजाना का औसत कारोबार (एडीटीवी) 1.03 लाख करोड़ रुपये रहा। यह मासिक आधार पर 0.5 फीसदी की मामूली वृद्धि है। जुलाई में नकदी खंड के एडीटीवी में 16 फीसदी की गिरावट आई थी।

विशेषज्ञ इस नरमी का कारण प्रमुख सूचकांकों में लगातार हो रही मासिक गिरावट को मान रहे हैं। अगस्त में सेंसेक्स में 1.7 फीसदी और निफ्टी में 1.4 फीसदी की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 जैसे व्यापक सूचकांक क्रमशः 2.9 फीसदी और 4.1 फीसदी तक लुढ़क गए। जुलाई में नुकसान और भी ज्यादा देखने को मिला था। जुलाई में निफ्टी व सेंसेक्स में 2.9-2.9 फीसदी की गिरावट आई थी, वहीं निफ्टी मिडकैप 100 में 3.9 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 5.8 फीसदी की नरमी दर्ज हुई थी।

टॉरस फाइनैंशियल मार्केट्स के सीईओ प्रकाश गगडानी ने कहा, नकदी और डिलिवरी का वॉल्यूम बाजार के प्रदर्शन पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। लगातार गिरावट के साथ नकदी बाजार का वॉल्यूम सीमित दायरे में रहने की संभावना है क्योंकि टैरिफ संबंधी चिंताओं के कारण बाजार की दिशा अस्पष्ट बनी हुई है।

टैरिफ में कोई भी कमी बाजारों में जान फूंक सकती है। इस बीच, डेरिवेटिव सेगमेंट की गतिविधियों में तेजी आई। वायदा और विकल्प (एफऐंडओ) का रोजाना का औसत कारोबार 11.3 फीसदी बढ़कर 414.61 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह नवंबर 2024 के बाद से इसका उच्चतम स्तर है।

वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज़ में इक्विटी स्ट्रैटजी की निदेशक क्रांति बाथिनी ने कहा, पिछले महीने बाजार अस्थिर और सीमित दायरे में रहे। ऐसी स्थितियां जहां डेरिवेटिव ट्रेडर्स फलते-फूलते हैं। ज्यादा अस्थिरता डेरिवेटिव स्ट्राइक कीमतों को बढ़ा देती है, जिससे तुरंत मुनाफे के अवसर पैदा होते हैं।

एफऐंडओ कारोबार फरवरी के 288 लाख करोड़ रुपये से 44 फीसदी बढ़ा है। हालांकि यह सितंबर 2024 में देखे गए 537 लाख करोड़ रुपये के शिखर से 23 फीसदी कम है। उस समय बाजार सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गए थे। यह गिरावट मोटे तौर पर नियामकीय परिवर्तनों के कारण है, जैसे साप्ताहिक एक्सपायरी को केवल दो दिन तक सीमित करना और गैर-बेंचमार्क सूचकांकों के साप्ताहिक अनुबंध बंद करना आदि।

एक्सचेंजों के बीच बाजार हिस्सेदारी की होड़ तेज हो गई है। डेरिवेटिव वॉल्यूम वृद्धि में बीएसई लगातार एनएसई से आगे निकल रहा है और उसका एफऐंडओ एडीटीवी 24 फीसदी बढ़कर 178 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। अगस्त में एनएसई की वृद्धि 3.3 फीसदी थी और यह 237 लाख करोड़ रुपये रहा।

इस हफ्ते से दोनों एक्सचेंज अपने डेरिवेटिव अनुबंधों की एक्सपायरी की तारीख बदल रहे हैं। एनएसई के साप्ताहिक निफ्टी अनुबंध अब गुरुवार की बजाय मंगलवार को एक्सपायर होंगे और बीएसई के सेंसेक्स अनुबंध मंगलवार की बजाय गुरुवार को एक्सपायर होंगे। यह देखना बाकी है कि ये बदलाव भविष्य में बाजार हिस्सेदारी के आयाम को कैसे प्रभावित करेंगे।

बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि बाजार हिस्सेदारी की गतिशीलता में कुछ बदलाव हो सकता है, लेकिन एक्सपायरी के दिन की अदला-बदली से समग्र वॉल्यूम पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

गगडानी का कहना है कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग विकल्पों के पक्ष में अवसरों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक्सपायरी की तारीख की तुलना में अस्थिरता पर अधिक निर्भर करता है। जब तक अवसर मौजूद हैं, एक्सपायरी की तारीख या साप्ताहिक से मासिक अनुबंधों में बदलाव कोई मायने नहीं रखेगा।

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First Published - September 2, 2025 | 9:37 PM IST

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