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फंडिंग नियमों पर आरबीआई से संपर्क कर सकता है ब्रोकरों का संगठन, पुनर्विचार की मांग

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विश्लेषकों और ब्रोकरों का कहना है कि संशोधित नियम उन छोटी ब्रोकरेज फर्मों को ज्यदा प्रभावित कर सकते हैं, जो प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग पर निर्भर हैं

Last Updated- February 16, 2026 | 9:55 PM IST
Reserve Bank Of India (rbi)

एसोसिएशन ऑफ नैशनल एक्सचेंजेस मेंबर्स ऑफ इंडिया (एएनएमआई) पूंजी बाजार में जोखिम से संबंधित संशोधित निर्देशों की समीक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से संपर्क करने की योजना बना रहा है। केंद्रीय बैंक के निर्देशों के कारण सूचीबद्ध ब्रोकरेज शेयरों में भारी बिकवाली हुई है।

विश्लेषकों और ब्रोकरों का कहना है कि संशोधित नियम उन छोटी ब्रोकरेज फर्मों को ज्यदा प्रभावित कर सकते हैं, जो प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग पर निर्भर हैं क्योंकि पूंजी की ज्यादा जरूरतों से उनका लिवरेज सीमित हो जाएगा। इन बदलावों से मार्जिन ट्रेडिंग फंडिंग (एमटीएफ) की भी लागत बढ़ सकती है। एमटीएफ ऐसा कारोबारी क्षेत्र है जिसमें बड़े ब्रोकरों ने हाल के वर्षों में राजस्व में विविधता लाने के लिए आक्रामक विस्तार किया है।

एएनएमआई के अध्यक्ष के सुरेश ने कहा, वे लिवरेज आधारित दृष्टिकोण को ज्यादा स्ट्रक्चर्ड ढांचे में बदल रहे हैं, जो बड़ा बदलाव है। इसके तहत कुछ स्थितियां उद्योग के लिए (विशेष रूप से प्रोप्राइटरी डेस्क के लिए) अनुकूल नहीं हैं। ज्यादा गारंटी की आवश्यकताओं से मार्केट मेकिंग गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। अगर प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग में गिरावट आती है तो बाजार के वॉल्यूम पर असर होगा, जिससे तरलता और ब्रोकरों की आय दोनों प्रभावित होंगे।

ब्रोकरों ने कोलेटरल के तौर पर इस्तेमाल शेयरों पर 40 फीसदी की कटौती निर्धारित करने पर भी चिंता जताई है और इसे अत्यधिक बताते हुए इसमें नरमी की मांग की है। सुरेश ने कहा, हम आरबीआई से इस बारे में चर्चा करना चाहते हैं। हम अपने जवाब की एक प्रति बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी के साथ भी साझा करेंगे।

संशोधित नियम 1 अप्रैल से लागू हो रहे हैं। साथ ही एसटीटी में वृद्धि से ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर हो सकता है। जीरोधा के संस्थापक नितिन कामत ने ब्रोकरेज फर्मों के लिए लागत बढ़ोतरी पर चिंता जताई है, जिसका बोझ ग्राहकों पर डाला भी जा सकता है या नहीं भी। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि जीरोधा को कोई बाहरी वित्तपोषण प्राप्त नहीं है और वह सेल्फ-क्लियरिंग सदस्य है, इसलिए ग्राहकों के शुल्क पर असर नहीं होगा।

कामत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, इस परिपत्र के कारण इंट्राडे फंडिंग महंगी हो जाएगी क्योंकि अब 100 फीसदी गारंटी की आवश्यकता होगी (जो पहले 50 फीसदी थी)। एमटीएफ वित्तपोषण भी संभवतः महंगा हो जाएगा क्योंकि बैंकों को अब 100 फीसदी कोलेटरल की आवश्यकता होगी।

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First Published - February 16, 2026 | 9:48 PM IST

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