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SEBI ने लॉन्च किया SWAGAT-FI फ्रेमवर्क; कम जोखिम वाले विदेशी निवेशकों को सिंगल विंडो से आसान एंट्री

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इसे प्रभावी बनाने के लिए, सेबी ने एफपीआई और एफवीसीआई नियमों में संशोधन किया है, जो एक जून, 2026 से लागू होंगे

Last Updated- December 03, 2025 | 9:08 PM IST
SEBI

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने सरकारी स्वामित्व वाले फड्स जैसे कम जोखिम वाले विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय प्रतिभूति बाजार में भागीदारी को आसान बनाने के लिए कदम उठाया है। इसके तहत नियामक ने सिंगल विंडो पहुंच की शुरुआत की है। इस कदम का उद्देश्य अनुपालन को सरल बनाना और निवेश गंतव्य के रूप में देश को और आकर्षक बनाना है।

नया फ्रेमवर्क… सिंगल विंडो ऑटोमैटिक एंड जेनरलाइज्ड एक्सेस फॉर ट्रस्टेड फॉरेन इनवेस्टर्स (SWAGAT-FI)… कम जोखिम वाले विदेशी निवेशकों को आसान निवेश पहुंच प्रदान करेगा, मल्टीपल इन्वेस्टमेंट रुट्स में यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को सक्षम करेगा और ऐसी संस्थाओं के लिए बार-बार अनुपालन और दस्तावेजों की जरूरत को कम करेगा।

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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा पहचाने गए कम जोखिम वाले विदेशी निवेशकों में सरकारी स्वामित्व वाले फंड, केंद्रीय बैंक, सरकारी संपत्ति कोष, बहुपक्षीय संस्थाएं, उच्च विनियमित सार्वजनिक खुदरा फंड और उचित रूप से विनियमित बीमा कंपनियाों के साथ पेंशन कोष शामिल हैं।

एक दिसंबर की दो अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार, सेबी ने एफपीआई और विदेशी उद्यम पूंजी निवेशकों (एफवीसीआई) के लिए SWAGAT-FI फ्रेमवर्क पेश किया है। इसे प्रभावी बनाने के लिए, सेबी ने एफपीआई और एफवीसीआई नियमों में संशोधन किया है, जो एक जून, 2026 से लागू होंगे। सेबी निदेशक मंडल ने सितंबर में इस संबंध में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह संशोधन उस मंजूरी के बाद किया गया है।

नए फ्रेमवर्क के तहत, नियामक ने पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले/पहले से ही एफपीआई के रूप में पंजीकृत SWAGAT-FI को बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता के, एफवीसीआई के रूप में भी पंजीकरण करने का विकल्प दिया है। एफपीआई और एफवीसीआई दोनों नियमन के तहत पंजीकरण से SWAGAT-FI भारतीय कंपनियों के लिस्टेड इक्विटी इंस्ट्रूमेंट और डेट सिक्योरिटीज में एफपीआई के रूप में और निर्दिष्ट क्षेत्रों में कार्यरत गैर-सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप में संबंधित नियमों के तहत एफवीसीआई के रूप में निवेश करने में सक्षम होंगे।

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अनुपालन को आसान बनाने के लिए, नियामक ने पंजीकरण जारी रखने की अवधि को मौजूदा तीन या पांच साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया है। इसमें शुल्क का भुगतान और केवाईसी दस्तावेजों की समीक्षा शामिल है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफएससी) से संचालित एफपीआई के लिए कारोबार को सुगम बनाने के लिए, सेबी ने आईएफएससी में निवासी भारतीय प्रायोजक या प्रबंधक के साथ खुदरा योजनाओं को एफपीआई के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति दी है।

वर्तमान में, आईएफएससी में एक निवासी भारतीय प्रायोजक या प्रबंधक के साथ वैकल्पिक निवेश कोष को एफपीआई के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति है। सेबी के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून, 2025 तक भारत में 11,913 पंजीकृत एफपीआई थे, जिनके पास 80.83 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति थी। एक अनुमान के अनुसार, स्वागत-एफआई कुल एफपीआई की संपत्ति का 70 प्रतिशत से अधिक योगदान कर रहे हैं।

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First Published - December 3, 2025 | 9:08 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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