facebookmetapixel
Advertisement
अब पैकेट बंद खाने पर रहेगी चीनी, नमक और वसा के मात्रा की चेतावनी, SC ने FSSAI को लगाई कड़ी फटकारबारामती हादसे के बाद DGCA का बड़ा एक्शन: 14 चार्टर विमान कंपनियों का शुरू हुआ ‘स्पेशल सेफ्टी ऑडिट’लोक सभा में थमा एक हफ्ते का गतिरोध, अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष ने दिया नोटिसमहत्वपूर्ण खनिजों को लेकर नीति आयोग की केंद्र को बड़ी चेतावनी, कहा: पर्यावरण की कीमत पर न हो माइनिंगअमेरिकी बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की मचेगी धूम! 46 अरब डॉलर के मार्केट में मिलेगी ‘ड्यूटी-फ्री एंट्री’CBSE का बड़ा फैसला: अब कंप्यूटर पर जांची जाएंगी 12वीं की कॉपियां, OSM सिस्टम होगा लागूसियासी जंग का बमगोला बना तिरुपति का लड्डू, TDP और YSRCP में सियासी जंगब्रांड की दुनिया में स्मृति मंधाना का जलवा: पुरुषों के दबदबे वाले विज्ञापन बाजार में लिख रहीं नई इबादतभारत-अमेरिका ट्रेड डील में डिजिटल व्यापार नियमों पर बातचीत का वादा, शुल्क मुक्त ई-ट्रांसमिशन पर होगी बात!IPO, QIP और राइट्स इश्यू से जुटाई रकम पर सेबी की नजर, नियम होंगे सख्त

रिट्स उपयुक्त शार्ट टर्म दांव नहीं, इन्वेस्टमेंट पर सतर्कता जरूरी

Advertisement
Last Updated- February 19, 2023 | 7:36 PM IST
Stocks to watch

सूचीबद्ध रियल एस्टेट निवेश ट्रस्टों (REITs) के शेयर अपनी जनवरी की ऊंचाई से 9-12 प्रतिशत गिरकर इस महीने निचले स्तर पर आ गए हैं। बजट में ऋण अदायगी के लिए कर चिंताओं की वजह से धारणा नकारात्मक हुई है, वहीं नियु​क्तियों में सुस्ती और लीज प्रभाव के साथ साथ ऊंची ब्याज दरों से भी अल्पाव​धि में इस क्षेत्र की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।

इस क्षेत्र के लिए जिस वजह से अनि​श्चितता बढ़ रही है, वह है डेवलपमेंट ऑफ एंटरप्राइजेज ऐंड सर्विसेज हब (देश) बिल की मंजूरी में विलंब।

विशेष आ​र्थिक क्षेत्र (एसईजेड) नियंत्रित करने वाली नियामकीय सख्ती में ढील को देखते हुए देश विधेयक से ऑक्यूपेंसी लेवल यानी परिसंप​त्ति पर दखल स्तर में सुधार आने की उम्मीद थी।

अल्पाव​धि में, बाजार का ध्यान सूचीबद्ध कंपनियों के परिचालन मानकों और परिदृश्य पर बना रहेगा, क्योंकि कुछ कंपनियों ने लीज संबं​धित निर्णयकों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

आईसीआईसीआईसिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक अ​धिदेव चट्टोपाध्याय का मानना है कि बढ़ती ब्याज दरों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा नियु​क्तियों में सुस्ती के तौर पर वै​श्विक अनि​श्चितताओं की वजह से पट्टा संबं​धित बड़े ​निर्णयों में सुस्ती आई और कम से कम इनमें दो तिमाहियों (जनवरी से जून तक) के विलंब को बढ़ावा मिला।

भारतीय कार्यालय क्षेत्र की मांग में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का 67 प्रतिशत योगदान है। उनका मानना है कि हालांकि गैर-एसईजेड क्षेत्र के लिए छोटे और मझोले सौदों की मांग करीब 100,000 वर्ग फुट तक मजबूत बनी हुई है।

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही (वित्त वर्ष 2023 की तीसरी तिमाही) में ऑक्यूपेंसी स्तर कंपनियों के लिए ​​स्थिर रहा या इसमें मामूली सुधार आया। सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी एम्बेसी ऑफिस पार्क्स रीट ने तीसरी तिमाही में नए पट्टे एवं नवीकरण सौदे दर्ज किए, और उनके ऑक्यूपेंसी स्तर में सुधार आया।

ऐ​क्सिस कैपिटल के विश्लेषकों समर शारदा और आशुतोष मित्तल का मानना है कि रीट वित्त वर्ष 2023 के लिए 50 लाख वर्ग फुट का सकल ली​ज अनुमान का आंकड़ा पार करेंगी, भले ही उन्होंने अनुमान से अ​धिक पट्टे सौदे समाप्त किए हैं।

माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट (माइंडस्पेस) के लिए दिसंबर तिमाही मजबूत रही, क्योंकि कंपनी को मजबूत पट्टा गतिवि​धि और कम पट्टे समाप्त होने से मदद मिली। कंपनी ने जुलाई-सितंबर तिमाही के 86.9 प्रतिशत के मुकाबले ऑक्यूपेंसी स्तर बढ़ाकर 88.3 प्रतिशत करने पर ध्यान केंद्रित किया। हालांकि यह उत्साहजनक है, लेकिन महंगे कर्ज को देखते हुए ब्याज लागत बढ़ने का अनुमान है।

माइंडस्पेस ने संकेत दिया है कि 20 लाख वर्ग फुट की परियोजनाएं (एरोली और पुणे) वित्त वर्ष 2023 में पूरी हो जाएंगी और इससे वित्त वर्ष 2024 के दौरान 150 करोड़ रुपये की किराया आय जुड़ जाएगी। आईआईएफएल रिसर्च का कहना है कि हालांकि अगली कुछ तिमाहियों के दौरान ब्याज खर्च में 50-75 आधार अंक तक की वृद्धि होगी और कर्ज को घटाने के प्रयासों से काफी हद तक इसे नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

इसी तरह एम्बेसी के लिए पुनर्वित प्रक्रिया मौजूदा 6.6 प्रतिशत की औसत दर के मुकाबले ऊंची दर से जुड़ी रह सकती है। एम्बेसी के लिए 4,100 करोड़ रुपये के निर्धारित लागत वाले कर्ज की अव​धि वित्त वर्ष 2024 की दूसरी छमाही में पूरी हो रही है। पुनर्वित्त की वजह से कर्ज की लागत बढ़ने से कंपनी का वित्त वर्ष 2024 का अनुमानित शुद्ध वितरण योग्य नकदी प्रवाह 4 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकता है।

बजट में घो​षित बदलावों को लेकर ​स्थिति स्पष्ट नहीं होने से भी धारणा प्रभावित हुई है। रीट के ऋण के पुनर्भुगतान पर वित्त वर्ष 2024 से कर लगेगा।

आईआईएफएल रिसर्च का कहना है कि एम्बेसी और ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट के लिए 37-47 प्रतिशत वितरण यूनिटधारकों के हाथों में कर योग्य है जिससे उनका कर-बाद प्रतिफल 1 प्रतिशत अंक तक घट रहा है।

माइंडस्पेस यूनिटधारक प्रभावित नहीं हुए हैं, क्योंकि 90-93 प्रतिशत वितरण भुगतान के तौर पर 7-10 प्रतिशत ब्याज के तौर पर किया गया है।

सूचीबद्ध रीट्स के प्रबंधन का यह भी कहना है कि देश विधेयक से संबं​धित विलंब की वजह से एसईजेड में ​मौजूदा इकाइयों के आं​शिक उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है।

रीट की राह में कई अल्पाव​धि समस्याओं को देखते हुए निवेशकों को सूचीबद्ध शेयरों पर ध्यान देने से पहले नियामकीय चिंताओं पर स्पष्टता आने और नियु​क्ति परिदृश्य सुधरने का इंतजार करना चाहिए।

Advertisement
First Published - February 19, 2023 | 7:36 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement