भारत का बाजार पूंजीकरण 3 लाख करोड़ डॉलर के पार निकल गया है, ऐसे में हर तरह के शेयरों का भार बढ़ रहा है। मिडकैप शेयर की पात्रता के लिए ऊपरी सीमा (म्युचुअल फंडों के पुनर्वर्गीकरण की खातिर सेबी की परिभाषा के तहत) अब तक के सर्वोच्च स्तर 5.4 अरब डॉलर पर पहुंच गई है।
साल 2013 में हुई भारी बिकवाली के दौरान यह घटकर महज 1 अरब डॉलर रह गई थी। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की तरफ से हुए विश्लेषण से यह जानकारी मिली।
अनिवार्य तौर पर इसका मतलब यह है कि 101वीं सूचीबद्ध कंपनी का आकार आठ साल में पांच गुना बढ़ा है। इस अवधि में बेंचमार्क सेंसेक्स में 2.7 गुने की बढ़ोतरी हुई है। बाजार नियामक सेबी बाजार पूंजीकरण के लिहाज से 100 अग्रणी कंपनियोंं को लार्जकैप के तौर पर पारिभाषित करता है। अगले 150 शेयरोंं को मिडकैप माना जाता है और बाकी सूचीबद्ध शेयर स्मॉलकैप के तौर पर जाने जाते हैं। हर छह महीने में उद्योग निकाय एम्फी इस सूची की गणना करता है।
बाजार पूंजीकरण के लिहाज से 251वीं रैंकिंग वाली कंपनियों यानी स्मॉलकैप की ऊपरी सीमा अभी 1.6 अरब डॉलर है। हालांकि एक साल पहले के मुकाबले यह करीब-करीब दोगुना है, पर जनवरी 2018 के उच्चस्तर से अभी भी पीछे है। तब स्मॉलकैप शेयरों की पात्रता के लिए ऊपरी सीमा 1.78 अरब डॉलर थी।
कोविड-19 के दौरान पिछले साल निचले स्तर पर पहुंचा भारत का बाजार पूंजीकरण अब दोगुने से ज्यादा हो गया है। 23 मार्च को सभी सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण फिसलकर 1.5 लाख करोड़ डॉलर से नीचे चला गया था। सोमवार को भारत का बाजार पूंजीकरण 3.15 लाख करोड़ डॉलर रहा।
जुलाई में एम्फी भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों की रैकिंग की सूची जारी करेगा, जो जनवरी से जून 2021 के बीच उनके औसत बाजार पूंजीकरण पर आधारित होगा। एक फंड मैनेजर ने कहा, आपका औसत मिडकैप या स्मॉलकैप पहले के मुकाबले काफी बड़ा है। कल्पना कीजिए कि 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियोंं को स्मॉलकैप कहा जाएगा। अगर वास्तव में किसी को मिडकैप थीम में काम करना है तो उन्हें स्मॉलकैप फर्मों में मौके तलाशने होंगे और स्मॉलकैप की तलाश करने वालोंं को माइक्रोकैप पर नजर डालनी होगी।
अगर बाजार मौजूदा स्तर पर बना रहता है तो मिडकैप कंपनियों के लिए बाजार पूजीकरण का दायरा 12,000 करोड़ रुपये से लेकर 40,000 करोड़ रुपये के बीच होगा।