नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने बाजार नियामक सेबी से निर्देशों के बाद अपने को-लोकेशन परिचालन से 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व निर्धारित किया है। सेबी खामियों को लेकर एनएसई के को-लोकेशन परिचालन की जांच कर रहा है।
एनएसई द्वारा किए गए खुलासों से पता चलता है कि 30 जून 2020 तक 4,066.78 करोड़ रुपये की रकम (3,606.73 करोड़ रुपये 31 माच 2020 को) एक अलग बैंक खाते में स्थानांतरित की गई थी और फिर निदेशक मंडल की सहमति वाली निवेश नीति एवं प्रक्रियाओं के साथ इसे निवेश किया गया।
बाजार नियामक ने निर्देश दिया था कि जांच की लंबित प्रक्रिया, को-लोकेशन सुविधा से प्राप्त सभी राजस्व (सितंबर 2016 से) अलग बैंक खाते में स्थानांतरित किए जाएंगे। एनएसई ने यह भी कहा है कि उसके पास मौद्रिक देयता समेत उपर्युक्त ऑर्डरों (लंबित स्थगन कार्रवाई से शामिल) का विरोध करने के लिए जमीनी आधार मौजूद है। वित्तीय खुलासों में एक्सचेंज ने जून तिमाही में 922.65 करोड़ रुपये का समेकित कर-पूर्व लाभ (पीबीटी) दर्ज किया, जबकि पूर्ववर्ती वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 638.78 करोड़ रुपये था।
कंपनी का परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 32 प्रतिशत तक बढ़कर 1,073.55 करोड़ रुपये रहा। स्टॉक एक्सचेंज के लिए मुनाफे मेंटे्रडिंग सेवा खंड का बड़ा योगदान रहा है और इसने 708.53 करोड़ रुपये या विभिन्न व्यावसायिक खंडों का 96.2 प्रतिशत हासिल किया। सेवाओं में, सूचीबद्घता शुल्क सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत तक बढ़कर जून तिमाही में 23 करोड़ रुपये रहा। निवेश बैंकरों का कहना है कि इसमें सुस्ती के लिए कोविड-19 महामारी के बीच मुख्य निर्गमों या आईपीओ में मंदी को जिम्मेदार माना जा सकता है।
जून तिमाही में ट्रेजरी आय 48 प्रतिशत तक बढ़कर 163 करोड़ रुपये रही। एनएसई अपने आईपीओ पर भी काम कर रहा है और वह सेबी से अंतिम मंजूरी हासिल करने की प्रक्रिया में है।