फरवरी में पैंटालून के वैल्यू ट्रेडिंग और लाइफ स्टाइल के लिए सेम स्टोर सेल (एसएसएस) में साल-दर-साल के हिसाब से क्रमश: 4 और 5 फीसदी तक की तेजी आई।
हालांकि ये आंकड़े बहुत ज्यादा उत्साहित करने वाले तो नहीं कहे जा सकते हैं लेकिन कम से कम इस बात की तसल्ली तो जरूर देते हैं कि बिक्री में कमी नहीं आई है। शायद यही वजह रही जिससे कंपनी का शेयर पिछले चार सालों के सबसे निम्तम स्तर 107 रुपये से 15 फीसदी चढ़।
हालांकि इस समय शेयरों का कारोबार 123 रुपये के स्तर पर वित्त वर्ष 2008-09 (जून में समाप्त हुए साल) और 2009-10 की अनुमानित आय के क्रमश: 17 गुणा और 14 गुणा के स्तर पर हो रहा है।
चालू वित्त वर्ष में कंपनी के शुध्द मुनाफा में कमी आने में कीमत एक प्रमुख कारक रहा है जबकि अगले साल कम आधार पर स्थिति के सुधरने में इसकी प्रमुख भूमिका हो सकती है। खुदरा क्षेत्र से लगातार आ रहे निराश करने वाले समाचार के कारण खुदरा क्षेत्र के शेयरों में निवेशकों ने विश्वास नहीं जताया।
जो खबरे आ रहीं हैं उसके मुताबिक भारतीय रिटेल ने अपने दुकानों को पहले से बंद करना शुरू कर दिया है जबकि ऐसा समझा जा रहा है कि समूह के अध्यक्ष सुनील मित्तल ने साफ तौर पर कह दिया है कि ऐसे दुकानों को बंद करने में ही भलाई है जो अच्छा कारोबार नहीं कर रहे हैं।
विशाल रिटेल भी कारोबार की गिरती सेहत को देखकर अपने कुछ स्टोर को बंद कर रहा है। ऊंची ब्याज दर और डेप्रीसिएशन खर्चों के कारण दिसंबर 2008 की तिमाही के दौरान विशाल रिटेल के शुध्द मुनाफे में दिसंबर 2008 की तिमाही में 85 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि उक्त लगभग सभी रिटेल कारोबारियों के लिए खस्ता रही और इनके सेम स्टोर सेल में कमी देखने को मिली।
हालांकि पिछले कुछ महीनों में कारोबार जरूर बढियां रहा होगा लेकिन ब्रोकरेज कंपनी मैक्वारी का अनुमान है कि कमजोर अर्थव्यवस्था के चलते वैल्यू रिटेलिंग और लाइफ स्टाइल रिटेलिंग के एसएसएस में वित्त वर्ष 2009-10 में क्रमश: मात्र 8 फीसदी और 7 फीसदी तक की बढ़ोतरी ही देखने को मिल सकती है।
इससे नकदी की स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, साथ ही कर्ज के आसानी से उपलब्ध नहीं होने की वजह से कंपनियों को मजबूरन अपनी विस्तार योजनाओं को रोकना या कम करना पड़ सकता है। पेंटालून अगले कुछ वर्षों के दौरान अपनी विस्तार योजनाओं में कुछ कटौती कर सकती है।
इस समय कंपनी के ऊपर अनुमानित कर्ज 3,000 करोड रुपये का है और इसे देखते हुए विस्तार की योजना में कमी का इरादा सही है। इस साल कंपनी को इन कर्जों के ब्याज के रूप में 200 करोड़ रुपये का भुगतान करना है।