आय में कमजोरी से निवेशक की अवधारणा पर गहरा असर हो सकता है, जिससे शेयरों की दोबारा रेटिंग हो सकती है। यह कहना है ऐक्सिस म्युचुअल फंड के इक्विटी प्रमुख जिनेश गोपानी का। ऐश्ली कुटिन्हो को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, कोविड के कारण बंदी और अवरोध से दुनिया भर के महंगाई आंकड़ों में इजाफा हुआ है, जिससे केंद्रीय बैंकों को अपनी मौद्रिक नीति मेंं बदलाव करना पड़ा ताकि नकदी की भरमार की स्थिति सामान्य हो सके। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश…
ओमीक्रोन के हालात इस साल बाजारों को किस तरह प्रभावित करेंगे?
महामारी जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके नए और खतरनाक रूप वैश्विक आबादी को प्रभावित कर रहे हैं, उत्पादकता में अवरोध पैदा कर रहा है और इकनॉमिक आउटपुट पर असर डाल रहा है। भारत और अमेरिका के आंकड़े इस वैरिएंट के प्रसार की रफ्तार बता रहे हैं जबकि काफी ज्यादा टीकाकरण हो रहा है और बूस्टर डोज भी दिए जा रहे हैं। अन्य चिंताजनक पहलू यह है कि अब बच्च्चे भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। कोविड की चाल पर बाजार तब तक चलेगा जब तक कि चिकित्सीय हस्तक्षेप इस डर को पूरी तरह से समाप्त न कर दे। अभी तक आय के अनुमान मजबूत रिकवरी की बात कर रहे हैं जबकि ओमीक्रोन के अवरोध बने हुए हैं। आय में कमजोरी से निवेशकोंं की अवधारणा प्रभावित हो सकती है, लिहाजा शेयरों को दोबारा रेटिंग हो सकती है।
साल 2022 में किन वैश्विक संकेतोंं पर नजर रखी जानी चाहिए?
पूरी दुनिया ने पिछले दो दशक की बेहतर आसान मुद्रा नीति का लाभ उठाया है। इस अïवधि में वैश्विक केंद्रीय बैकरोंं ने दरें नीचे रखीं और मुद्रास्फीति संबंधी गतिरोध से दूर रहे। कोविड के कारण बंदी और अïरोध ने दुनिया भर के महंगाई के आंकड़ों में इजाफा हुआ। चूंकि बढ़त की रफ्तार लौट रही है, ऐसे में बैंकर अब मौद्रिक नीति में बदलाव कर रहे हैं ताकि अतिरिक्त नकदी की स्थिति को सामान्य बनाया जा सके। मौद्रिक नीति के इस विस्तार का सबसे ज्यादा लाभ शेयर बाजारों को हुआ है, ऐसे में नीतियों के सामान्य होने से बाजारोंं को झटका लग सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
साल 2022 उतारचढ़ाव का वर्ष होगा। ऐसे बाजारों में कमाई करना सामान्य तौर पर मुश्किल होता है और निवेशकों को सालों भर शेयरों की पहचान में गहन कोशिश करनी होगी। उपरोक्त जोखिमों के अतिरिक्त हमारा मानना है कि देसी कारक और शेयरों का चयन किसी पोर्टफोलियो के प्रदर्शन में और अहम भूमिका निभाएगा। भारत की कहानी लंबी अवधि के बाहरी कारकों से बची हुई है क्योंकि आर्थिक ढांचे में बदलाव व नीतिगत सुधार हुआ है।
मौजूदा मूल्यांकन पर आपकी क्या राय है?
तीसरी तिमाही के नतीजे त्योहारी सीजन की पूरी मांग और इससे जुड़े लाभ को समाहित करेंगे। विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियोंं की आय मामूली तौर पर अनुमान पर आम राय को मात दे सकती हैं या उस पर खरी उतर सकती है। इसका काफी हिस्सा हालांकि समाहित किया जा चुका है। आय अनुमान पूरा न होने पर शेयर कीमतों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा क्योंकि गिरावट के लिए बाजार छोटी से छोटी वजह तलाश रहा है। अब हम वित्त वर्ष 22 की चौथी तिमाही में हैं और बाजार के भागीदार 2022-23 के आंकड़ों पर नजर डाल रहे हैं। इस नजरिये से मूल्यांकन अब लंबी अवधि के औसत दायरे में दोबारा प्रवेश कर गया है। पीई में सिकुडऩ को हम अपने शोध में समाहित कर रहे हैं क्योंकि आय सामान्य हो गई है। हमारे ज्यादातर पोर्टफोलियो कंपनियों की आय पर स्पष्टता मजबूत दिख रही है और इस हिसाब से हमारा मानना है कि मूल्यांकन सहज हैं।
मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों पर आपका क्या नजरिया है?
बढ़त के सामान्य होने, नई कंपनियों के प्रवेश और कर्ज घटाने के बाद बैलेंस शीट में सुधार व दक्षता के मानकों में सुधार से मिड व स्मॉलकैप के लिए दो साल शानदार रहे हैं। इन फर्मों में से कई की नकदी की स्थिति में सुधार का भी इसमें योगदान रहा है। चूंकि भागीदारी में सुधार हो रहा है और मिडकैप व स्मॉलकैप का यूनिवर्स बढ़ रहा है, लिहाजा इस क्षेत्र ने निवेशकों के लिए काफी मौके खोल दिए हैं। मिडकैप व स्मॉलकैप पर मेरा नजरिया सकारात्मक बना हुआ है। लेकिन निवेश से पहले निवेशकों को जांच-परख कर लेनी चाहिए और निवेशित रहते हुए कंपनी की प्रगति पर भी नजर रखनी चाहिए।
नई पीढ़ी के मौजूदा आईपीओ पर आपका क्या कहना है?
बाजार में नई पीढ़ी की कंपनियों का आना क्रांतिकारी बदलाव है, जो भारत में नए तरीके से कारोबार का वादा करता है। हम अक्सर कहते हैं कि पूंजी बाजार भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत का बैरोमीटर है। आज इनमें से कई प्लेटफॉर्म व कंपनियां हमारे जीवन में अहम भूमिका निभा रही हैं और आर्थिक रूप से अहम क्षेत्र बन गई हैं। पूंजी बाजार में उनका प्रवेश पूंजी बाजार व सूचकांकों के संविधान में जारी आर्थिक बदलाव को प्रतिबिंबित करता है, जिसे हम लगातार ट्रैक करते हैं।