facebookmetapixel
Advertisement
मई में GST कलेक्शन 3.2% बढ़कर ₹1.94 लाख करोड़, घरेलू मांग में मजबूती का असरट्रंप पर बॉन्ड मार्केट का Inflation अलर्ट, बढ़ती ब्याज दरें मिड टर्म चुनाव से पहले बढ़ा रहीं मुश्किलेंITR Filing: AIS में छिपी गलती पड़ सकती है भारी! रिटर्न फाइल करने से पहले जरूर जांचें ये डिटेल्स55,000 करोड़ रुपये निकालकर चले गए विदेशी निवेशक, मई में बाजार में मची हलचल की पूरी कहानीGold silver price today: सोने के भाव लुढ़के, चांदी भी तेज शुरुआत के बाद फिसलीघुसपैठ से बदल रही आबादी? केंद्र ने बनाई हाई लेवल कमेटी, 2027 जनगणना से पहले बड़ा एक्शनविरोध के बीच सिजिमाली प्रोजेक्ट को हरी झंडी, अब खदान तक पहुंचेगी 3.4 किमी लंबी सड़कमहंगे तेल और कमजोर रुपये से बढ़ी चिंता, और चढ़ सकती है सरकारी बॉन्ड यील्ड1 जून से नया नियम लागू: अब विदेशी सेल नहीं, सिर्फ भारतीय सेल से बने सोलर मॉड्यूल ही मान्यRBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा! खर्च चलाने के लिए राज्यों की बाजार उधारी पर बढ़ी निर्भरता

उठापटक में भी शेयरों में नकदी झोंक रहे म्युचुअल फंड

Advertisement

म्युचुअल फंडों में नकदी का स्तर कम होकर 5 फीसदी

Last Updated- October 13, 2023 | 10:09 PM IST
Mutual Fund

तेल की ऊंची कीमतों और बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी के कारण अनिश्चतता होने के बाद भी फंड प्रबंधक शेयर बाजार में पूरी ताकत के साथ रकम झोंक रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सितंबर 2023 में इक्विटी फंड प्रबंधकों के पास उपलब्ध नकदी पिछले 16 महीनों के सबसे निचले स्तर 4.8 फीसदी पर रह गई थी। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेस की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले कई महीनों से फंड प्रबंधकों के पास नकदी करीब 5 फीसदी ही थी।

इससे पहले शेयर बाजार में निवेशकों का उत्साह कमजोर रहने से इक्विटी योजनाओं में नकदी काफी बढ़ गई थी। इसी साल फरवरी में नकदी 6 फीसदी हो गई थी मगर मार्च के अंत में तस्वीर बदल गई क्योंकि लगभग डेढ़ साल छोटे से दायरे मे कारोबार करने के बाद बाजार में तेजी आनी शुरू हो गई थी। वित्त वर्ष 2024 के पहले 6 महीनों में निफ्टी ने 13 फीसदी उछाल भरी। उस दौरान निफ्टी मिडकैप 100 में 35 फीसदी और निफ्टी स्मॉल कैप 100 में 42 फीसदी तेजी आई।

फंड प्रबंधकों का कहना कि कायदे में म्युचुअल फंड में निवेश किसी तरह भी कम नहीं करना चाहिए मगर अनिश्चितताओं से निपटने के लिए कुछ रकम बचाकर भी रखनी पड़ती है। टाटा म्युचुअल फंड में वरिष्ठ फंड प्रबंधक चंद्र प्रकाश पडियार कहते हैं, ‘हम बाजार में लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं इसलिए कुछ समय के लिए आने वाले उतार-चढ़ाव से फंड संभालने के हमारे तरीके पर बहुत असर नहीं पड़ता। लंबी अवधि के लिहाज से देखें तो संभावनाएं हमेशा रहती हैं।’

उन्होंने कहा कि टाटा म्युचुअल फंड में नकदी घटने का एक कारण यह भी हो सकता है कि कंपनी के स्मॉल कैप फंड में नए निवेश पर कुछ पाबंदी लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि एक समय वह भी था जब स्मॉल कैप फंड में नकदी काफी बढ़ गई थी मगर पाबंदियों के बाद इस रकम का छोटा हिस्सा ही निवेश किया जा सका है।
सितंबर के अंत में 20 फंड कंपनियों में 11 की इक्विटी योजनाओं में 4 फीसदी से भी कम नकदी थी। एसबीआई एमएफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ और एचडीएफसी एमएफ जैसी बड़ी फंड कंपनियों से पास 6 फीसदी से अधिक नकदी थी।

वित्त वर्ष 2024 के पहले 6 महीनों में म्युचुअल फंड ने शेयर बाजारों में 45,700 करोड़ रुपए लगाए। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने अप्रैल से जुलाई के दौरान हर सेक्टर में लगाई गई रकम के आंकड़े दिए हैं। उसके अनुसार सबसे अधिक निवेश वित्तीय सेवा क्षेत्र (23,000 करोड़ रुपये) में और उसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी (4,900 रुपये) और अन्य क्षेत्रों (2,000 करोड़ रुपये) में रकम लगाई गई।

फंड प्रबंधकों को आगे दवा, स्वास्थ्य वाहन एवं पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में निवेश की काफी संभावनाएं दिख रही हैं। यूटीआई ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी वेट्री सुब्रमण्यम कहते हैं, ‘हमारी नजर में दवा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में काफी संभावना है। इन क्षेत्रों में शेयरों की कीमत वाजिब है और कंपनियों के बहीखाते भी लगातार बेहतर हो रहे हैं। इनमें दीर्घकालीन वृद्धि की संभावनाएं भी खूब हैं। इनके अलावा बैंकिंग एवं वित्त क्षेत्र में भी निवेश के लिए काफी गुंजाइश मौजूद है।’

Advertisement
First Published - October 13, 2023 | 10:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement