Women’s Day 2026: भारतीय महिला निवेशक पारंपरिक “सेफ्टी-फर्स्ट” निवेश रणनीति से तेजी से दूर हो रही हैं। Equirus Wealth की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में उनका आवंटन लगभग 45 फीसदी से घटकर 20 फीसदी रह गया है, जबकि इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश बढ़कर करीब 10 फीसदी से 32 फीसदी तक पहुंच गया है।
करीब 55,000 महिला निवेशकों और 100 से ज्यादा रिलेशनशिप मैनेजरों से मिले पांच वर्षों के आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन में पाया गया कि अब 75–90 फीसदी महिला निवेशक बाजार में गिरावट के दौरान घबराकर निवेश निकालने के बजाय उसे बनाए रखती हैं, जबकि लगभग 55% महिलाएं बाजार में गिरावट आने पर चुनिंदा तौर पर अतिरिक्त निवेश भी करती हैं।
इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश बढ़कर करीब 10 फीसदी से 32 फीसदी तक पहुंच गया है। इसके अलावा पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIFs) जैसे वैकल्पिक निवेश विकल्पों में भी रुचि बढ़ रही है। इन कैटेगरी में निवेश का हिस्सा लगभग 3% से बढ़कर करीब 7% तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भले ही वैश्विक निवेश चर्चाओं में प्रमुख विषय बन गया हो, लेकिन भारतीय महिला निवेशक इसे सावधानी के साथ अपना रही हैं। वे इसका उपयोग मुख्य रूप से रिसर्च और सीखने के उपकरण के रूप में कर रही हैं, न कि स्वतंत्र निवेश निर्णय लेने के लिए।
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महिलाओं के निवेश व्यवहार में एक संरचनात्मक बदलाव आ रहा है- जहां पहले निवेश मुख्य रूप से अलग-अलग फाइनैंशियल प्रोडक्ट्स पर आधारित था। वहीं, अब महिलाएं अनुशासित और एसेट एलोकेशन आधारित पोर्टफोलियो ढांचे की ओर बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट से यह भी साफ होता है कि यह केवल धीरे-धीरे होने वाली प्रगति नहीं है, बल्कि इस बात में एक बुनियादी बदलाव है कि महिलाएं पूंजी के साथ किस तरह जुड़ रही हैं। इसमें पोर्टफोलियो निर्माण, जोखिम की समझ, मैक्रो-इकोनॉमिक जागरूकता, सलाहकारों के साथ संबंध और लेगेसी प्लानिंग जैसे कई पहलुओं में बदलाव देखने को मिल रहा है।
Equirus Wealth के एमडी और बिजनेस हेड अंकुर पुंज ने कहा, “भारतीय महिला निवेशक अपने वित्तीय भविष्य को आकार देने में पहले से अधिक जागरूक, आत्मविश्वासी और रणनीतिक हो रही हैं। पिछले पांच वर्षों में हमने स्पष्ट रूप से देखा है कि महिलाएं अलग-अलग वित्तीय उत्पाद खरीदने से आगे बढ़कर अब एसेट एलोकेशन और लंबी अवधि के लक्ष्यों पर आधारित संरचित पोर्टफोलियो बना रही हैं। टेक्नोलॉजी, जिसमें AI भी शामिल है, सीखने और रिसर्च की प्रक्रिया में भूमिका निभाने लगी है, लेकिन निवेश के फैसलों में अभी भी अनुशासित ढांचे और मानवीय समझ अहम बनी हुई है।”
पिछले पांच वर्षों में निवेश पोर्टफोलियो में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की हिस्सेदारी 45 फीसदी से घटकर 20 फीसदी रह गई है। वहीं इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़कर 10 फीसदी से 32 फीसदी हो गया है। इसके अलावा वैकल्पिक निवेश (PMS/AIF) की हिस्सेदारी भी लगभग 3 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी तक पहुंच गई है।
पांच साल पहले भारतीय महिला निवेशकों का प्रमुख रुझान पारंपरिक और सुरक्षित विकल्पों– जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट, सोना और प्रॉपर्टी– पर आधारित था, जिसे आम तौर पर ‘सेफ्टी-फर्स्ट’ पोर्टफोलियो कहा जाता है।
लेकिन अब वही निवेशक एसेट एलोकेशन और लक्ष्य आधारित पोर्टफोलियो की ओर बढ़ रही हैं। इन पोर्टफोलियो में इक्विटी म्युचुअल फंड, स्ट्रक्चर्ड डेट प्रोडक्ट्स, AIF, PMS और कुछ मामलों में ग्लोबल इक्विटी तथा प्राइवेट मार्केट जैसे विकल्प भी शामिल हो रहे हैं।
अध्ययन के अनुसार 35-50 फीसदी महिला निवेशक या तो AI टूल्स का उपयोग नहीं करतीं या फिर उनका सीमित इस्तेमाल करती हैं। वे इन्हें मुख्य रूप से सीखने, निवेश की निगरानी और रिसर्च से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए इस्तेमाल करती हैं। हालांकि अंतिम निवेश फैसले अब भी मानव निर्णय और सलाहकारों के मार्गदर्शन पर ही आधारित रहते हैं, न कि पूरी तरह स्वचालित सुझावों पर।
आज 75-90 फीसदी निवेशक बाजार में गिरावट के दौरान घबराकर निवेश निकालने के बजाय उसे बनाए रखती हैं या उसकी समीक्षा करती हैं। वहीं करीब 55 फीसदी महिलाएं बाजार में गिरावट के समय चुनिंदा रूप से अतिरिक्त निवेश भी करती हैं, जो उनके बढ़ते भरोसे और लंबी अवधि के निवेश दृष्टिकोण को दर्शाता है।
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रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण रुझान ‘बकेट थिंकिंग’ का बढ़ता इस्तेमाल बताया गया है।
अब निवेशक अलग-अलग वित्तीय उत्पाद खरीदने के बजाय अपने पोर्टफोलियो को अलग-अलग लक्ष्यों के आधार पर ‘बकेट्स’ में व्यवस्थित कर रही हैं, जैसे सुरक्षा (Safety), वृद्धि (Growth), तरलता (Liquidity) और विरासत या भविष्य की योजना (Legacy)।
यह दृष्टिकोण निवेश के तरीके में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। अब निवेशक यह पूछने के बजाय कि “कौन-सा प्रोडक्ट खरीदें?”, इस पर ध्यान दे रही हैं कि “यह एसेट मेरे पोर्टफोलियो में क्या भूमिका निभाएगा?”। यानी निवेश के फैसले अब अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव के बजाय एसेट एलोकेशन आधारित ढांचे के अनुसार लिए जा रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि पीढ़ी दर पीढ़ी संपत्ति हस्तांतरण (Intergenerational wealth transfer) अब एक अहम प्राथमिकता बनता जा रहा है। लगभग 75-90 फीसदी उत्तरदाता सक्रिय रूप से लेगेसी प्लानिंग पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि भविष्य में संपत्ति पाने वालों को सिर्फ पूंजी ही नहीं बल्कि वित्तीय अनुशासन भी विरासत में मिले।
खासकर हाई-नेट-वर्थ (HNI) और अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ (UHNI) महिला निवेशकों के बीच सक्सेशन प्लानिंग और फैमिली गवर्नेंस स्ट्रक्चर वेल्थ मैनेजमेंट स्ट्रैटेजीज का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।