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छोटे निवेशकों को ज्यादा नुकसान

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प्रमुख भारतीय सूचकांक निफ्टी-50 और सेंसेक्स में अपने पिछले ऊंचे स्तर से 14.3 फीसदी और 13.6 फीसदी तक की गिरावट आई।

Last Updated- March 13, 2025 | 10:02 PM IST
Share Market

बाजार में आई हाल की गिरावट की ज्यादा चोट रिटेल निवेशकों को पहुंची है। विदेशी निवेशकों और घरेलू संस्थानों जैसे अन्य निवेशकों के मुकाबले उनके पसंदीदा शेयरों में सबसे अधिक गिरावट आई है।

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार एनएसई 500 में (जिसमें लार्ज, मिड और स्मॉलकैप कंपनियां शामिल हैं) ऐसे शेयर जिनमें खुदरा शेयरधारकों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से अधिक है, वे अपने 52 सप्ताह के ऊंचे स्तर से 45 प्रतिशत गिर चुके हैं। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की 20 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी वाले शेयर 34 प्रतिशत तक गिरे हैं जबकि ऐसी हिस्सेदारी वाले वैश्विक फंडों में 29 फीसदी की गिरावट आई है।

इस दौरान प्रमुख भारतीय सूचकांक निफ्टी-50 और सेंसेक्स में अपने पिछले ऊंचे स्तर से 14.3 फीसदी और 13.6 फीसदी तक की गिरावट आई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक अपने ऊंचे स्तरों से करीब 20 फीसदी टूटने के बाद मंदी की जद के पास हैं।

रेलिगेयर ब्रोकिंग में वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्र के अनुसार रिटेल निवेशकों का भारी नुकसान काफी हद तक घबराहट में बिकवाली, मार्जिन कॉल और संस्थागत समर्थन के अभाव की वजह से हो सकता है। उनका मानना है, ‘इसके विपरीत मजबूत डीआईआई और विदेशी संस्थागत निवेशक स्वामित्व वाले शेयर बेहतर प्रदर्शन करते हैं क्योंकि संस्थागत निवेशक गिरावट के दौरान खरीदारी करते हैं।’

स्मॉलकैप में ज्यादा गिरावट आई है, इसे देखते हुए रिटेल निवेशकों ने भी जमकर खरीदारी करना बंद नहीं किया। अक्टूबर-दिसंबर 2024-25 तिमाही तक स्मॉलकैप कंपनियों में खुदरा निवेशकों के निवेश का मूल्य 10.3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा था जो प्रमोटर श्रेणी के बाद सबसे अधिक था।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और शोध प्रमुख चोकालिंगम जी के अनुसार ज्यादातर निवेशक तेजी के बाजार में शेयर की रफ्तार से प्रभावित होते हैं। यह रुझान वैश्विक स्तर पर विभिन्न बाजार चक्रों में देखा गया है जिससे उच्च-गुणवत्ता वाले और घटिया, दोनों तरह के शेयरों पर असर पड़ता है।

उनका मानना है कि ऐतिहासिक तौर पर बाजार की हरेक गिरावट के दौरान रिटेल निवेशकों को ज्यादा नुकसान पहुंचने की आशंका होती है। ऐसा इसलिए कि कई मामलों में मूल्यांकन बढ़ा हुआ होता है, लाभ और वृद्धि कमजोर होते हैं, व्यवसायों में स्थायित्व की कमी होती है और कंपनियों के अंदर संचालन संबंधी समस्याएं होती हैं। चोकालिंगम ने कहा कि जब बाजार में व्यापक सुधार होता है तो अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में आमतौर पर कमजोर गुणवत्ता वाले शेयरों की तुलना में कम गिरावट आती है।

स्मॉलकैप श्रेणी में (जिसमें 100 लार्जकैप शेयर और उसके बाद के 150 मिडकैप शेयर शामिल नहीं हैं) विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 21.36 प्रतिशत है जबकि घरेलू संस्थानों की हिस्सेदारी 24.95 प्रतिशत है। प्राइमइन्फोबेस डॉट कॉम के अनुसार छोटे निवेशकों की हिस्सेदारी लगभग 26.56 प्रतिशत है जो अभी तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

बाजार रणनीति

मौजूदा बाजार गिरावट के बारे में वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी रणनीति के निदेशक क्रांति बाथिनी का कहना है कि इन शेयरों में सुधार इस बात पर निर्भर करता है कि खुदरा निवेशकों के पास किस प्रकार के शेयर हैं।

उन्होंने कहा, ‘आखिरकार, शेयर की कीमतें आय पर निर्भर करती हैं।’ अगर आय के अनुमान सकारात्मक रहते हैं तो शेयर की कीमतों में उछाल की संभावना रहती है। हालांकि, अगर आय की संभावना साफ नहीं है तो खुदरा निवेशकों को अपनी स्थिति का सावधानी से आकलन करना चाहिए। कारोबारियों के लिए उन्होंने महत्त्वपूर्ण जोखिम प्रबंधन रणनीति के रूप में स्टॉप-लॉस के स्तर तय करने की जरूरत पर
जोर दिया।

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First Published - March 13, 2025 | 9:52 PM IST

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