Stock Market Today, December 8: भारतीय शेयर बाजार में सोमवारको तेज गिरावट देखी गई। बीएसई सेंसेक्स 803 अंक गिरकर 84,909 तक आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी50 26,000 के स्तर से नीचे गिरकर 25,902.95 पर पहुंच गया। इससे पहले दोनों सूचकांक दो दिन की तेजी के बाद गिरावट पर थे, जो आरबीआई के 25 बेसिस पॉइंट की रीपो रेट कट की उम्मीद से प्रेरित थी।
दोपहर 1:40 बजे सेंसेक्स 84,921.44 पर था, जो 790.93 अंक या 0.92% की गिरावट दर्शाता है। निफ्टी50 25,915.95 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर से 270.50 अंक या 1.03% नीचे था।
सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर लाल निशान में थे। इसमें बीईएल, एटरनल, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, बजाज फिनसर्व, अदानी पोर्ट्स, पावर ग्रिड, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, एसबीआई, एनटीपीसी और एशियन पेंट्स जैसे बड़े शेयर शामिल हैं, जिनमें गिरावट 5% तक रही।
बाजार के व्यापक हिस्से में भी कमजोरी देखी गई। एनएसई मिडकैप 100 इंडेक्स 2.1% गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2.775% नीचे आया। सभी सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में थे। निफ्टी रियल्टी सबसे ज्यादा प्रभावित रही, लगभग 4% नीचे, इसके बाद पीएसयू बैंक, मीडिया, मेटल, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑयल एंड गैस और केमिकल्स इंडेक्स भी कमजोर रहे।
Enrich Money के सीईओ Ponmudi R ने कहा कि वैश्विक बाजारों से मिली मिश्रित संकेत, रुपया कमजोर होना और एफआईआई की बिकवाली नजदीकी अवधि में निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह कम कर रही है। उन्होंने बताया, “आरबीआई की हाल की दर कट से मध्यम अवधि में वृद्धि के संकेत मिलते हैं, लेकिन वर्तमान में निवेशक और ट्रेडर नई दिशा में कदम उठाने से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।”
आज सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के पीछे ये हैं मुख्य कारण
आज, 8 दिसंबर को शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे कई कारण हैं।
1. अमेरिका के फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सतर्कता:
निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की दो दिन की बैठक से पहले सतर्क बने हुए हैं, जो 9 दिसंबर से शुरू हो रही है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज़ के हेड ऑफ प्राइम रिसर्च देवरश वकील ने बताया कि “निवेशक आगामी FOMC बैठक, अतिरिक्त मुद्रास्फीति डेटा और साल के अंत में पोर्टफोलियो समायोजन को देखते हुए सतर्क स्थिति में हैं।” इस सप्ताह ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा और स्विट्ज़रलैंड के केंद्रीय बैंक भी बैठक कर रहे हैं, लेकिन इनके द्वारा कोई नीति बदलाव की उम्मीद नहीं है।
2. रुपये का कमजोर होना:
भारतीय रुपये की कीमत सोमवार सुबह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.38 तक गिर गई। इसके पीछे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी फंड्स के बाहर जाने का असर है। LKP सिक्योरिटीज़ के वाइस प्रेसिडेंट जतीन त्रिवेदी ने कहा कि “भारतीय रिज़र्व बैंक की 25 बेसिस पॉइंट कट से वित्तीय क्षेत्र को कुछ स्थिरता मिल सकती है, लेकिन भारत-यूएस व्यापार सौदे में देरी और बढ़ती धातु व सोने की कीमतें बाजार पर दबाव बना रही हैं।”
3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Selling):
इस महीने विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं। शुक्रवार को सातवें लगातार सत्र में उन्होंने 438.90 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की।
4. कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि:
ब्रेंट क्रूड की कीमतें सोमवार को दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गईं और $63.83 प्रति बैरल रही। तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल और मुद्रास्फीति पर दबाव डालती हैं, जिससे निवेशक सतर्क रहते हैं। देवरश वकील ने कहा कि “निवेशक इस हफ्ते फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, जो आर्थिक विकास और ऊर्जा मांग को बढ़ाएगी, लेकिन रूस और वेनेजुएला से तेल आपूर्ति में भू-राजनीतिक खतरे भी ध्यान में रख रहे हैं।”
5. बढ़ती बाजार अस्थिरता:
Geojit Investments के चीफ निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा कि बाजार में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों खबरों की वजह से अस्थिरता बनी रह सकती है। उन्होंने कहा, “मजबूत आर्थिक विकास और आय में सुधार के संकेत बाजार के लिए सहायक हैं। लेकिन रुपये की लगातार गिरावट FIIs की बिकवाली को मजबूर कर रही है। जापानी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकती है।”
6. तकनीकी दृष्टिकोण:
विश्लेषक Ponmudi R के अनुसार, अगर Sensex 26,000 के नीचे टूटता है तो इससे शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट बुकिंग हो सकती है और इंडेक्स 25,900-25,850 तक गिर सकता है। विकल्प डेटा से यह स्पष्ट है कि बाजार आज रेंज-बाउंड रहेगा, क्योंकि 26,000 के आसपास पुट ऑप्शन और 26,200-26,300 के आसपास कॉल ऑप्शन लिखे गए हैं।