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Jane Street vs SEBI: SAT ने जेन स्ट्रीट की अपील स्वीकार की, अगली सुनवाई 18 नवंबर को

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Jane Street vs SEBI: सेबी ने अपने 3 जुलाई के आदेश में आरोप लगाया था कि जेन स्ट्रीट ने ‘टू-लेग्ड स्ट्रैटेजी’ अपनाकर निफ्टी बैंक इंडेक्स में हेरफेर किया।

Last Updated- September 09, 2025 | 1:20 PM IST
SEBI
Jane Street vs SEBI

Jane Street vs SEBI: अमेरिकी हाई-फ्रिक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) फर्म Jane Street और उसकी सहयोगी कंपनियों की अपील को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने मंगलवार को स्वीकार कर लिया है। यह अपील भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Sebi) के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें कंपनी पर निफ्टी बैंक इंडेक्स में हेरफेर का आरोप लगाया गया था।

SAT की तीन सदस्यीय पीठ ने सेबी को तीन हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद जेन स्ट्रीट को तीन हफ्तों के अंदर प्रत्युत्तर दाखिल करने का मौका मिलेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। पहले जेन स्ट्रीट की व्यक्तिगत सुनवाई 15 सितंबर को होनी थी, जिसे अब टाल दिया गया है।

सेबी और जेन स्ट्रीट की दलीलें

सुनवाई के दौरान सेबी की ओर से वरिष्ठ वकील गौरव जोशी ने कहा कि जेन स्ट्रीट ने अब तक 3 जुलाई के अंतरिम आदेश पर कोई जवाब नहीं दिया है, जबकि इसी आदेश के तहत उसकी ट्रेडिंग एक्सेस निलंबित की गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच अभी जारी है और कई जानकारियां साझा नहीं की जा सकतीं क्योंकि उनका आदेश में इस्तेमाल नहीं हुआ है।

दूसरी ओर, जेन स्ट्रीट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दारियस खंबाटा ने कहा कि इससे पहले एनएसई और सेबी की इंटरग्रेटेड सर्विलांस डिपार्टमेंट की जांच में किसी तरह की हेराफेरी सामने नहीं आई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एनएसई की 16 महीने की जांच और सेबी की 25 महीने की जांच एक-दूसरे से ओवरलैप कर रही हैं, तो निष्कर्ष अलग-अलग कैसे हो सकते हैं।

खंबाटा ने सेबी से उस शिकायत की जानकारी देने की भी मांग की, जो कथित तौर पर एक यूएई-आधारित हेज फंड मैनेजर ने की थी और जिसके बाद नई जांच शुरू की गई। इसके अलावा, उन्होंने ‘ट्रेड लॉग्स’ साझा करने की मांग की, जिनमें से कुछ को सेबी ने मास्क किया हुआ था। इस पर सेबी ने कहा कि केवल तीसरे पक्ष के नाम छिपाए गए थे क्योंकि वे आदेश से संबंधित नहीं हैं।

मामला क्या है?

सेबी ने अपने 3 जुलाई के आदेश में आरोप लगाया था कि जेन स्ट्रीट ने ‘टू-लेग्ड स्ट्रैटेजी’ अपनाकर निफ्टी बैंक इंडेक्स में हेरफेर किया। इसके तहत कंपनी ने बैंक निफ्टी शेयर और फ्यूचर्स की भारी खरीदारी की और बाद में शॉर्ट इंडेक्स ऑप्शंस रखते हुए पोजीशन अनवाइंड की।

सेबी ने जेन स्ट्रीट से ₹4,844 करोड़ लौटाने को कहा था, जो कथित तौर पर हेरफेर से कमाए गए थे। कंपनी ने यह राशि जमा कर दी, जिसके बाद ट्रेडिंग पर लगा बैन हटा लिया गया। हालांकि, जेन स्ट्रीट का कहना है कि उसकी ट्रेडिंग महज रूटीन इंडेक्स आर्बिट्राज स्ट्रैटेजी है, जो बाजार में प्राइस एफिशिएंसी लाने के लिए की जाती है।

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First Published - September 9, 2025 | 1:10 PM IST

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