facebookmetapixel
Advertisement
Child Debit Card: बच्चों के लिए डेबिट कार्ड की सुविधा क्या है? जानिए इन पांच बैंकों में माइनर अकाउंट का पूरा प्रोसेसटाटा संस में बड़ा बदलाव: एन. चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा, फरवरी तक रहेंगे चेयरमैनबाजार खुलते ही 10% टूटा गोदरेज ग्रुप का ये स्टॉक, ब्रोकरेज हैं बुलिश, 59% तक रिटर्न संभवचंद्रशेखरन के हटने की खबरों का टाटा समूह के शेयरों पर दिखेगा असर! क्या कहते हैं जानकारटाटा संस में बड़ा बदलाव संभव! AGM से पहले चेयरमैन पद छोड़ सकते हैं एन चंद्रशेखरनGold silver price today: निवेश मांग व केंद्रीय बैंकों की खरीद से सोना ₹1,182 तेज, चांदी ₹2,314 चढ़ीStock Market Update: सेंसेक्स 550 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24300 के नीचे; TCS, टाइटन, टाटा स्टील टॉप लूजरStocks to Watch: टाटा मोटर्स, IRCTC, BEML समेत इन स्टॉक्स पर रखें नजर; खबरों के दम पर दिखेगा एक्शनऑटो सेक्टर को PLI स्कीम के तहत FY27 में ₹4,700 करोड़ देगी सरकार, निवेश बढ़ाने की तैयारी तेजटाटा कैपिटल का रिवॉल्विंग क्रेडिट एक्सपोजर 5% से कम, RBI के नए प्रस्ताव से कंपनी पर पड़ेगा सीमित असर

Jane Street vs SEBI: SAT ने जेन स्ट्रीट की अपील स्वीकार की, अगली सुनवाई 18 नवंबर को

Advertisement

Jane Street vs SEBI: सेबी ने अपने 3 जुलाई के आदेश में आरोप लगाया था कि जेन स्ट्रीट ने ‘टू-लेग्ड स्ट्रैटेजी’ अपनाकर निफ्टी बैंक इंडेक्स में हेरफेर किया।

Last Updated- September 09, 2025 | 1:20 PM IST
SEBI
Jane Street vs SEBI

Jane Street vs SEBI: अमेरिकी हाई-फ्रिक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) फर्म Jane Street और उसकी सहयोगी कंपनियों की अपील को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने मंगलवार को स्वीकार कर लिया है। यह अपील भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Sebi) के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें कंपनी पर निफ्टी बैंक इंडेक्स में हेरफेर का आरोप लगाया गया था।

SAT की तीन सदस्यीय पीठ ने सेबी को तीन हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद जेन स्ट्रीट को तीन हफ्तों के अंदर प्रत्युत्तर दाखिल करने का मौका मिलेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। पहले जेन स्ट्रीट की व्यक्तिगत सुनवाई 15 सितंबर को होनी थी, जिसे अब टाल दिया गया है।

सेबी और जेन स्ट्रीट की दलीलें

सुनवाई के दौरान सेबी की ओर से वरिष्ठ वकील गौरव जोशी ने कहा कि जेन स्ट्रीट ने अब तक 3 जुलाई के अंतरिम आदेश पर कोई जवाब नहीं दिया है, जबकि इसी आदेश के तहत उसकी ट्रेडिंग एक्सेस निलंबित की गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच अभी जारी है और कई जानकारियां साझा नहीं की जा सकतीं क्योंकि उनका आदेश में इस्तेमाल नहीं हुआ है।

दूसरी ओर, जेन स्ट्रीट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दारियस खंबाटा ने कहा कि इससे पहले एनएसई और सेबी की इंटरग्रेटेड सर्विलांस डिपार्टमेंट की जांच में किसी तरह की हेराफेरी सामने नहीं आई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एनएसई की 16 महीने की जांच और सेबी की 25 महीने की जांच एक-दूसरे से ओवरलैप कर रही हैं, तो निष्कर्ष अलग-अलग कैसे हो सकते हैं।

खंबाटा ने सेबी से उस शिकायत की जानकारी देने की भी मांग की, जो कथित तौर पर एक यूएई-आधारित हेज फंड मैनेजर ने की थी और जिसके बाद नई जांच शुरू की गई। इसके अलावा, उन्होंने ‘ट्रेड लॉग्स’ साझा करने की मांग की, जिनमें से कुछ को सेबी ने मास्क किया हुआ था। इस पर सेबी ने कहा कि केवल तीसरे पक्ष के नाम छिपाए गए थे क्योंकि वे आदेश से संबंधित नहीं हैं।

मामला क्या है?

सेबी ने अपने 3 जुलाई के आदेश में आरोप लगाया था कि जेन स्ट्रीट ने ‘टू-लेग्ड स्ट्रैटेजी’ अपनाकर निफ्टी बैंक इंडेक्स में हेरफेर किया। इसके तहत कंपनी ने बैंक निफ्टी शेयर और फ्यूचर्स की भारी खरीदारी की और बाद में शॉर्ट इंडेक्स ऑप्शंस रखते हुए पोजीशन अनवाइंड की।

सेबी ने जेन स्ट्रीट से ₹4,844 करोड़ लौटाने को कहा था, जो कथित तौर पर हेरफेर से कमाए गए थे। कंपनी ने यह राशि जमा कर दी, जिसके बाद ट्रेडिंग पर लगा बैन हटा लिया गया। हालांकि, जेन स्ट्रीट का कहना है कि उसकी ट्रेडिंग महज रूटीन इंडेक्स आर्बिट्राज स्ट्रैटेजी है, जो बाजार में प्राइस एफिशिएंसी लाने के लिए की जाती है।

Advertisement
First Published - September 9, 2025 | 1:10 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement