facebookmetapixel
Advertisement
‘हेडलाइन्स’ से कहीं आप भी तो नहीं हो रहे गुमराह? SIP पर जारी रखें ये स्ट्रैटेजीAM/NS India में बड़ा बदलाव: दिलीप ओम्मन होंगे रिटायर, अमित हरलका बनेंगे नए सीईओभारत में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं, 60 दिन का स्टॉक मौजूद: सरकारभारत की तेल जरूरतें क्यों पूरी नहीं कर पा रहा ईरानी क्रूड ऑयल? चीन की ओर मुड़े जहाजलाइन लगाने की जरूरत नहीं, घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर: सीएम योगी आदित्यनाथऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावना

2026 में हेल्थकेयर सेक्टर में आएगी जबरदस्त तेजी! ब्रोकरेज ने बताए 5 बड़े ट्रेंड

Advertisement

इक्विरस की रिपोर्ट में खुलासा - हेल्थकेयर, फार्मा और मेडटेक सेक्टर आने वाले सालों में शेयर बाजार में जबरदस्त बढ़त और भारी निवेश आकर्षित करेंगे।

Last Updated- November 27, 2025 | 3:12 PM IST
Healthcare

भारत के शेयर बाजार में पिछले कुछ सालों से हेल्थकेयर सेक्टर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इक्विरस कैपिटल की एक नई रिपोर्ट कहती है कि एनएसई हेल्थकेयर इंडेक्स ने पिछले 1 साल, 3 साल और 5 साल में निफ्टी 50 से ज्यादा फायदा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर से जुड़े तीनों बड़े सेक्टर – मेडटेक, हॉस्पिटल और फार्मा ने अच्छा काम किया है और इसी वजह से निवेशक इन सेक्टरों में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं।

हेल्थकेयर इंडेक्स की लगातार बेहतर बढ़त

रिपोर्ट में कहा गया है कि हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियों ने बाकी बाजार से ज्यादा अच्छा काम किया है। पिछले तीन साल में जहां निफ्टी 50 ने 48% का फायदा दिया, वहीं फार्मा सेक्टर ने 73%, और हॉस्पिटल कंपनियों ने 183% का बड़ा फायदा दिया। मेडटेक सेक्टर सबसे आगे रहा और उसने 221% का फायदा दिया, जो दिखाता है कि यह सेक्टर बहुत मजबूत है। पिछले एक साल में भी यही स्थिति रही- मेडटेक और हॉस्पिटल कंपनियों ने निफ्टी 50 से कई गुना ज्यादा रिटर्न दिया।

फंडरेजिंग में कोविड काल का रिकॉर्ड टूटा

रिपोर्ट के मुताबिक लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर सेक्टर में कंपनियां पहले से ज्यादा पैसा जुटा रही हैं। कोविड-19 के समय FY22 में जहां 62,432 करोड़ रुपये जुटे थे, वहीं FY26 में यह बढ़कर 72,440 करोड़ रुपये हो गया है। इक्विरस कैपिटल के डायरेक्टर सिद्धार्थ अय्यर ने कहा कि इस साल सेक्टर के हर हिस्से में कामकाज बढ़ा है और डील का साइज भी पहले से बहुत बड़ा हो गया है। फ़ार्मा सेक्टर में एक डील का औसत आकार 700 करोड़ से बढ़कर 2,100 करोड़ रुपये हो गया, और हॉस्पिटल सेक्टर में यह 300 करोड़ से बढ़कर 850 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

एमएंडए ट्रांजैक्शन का आकार चार गुना बढ़ा

रिपोर्ट के अनुसार हेल्थकेयर सेक्टर में कंपनियों के बीच होने वाले सौदे (M&A) बहुत बड़े हो गए हैं। पहले की तुलना में अब एक सौदे की औसत कीमत चार गुना बढ़कर 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसके अलावा FY26 में शेयर बाजार के जरिए जो कुल 51,000 करोड़ रुपये जुटाए गए, उसमें से 63% यानी 32,000 करोड़ रुपये सिर्फ फार्मा सेक्टर से आए। यह दिखाता है कि इस समय फ़ार्मा सेक्टर की पकड़ सबसे मजबूत है।

2026 में बदलने वाले पांच बड़े ट्रेंड

रिपोर्ट में इक्विरस ने साल 2026 के लिए पांच बड़े ट्रेंड बताए हैं। पहला ट्रेंड यह है कि प्राइवेट इक्विटी फंड पूरे देश में फैली हुई हेल्थकेयर सेवाओं को एक जगह जोड़ने की कोशिश और तेज करेंगे, ताकि इलाज की सुविधाएं अच्छे तरीके से लोगों तक पहुंच सकें। दूसरा ट्रेंड यह है कि डायग्नोस्टिक कंपनियां छोटे शहरों और कस्बों में अपना नेटवर्क बढ़ाने के लिए स्थानीय छोटी कंपनियों को खरीदेंगी। तीसरा ट्रेंड यह है कि निवेशकों की दिलचस्पी सिंगल-स्पेशियलिटी अस्पतालों और मेडटेक कंपनियों में बढ़ेगी, क्योंकि इनका भविष्य मजबूत माना जा रहा है। चौथा ट्रेंड यह दिखाता है कि मेडटेक कंपनियों के प्रोडक्ट कम हैं लेकिन मांग ज्यादा है, इसलिए उनकी कीमतें और वैल्यूएशन बढ़ते रहेंगे। पांचवां ट्रेंड यह है कि अस्पताल अब कम खर्च वाले मॉडल पर काम करना शुरू करेंगे, जिससे वे बिना ज्यादा पैसा लगाए अपनी नई शाखाएं खोल सकेंगे।

Also Read | सेंसेक्स–निफ्टी नई ऊंचाई पर: जानें अब कहां लगाएं पैसा और कौन से सेक्टर देंगे तेज रिटर्न

पब्लिक मार्केट का प्रीमियम बढ़ा रहा है आईपीओ का उत्साह

रिपोर्ट के मुताबिक पब्लिक मार्केट में फार्मा, CDMO, हॉस्पिटल और डायग्नोस्टिक कंपनियों को उनकी कमाई के मुकाबले काफी ज्यादा कीमत (प्रीमियम) मिल रही है। इसी कारण अब कई कंपनियां IPO, QIP और अन्य तरीकों से बाजार से पैसा जुटाने के लिए उत्साहित हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि पब्लिक और प्राइवेट मार्केट में वैल्यूएशन का बड़ा फर्क है, और यही अंतर कंपनियों को IPO लाने के लिए और ज्यादा प्रेरित कर रहा है।

आगे का निवेश आउटलुक

इक्विरस का मानना है कि आने वाले तीन सालों में हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी (PE) और M&A सौदों के जरिए 5.3 अरब डॉलर से ज़्यादा का निवेश आएगा। इसके अलावा, प्राइवेट इक्विटी कंपनियों के बाहर निकलने (एग्ज़िट) और नई पूंजी जुटाने की योजनाओं की वजह से इक्विटी कैपिटल मार्केट्स में लगभग 8 अरब डॉलर की गतिविधि होने की संभावना है। ब्रोकरेज यह भी कहती है कि सिर्फ हेल्थकेयर और मेडटेक सेक्टर में ही 4.5 अरब डॉलर तक का प्राइवेट इक्विटी निवेश आ सकता है, क्योंकि इन क्षेत्रों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है।

Advertisement
First Published - November 27, 2025 | 3:12 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement