facebookmetapixel
पान मसाला कंपनियों पर सख्ती: 1 फरवरी से रजिस्ट्रेशन, मशीन पर अलग टैक्स व फैक्ट्री में CCTV जरूरीघर में कितना सोना रखना लीगल? जानिए नियमनिर्यातकों को बड़ी राहत: MSME एक्सपोर्टर्स को सस्ता लोन और गारंटी सपोर्ट के लिए ₹7,295 करोड़ का पैकेजSIP Investment: ₹2,000 की मंथली एसआईपी से कितना पैसा बनेगा? 5 से 20 साल की पूरी कैलकुलेशन देखेंNCERT को मिलेगा ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा, इसी महीने आ सकता है बड़ा फैसलाShare Market: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, निफ्टी रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा; सेंसेक्स 573 अंक चढ़ाUpcoming NFO: नया साल, नया जोश; जनवरी में 12 नए फंड होंगे लॉन्च, ₹100 से निवेश शुरूसरकार एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर GST 5% करने की तैयारी में, GST काउंसिल जल्द ले सकती है फैसलास्मोकिंग करने वाले दें ध्यान! 1 फरवरी से महंगी होगी सिगरेट, जानें अब कितना ज्यादा पैसा देना होगामुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की तारीख तय! रूट, स्पीड जान लीजिए

बाजार को फिर सरकारी इंजेक्शन

Last Updated- December 08, 2022 | 12:03 AM IST

सीआरआर में कटौती करके 60 हजार करोड़ रुपये की तगड़ी खुराक देने के बाद आरबीआई ने मंदी की मार झेल रहे बाजार को एक बार फिर 20 हजार करोड़ रुपये का एक और इंजेक्शन लगा दिया।


इसके तहत, सरकार का इरादा अल्पकालिक ऋण के जरिए म्युचुअल फंडों में नकदी की जरूरत पूरी करने और उनका भुगतान दबाव को कम करने का है। म्युचुअल फंड उद्योग ने नकदी की सुविधा मांगी थी इसलिए सरकार ने सेबी और आरबीआई से बैठक करने और इस मसले को सुलझाने के लिए कहा था।

केंद्रीय बैंक ने बताया कि यह कर्ज 14 दिन का विशेष रेपो (अल्पकालिक ऋण) नौ फीसदी सालाना की दर से लागू होगा। आर्थिक मंदी के कारण ज्यादातर म्युचुअल फंड को नकदी फंडो में भुगतान के दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

जमाकर्ताओं की ओर से निकासी की मांग बढ़ने के कारण नकदी फंडों का कुल परिसंपत्ति मूल्य नकारात्मक होता जा रहा है। बहरहाल, इस फैसले के बाद अब बैंकों का सर्वोच्च संगठन और म्युचुअल फंड आपसी परामर्श के बाद संयुक्त रूप से उचित दर तय करेंगे, जिस पर बैंक म्युचुअल फंड कंपनियों को ऋण देंगे।

म्युचुअल फंडों को जमा प्रमाणपत्र को गारंटी के तौर पर बैंकों के पास जमा करना होगा। म्युचुअल फंड उद्योग बैंकों से ली गई उधारी के लिए जमा प्रमाणपत्र को ही गारंटी के तौर पर मुहैया कराएंगे।

बकौल वित्त मंत्री

म्युचुअल फंडों को पेश आ रही नकदी की दिक्कतों को देखते हुए ही 20 हजार करोड़ का यह कर्ज मुहैया कराया गया है।

ऐसा लगता है कि विभिन्न सरकारों और केंद्रीय बैंकों ने जिन कदमों की घोषणा की है, उनसे न सिर्फ बाजारों में ज्यादा नकदी आई है बल्कि काफी हद तक भरोसा भी कायम करने में मदद मिली है।

मुझे पूरी उम्मीद है कि अब भारतीय पूंजी बाजार में भी वैसा ही आशापूर्ण रुख दिखेगा, जैसा कि अमेरिकी, यूरोपीय और पूर्वी एशियाई बाजारों में दिखा है।

First Published - October 15, 2008 | 12:43 AM IST

संबंधित पोस्ट