भारतीय इक्विटी में चीन से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश 31 मार्च, 2020 के आखिर में 3,257 करोड़ रुपये था। यह इससे पिछली तिमाही में निवेशित 774 करोड़ रुपये के मुकाबले चार गुना है। यह जानकारी प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से मिली। इसमें कुल शेयर पूंजी में एक फीसदी से ज्यादा शेयरधारिता की खरीद में हुआ निवेश शामिल है। सबसे ज्यादा निवेश एचडीएफसी की हिस्सेदारी में पीपल्स बैंक ऑफ चाइना की तरफ से हुआ है, जहां कुल निवेश 2,857 करोड़ रुपये का है।
अनुमान के मुताबिक, एक फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी में एफपीआई निवेश उनके कुल पोर्टफोलियो का करीब 25 फीसदी है। ऐसे में चीन से वास्तविक निवेश मोटे तौर पर 12,000-13,000 करोड़ रुपये हो सकता है। कुल निवेश में बढ़ोतरी के बावजूद उसका कुल निवेश अभी भी काफी कम है। 10वां सबसे बड़ा एफपीआई नीदरलैंड का निवेश मार्च के आखिर में 42,149 करोड़ रुपये था और यह जानकारी एनएसडीएल के आंकड़ोंं से मिली। यह चीन के निवेश के मुकाबले तीन गुने से ज्यादा है। 5वां सबसे बड़ा एफपीआई ब्रिटेन का निवेश मार्च के आखिर तक 1.17 लाख करोड़ रुपये रहा, जो चीन के मुकाबले करीब नौ गुना है।