Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2026 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे पेश करेंगी। रविवार होने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार खुले रहेंगे। पिछले रिकॉर्ड देखें तो बजट पेश होने के बाद बाजार की धारणा पर गहरा असर पड़ता है। यह न केवल दिन के कारोबार बल्कि सेक्टोरल लिहाज से मीडियम टर्म के रुख को भी प्रभावित करता है।
केंद्रीय बजट हमेशा से भारतीय शेयर बाजार के लिए एक अहम इवेंट रहा है। अक्सर बजट ही शॉर्ट टर्म में बाजार की दिशा तय करता है। नीतियों के संकेत अलग-अलग सेक्टरों की चाल को भी प्रभावित करते हैं। वित्त वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट में डिफेन्स, कैपेक्स और समग्र आर्थिक स्थिरता पर खास फोकस रहने की उम्मीद है।
इस बीच, मार्केट एक्सपर्ट्स और निवेशकों की नजरें तीन अहम बिंदुओं पर टिकी हैं। आज अगर वित्त मंत्री इन तीन मोर्चों पर राहत देती हैं, तो बाजार में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
यह भी पढ़ें | Union Budget 2026 LIVE
निवेशक कैपिटल गेन टैक्स में राहत की मांग कर रहे हैं। ये मुद्दा हमेशा से बड़ी चिंता का विषय बना रहता है। सरकार ने 2024 में शॉर्ट टर्म (STCG) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स की दरों को बढ़ाया था। सरकार के इस फैसले से बाजार में गिरावट आई थी। ऐसे में अगर सरकार अगर इन दोनों फैसलों पर निवेशकों को कुछ राहत देती है तो बाजार में इसका पॉजिटिव रिएक्शन देखने को मिल सकता है।
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि कुल सरकारी खर्च की वृद्धि दर सालाना आधार पर करीब 7 प्रतिशत रह सकती है। इसमें कैपेक्स 12.4 लाख करोड़ रुपये (सालाना आधार पर 10.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी) रहने का अनुमान है। जबकि राजस्व खर्च में करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।
मोदी सरकार का सत्ता में आने के बाद से इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस रहा है। मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि FY27 में जीडीपी के मुकाबले कैपेक्स 3.1 प्रतिशत रखा जाएगा। इसका मतलब है कि कुल कैपेक्स बजट करीब 12.4 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। इसका सीधा फायदा रेलवे, सड़क, डिफेंस और शहरी विकास से जुड़ी कंपनियों को मिलेगा। निवेशकों की नजर L&T, टाटा प्रोजेक्ट्स और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर रहेगी।
निवेशकों की तरफ से सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को रेशनल बनाने की मांग की जा रही है। ट्रेडिंग लागत के चलते भारतीय शेयर बाजार को ग्लोबल बाजारों की तुलना में महंगा माना जाता है।
ज़ेरोधा के सीईओ और फाउंडर नीतिन कामत भी इस मुद्दे पर अपनी राय रख चुके हैं। उन्होंने दो दिन पहले एक्स पर कहा, ”एक मार्केट पार्टिसिपेंट के तौर पर, मुझे हमेशा उम्मीद रहती है कि बजट में STT कम होगा, लेकिन यह बढ़ता ही जा रहा है। STT तब शुरू किया गया था जब LTCG को 0 कर दिया गया था, लेकिन अब जब LTCG वापस आ गया है।”
कामत ने कहा, ”बजट 2024 में F&O पर STT में 60% की बढ़ोतरी की गई थी। फ्यूचर्स पर STT 0.0125% से बढ़ाकर 0.02% और ऑप्शंस पर 0.0625% से बढ़ाकर 0.1% कर दिया गया। शुरुआत में इसका वॉल्यूम पर खास असर नहीं दिखा और बुल मार्केट के चलते बाजार में भागीदारी बढ़ती रही। लेकिन बाजार हमेशा बुल रन में नहीं रहते, और इसका असर पिछले एक साल में साफ नजर आया।”
उन्होंने कहा, ”FY 2025-26 के लिए STT कलेक्शन का अनुमान ₹78,000 करोड़ लगाया गया था। अब तक (11 जनवरी तक) करीब ₹45,000 करोड़ की वसूली हुई है। अगर 31 मार्च तक और ₹12,000 करोड़ जोड़कर भी मान लें, तो कुल कलेक्शन ₹57,000 करोड़ के आसपास ही पहुंचेगा, जो अनुमान से करीब 25% कम है। मेरा मानना है कि अगर 2024 में STT नहीं बढ़ाया गया होता, तो सरकार का कुल कलेक्शन इससे कहीं ज्यादा हो सकता था।”