दक्षिणी राज्यों के लिए सीतारमण ने नारियल संवर्धन योजना का ऐलान किया, जो उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर फोकस करेगी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल के बजट में भारतीय खेती के साथ जुड़े क्षेत्रों को मजबूत बनाने पर बड़ा जोर दिया। खास तौर पर दक्षिण भारत में उगने वाली प्लांटेशन फसलों जैसे नारियल, कोको, काजू और चंदन को बढ़ावा देने की बात की गई। साथ ही, मत्स्य पालन को भी नई ऊंचाई देने की योजनाएं पेश की गईं। ये कदम किसानों की कमाई बढ़ाने, नई नौकरियां पैदा करने और खेती को विविध बनाने के लिए हैं। सीतारमण ने कहा कि तटीय इलाकों में इन उच्च मूल्य वाली फसलों को सपोर्ट किया जाएगा, जबकि पूर्वोत्तर में अगर के पेड़ और पहाड़ी इलाकों में बादाम, अखरोट व पाइन नट्स जैसी चीजों को बढ़ावा मिलेगा। इससे किसानों की आय में इजाफा होगा और उत्पादन भी बढ़ेगा।
नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद के ताजा विश्लेषण से पता चलता है कि 2014-15 से 2023-24 के बीच उच्च मूल्य वाली कृषि चीजों की ग्रोथ पहले के दशक (2004-05 से 2013-14) की तुलना में कहीं ज्यादा रही। जबकि अनाज, तिलहन और सामान्य सब्जियां जैसी कम मूल्य वाली चीजों की रफ्तार धीमी पड़ी। इस बदलाव की वजह लोगों की बदलती खान-पान की आदतें हैं, जो बढ़ती कमाई के साथ जुड़ी हुई हैं। आंकड़ों से साफ है कि फलों, मसालों और चटपटी चीजों का उत्पादन मूल्य (वीओपी) सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा। ये 2013-14 और 2023-24 के तीन सालों के औसत पर आधारित हैं। वहीं, अनाजों में -1.84 प्रतिशत और कपास-जूट में -1.44 प्रतिशत की निगेटिव ग्रोथ दर्ज हुई।
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दक्षिणी राज्यों के लिए सीतारमण ने नारियल संवर्धन योजना का ऐलान किया, जो उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर फोकस करेगी। इससे करीब 30 मिलियन लोगों को फायदा होगा, जिसमें 10 मिलियन नारियल किसान शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय काजू और कोको को 2030 तक दुनिया के प्रीमियम ब्रांड बनाने की योजना है। कच्चे काजू और कोको में आत्मनिर्भरता लाने, प्रोसेसिंग को मजबूत करने और निर्यात बढ़ाने पर जोर रहेगा। चंदन की पुरानी शान बहाल करने के लिए राज्य सरकारों से हाथ मिलाया जाएगा।
मत्स्य पालन को मजबूत करने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास होगा। तटीय इलाकों में मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा, जिसमें स्टार्टअप्स, महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रुप्स और मछुआरा उत्पादक संगठनों को बाजार से जोड़ा जाएगा। इससे नई कमाई के रास्ते खुलेंगे।
पशुपालन क्षेत्र में भी कई नई स्कीमें आईं। क्रेडिट से जुड़ी सब्सिडी प्रोग्राम शुरू होगा, जो पशुपालन उद्यमों को बड़ा और आधुनिक बनाने में मदद करेगा। पशुधन, डेयरी और पोल्ट्री पर केंद्रित एकीकृत मूल्य श्रृंखलाएं बनेंगी। साथ ही, पशुपालन किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा मिलेगा, जो गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा करेंगे।
पुराने बागानों को फिर से जीवंत करने और उच्च घनत्व वाली खेती फैलाने के लिए एक अलग प्रोग्राम आएगा, जो अखरोट, बादाम और पाइन नट्स पर फोकस करेगा। इससे किसानों की कमाई बढ़ेगी और युवाओं को वैल्यू एडिशन के काम में लगाया जाएगा। कुल मिलाकर, ये योजनाएं ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को भी सपोर्ट करेंगी, साथ ही पशु चिकित्सकों और किसानों को नई दिशा देंगी।