रियल एस्टेट के लिए आम बजट में सीधे सीधे फायदे के उपाय तो कम किए गए हैं। लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे रियल एस्टेट को लंबी अवधि में लाभ हो सकता है। इनमें टियर 2 और 3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर खास ध्यान, पूंजी व्यय (public capex) बढ़ना, सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSE) एसेट्स को रीसायकल करने के लिए डेडिकेटेड REITs का प्रस्ताव, 2047 तक डेटा सेंटर के लिए टैक्स हॉलिडे, नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर आदि शामिल हैं।
आम बजट में टियर-2 व टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर जोर दिया गया है। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को लाभ होगा। एनारॉक समूह के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि यह बजट निवेश के हिसाब से अच्छा है। लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर के लिए तुरंत रामबाण जैसा कुछ नहीं है। इसमें सीधे तौर पर फायदे के लिए खास प्रावधान नहीं हैं लेकिन लंबी अवधि में फायदे और निवेश के लिए कई प्रावधान हैं। टियर-2 व टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर जोर से रियल एस्टेट उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
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रियल एस्टेट उद्योग के प्रमुख संगठन नारेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि पूंजीगत व्यय को 11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का फैसला, जिसमें 5 लाख से ज़्यादा आबादी वाले शहरों पर विशेष तौर पर फोकस किया गया है, एक दूरदर्शी कदम है। इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों रियल एस्टेट के लिए बूस्टर बनेंगे और यह मेट्रो शहरों से परे संतुलित शहरीकरण को तेज करेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड डेवलपमेंट और कंस्ट्रक्शन चरणों के दौरान प्रोजेक्ट्स के जोखिम को कम करने में मदद करेगा। लोहिया वर्ल्डस्पेस के निदेशक पीयूष लोहिया ने कहा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) की भूमि के लिए अलग-अलग REITs स्थापित करने का प्रस्ताव सराहनीय कदम है। इससे कम उपयोग हो रही परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग संभव होगा और कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता व तरलता बढ़ेगी।
सात हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर की घोषणा इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास को और मजबूत करेगी। जैन ने कहा इससे मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलूरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलूरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी जैसे कॉरिडोर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाएंगे और यह नए रियल एस्टेट व औद्योगिक क्लस्टर को बढ़ावा देंगे। कॉलियर्स इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर बादल याग्निक ने कहा कि बजट में भारतीय रियल एस्टेट को खास तौर पर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, हाई स्पीड रेल कॉरिडोर, इनलैंड वॉटरवे का नेशनलाइजेशन, शहरी क्लस्टर का डेवलपमेंट वगैरह के रूप में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर खास जोर देने से फायदा होगा।
सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लिमिटेड के फाउंडर और चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने आम बजट 2026-27 में इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड बनाने के साथ-साथ अगले पांच सालों में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर शुरू करने और 20 नए नेशनल वॉटरवे शुरू करने से कनेक्टिविटी काफी बढ़ेगी। जिससे लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी और रियल एस्टेट की क्षमता में सुधार होगा। सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए पांच साल तक हर साल 5,000 करोड़ रुपये के प्रावधान भी रियल एस्टेट के लिए अच्छा है।
बजट में विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए प्रस्तावित टैक्स हॉलिडे से ग्लोबल हाइपर स्केलर्स को आकर्षित करके डेटा सेंटर के विकास में काफी तेजी आएगी। स्क्वायर यार्ड्स की संस्थापक और सीईओ तनुज शौरी ने कहा कि बजट का कैपिटल मार्केट को और मजबूत करने और एसेट रीसाइक्लिंग पर लगातार फोकस है। हमें मीडियम टर्म में नए REIT और Infrastructure Investment Trusts (InvITs) लिस्टिंग में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिसमें ऑफिस एसेट्स, रिटेल सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क, डेटा सेंटर और इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो शामिल हैं।
रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए इससे हाई-क्वालिटी, इनकम देने वाले रियल एसेट्स तक पहुंच बढ़ती है जो पहले ज्यादातर सिर्फ इंस्टीट्यूशन्स के लिए ही उपलब्ध थे। वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव को बजट से GCC के टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर आकर्षित होने की उम्मीद है। 2047 तक टैक्स हॉलिडे की घोषणा के बाद डेटा सेंटर इंडस्ट्री में तेजी आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि बजट में पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से खास कोशिशों के जरिए हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए एक साफ ग्रोथ का रास्ता भी दिखाया गया है।
प्रॉपइक्विटी के सीईओ समीर जसूजा ने कहा कि इस बजट में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए विकास पर ज्यादा ध्यान दिया है। उन्होंने बताया कि सरकार सड़क, रेल और उद्योग से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इलाके और फैक्ट्रियां, डेटा सेंटर, तेज रफ्तार रेल लाइनें, और माल ढुलाई के लिए खास कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इसके अलावा सरकार सरकारी कंपनियों की खाली या कम इस्तेमाल वाली जमीन और इमारतों को खास REIT के जरिए बेहतर तरीके से इस्तेमाल करेगी। समीर जसूजा ने यह भी कहा कि सरकार टियर-2 और टियर-3 शहरों, खासकर मंदिर शहरों, में भी विकास पर ध्यान दे रही है। इन शहरों में हर सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए पांच साल में 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उनका कहना है कि इन सभी कदमों से रियल एस्टेट सेक्टर को फायदा मिलेगा, नए प्रोजेक्ट आएंगे और निवेश बढ़ेगा।
आम बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग सेक्टर को खास राहत नहीं दी गई है। पुरी ने कहा कि बजट से रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ी निराशा यह थी कि अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई, जो महामारी के बाद से ही लगातार गिर रहा है। ANAROCK डेटा बताता है कि महामारी के बाद अफोर्डेबल हाउसिंग की बिक्री की हिस्सेदारी 2019 में 38 फीसदी थी, 2025 में गिरकर 18 फीसदी रह गई।