जून तिमाही में बेंचमार्क सूचकांक एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी-50 में अब तक क्रमश: 19 व 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, ऐसे में बाजार ने पिछले 11 साल में रिकॉर्ड तिमाही लाभ दर्ज की। इससे पहले जून 2009 की तिमाही में दोनोंं सूचकांकों में क्रमश: 49 फीसदी व 42 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी।
नकदी के कारण दर्ज हो रही तेजी ने स्मॉलकैप व मिडकैप कंपनियों के शेयरों को भी आगे बढ़ाया, जो छह साल में सबसे बड़ा तिमाही लाभ दर्ज करने जा रहा है। अप्रैल-जून तिमाही में अब तक बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 28.8 फीसदी चढ़ा है जबकि एसऐंडपी बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 23.5 फीसदी की उछाल दर्ज हुई है, ऐसे में जून 2014 की तिमाही के बाद यह सबसे ज्यादा तेजी है क्योंंकि तब उनमें क्रमश: 35.6 फीसदी व 32.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी जब नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार ने केंद्र में सत्ता संभाली थी। स्मॉलकैप और मिडकैप सूचकांकों में जून 2020 की तिमाही में आई तेजी हालांकि जनवरी-मार्च 2020 की तिमाही में कोरोनावायरस के कारण हुई 29 से 30 फीसदी की गिरावट की पृष्ठभूमि में आई है।
इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकोंं ने जून तिमाही में भारतीय इक्विटी में शुद्ध रूप से 4.07 अरब डॉलर यानी 30,721 करोड़ रुपये निवेश किया है। एनएसडीएल के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। दूसरी ओर म्युचुअल फंड 5,134 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे।
आईडीबीआई कैपिटल के शोध प्रमुख ए के प्रभाकर ने कहा, पिछले कुछ महीनों से आ रही तेजी की मुख्य वजह नकदी रही है, जो जल्द खत्म हो सकती है। ऐसे में कुछ मुनाफावसूली करना बुद्धिमानी होगी, खास तौर से मिडकैप व स्मॉलकैप क्षेत्रों में।
लार्जकैप की बात करें तो सेंसेक्स में शामिल 30 में से 14 शेयरों ने तिमाही के दौरान 19 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज कर बेंचमार्क इंडेक्स को मात दी है। स्मॉलकैप बास्केट में इंडेक्स के 711 शेयरों में 76 की बाजार कीमतें 31 मार्च के स्तर से दोगुनी से ज्यादा हो गई। दूसरी ओर, एसऐंडपी बीएसई मिडकैप इंडेक्स के 101 शेयरों में से 51 ने जून तिमाही में 24 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज कर इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। अगले कुछ महीनों में प्रभाकर को उम्मीद है कि नकदी खत्म हो जाएगी जब विदेशी बाजारों में गिरावट आएगी, जिसके कारण देसी बाजार में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा, मेरा सुझाव है कि निवेशकों को बैंक, एनबीएफसी और माइक्रोफाइनैंस संस्थानों के शेयरों से दूर रहना चाहिए। पिछले कुछ हफ्तों से उनमें अच्छी तेजी आई है और अब ये गिरावट के प्रति संवेदनशील हैं।
हालांकि क्रेडिट सुइस वेल्थ मैनेजमेंट के विश्लेषकों को उम्मीद है कि अगर वैश्विक तेजी जारी रही तो भारतीय इक्विटी को समर्थन मिलता रहेगा। क्रेडिट सुइस वेल्थ मैनेजमेंट के भारतीय इक्विटी शोध प्रमुख जितेंद्र गोहिल ने प्रेमल कामदार के साथ एक रिपोर्ट में कहा है, हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वह इसतेजी का पीछा न करें, उन कंपनियों पर ध्यान दें जिनकी वैलेंस शीट मजबूत है। वित्तीय कंपनियों के लिए अल्पावधि का परिदृश्य अभी भी कमजोर है, ऐसे में हमारा मानना है कि अच्छी वित्तीय कंपनियों में होने वाली गिरावट दो तीन साल के निवेश नजरिये से खरीद का बेहतर मौका दे सकता है।