वैकल्पिक निवेश फंडों (एआईएफ) की परिसंपत्तियां पहली बार 6 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े के पार पहुंच गईं, क्योंकि पोर्टफोलियो में जोखिम घटाने और प्रतिफल बढ़ाने के लिए अमीर निवेशकों की संख्या में इजाफा दर्ज किया गया है।
एआईएफ उद्योग की परिसंपत्तियां दिसंबर तिमाही के अंत में 6.1 लाख करोड़ रुपये पर दर्ज की गईं, जो पूर्ववर्ती वर्ष की समीक्षाधीन अवधि के मुकाबले 38 प्रतिशत अधिक हैं। यह उद्योग पिछले पांच वर्षों में 0.7 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों से आठ गुना से ज्यादा तेजी से बढ़ा है।
एआईएफ का अधिकतम आकार 1 करोड़ रुपये का है और इसका मकसद निवेशकों को विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में नई रणनीतियों तक पहुंच उपलब्ध कराना है। विभिन्न बाजार चक्रों से जुड़े सतर्क निवेशकों का निवेश विभिन्न परिसंपत्ति श्रेणियों में लगा होता है, वैश्विक और घरेलू दोनों तौर पर, और विभिन्न निवेश माध्यमों के जरिये भी, उन्हें ज्यादा अनुकूल दृष्टिïकोण की जरूरत होती है जो उन्हें अपने जोखिम एवं प्रतिफल प्रोफाइल के अनुसार निवेश में सक्षम बना सके।
विश्लेषकों का कहना है कि सूचीबद्घ क्षेत्र में महंगे मूल्यांकन को देखते हुए निवेशक ढांचागत क्रेडिट, उद्यम पूंजी, और निजी इक्विटी फंडों, रियल एस्टेट फंडों और कैटेगरी-3 में अल्पावधि स्टे्रटेजीज जैसे विकल्पों पर ध्यान दे रहे हैं, और इन सभी का लंबी अवधि की इक्विटी से कम सह-संबंध हो सकता है।
कर्मा कैपिटल सह-प्रमुख, व्यावसायिक विकास, योगेश ठक्कर ने कहा, ‘एआईएफ बड़े पारिवारिक कार्यालयों, अल्ट्रा हाई नेटवर्थ लोगों और अन्य संस्थागत निवेशकों की जरूरतें पूरी करने में भी सक्षम हैं।’
एआईएफ रिस्क-रिटर्न कॉम्बिनेशन और प्रोफेशनल मेनेजमेंट के साथ स्वायत्तता प्रदान करते हैं जो म्युचुअल फंड या पीएमएस या डायरेक्ट निवेश मुहैया नहीं कर सकते। पिछले पांच वर्षों में एमएफ उद्योग के स्टार फंड प्रबंधकों ने भी एआईएफ प्रबंधन के लिए स्वयं को स्थापित किया है।
एएसके इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के बिजनेस हेड एवं सीआईओ प्रतीक अग्रवाल ने कहा, ‘बड़े निवेशक उस वैल्यू को पहचान रहे हैं जो पीएमएस और एआईएफ जैसे वैकल्पिक प्लेटफॉर्म पारंपरिक माध्यमों के मुकाबले मुहैया करा रहे हैं और कुछ आवंटन इनमें आ रहा है। वृद्घि का रुझान बरकरार रहने की संभावना है, क्योंकि इस क्षेत्र में प्रदर्शन का रिकॉर्ड अच्छा रहा है।’
उन्होंने कहा कि एआईएफ क्षेत्र में दीर्घावधि निवेशक लाने की क्षमता है और इससे फंड प्रबंधक को दीर्घावधि नजरिये में मदद मिलेगी।