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AI शेयरों की कीमतें आसमान पर, अब निवेशकों के लिए भारत बन रहा है ‘सेफ हेवन’! जानिए वजह

AI और चिप कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल के बाद अब विदेशी निवेशक भारत की ओर रुख कर रहे हैं। जानिए क्यों भारत बन रहा है उनका ‘सेफ हेवन’।

Last Updated- November 12, 2025 | 1:15 PM IST
artificial intelligence

दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चिप (सेमीकंडक्टर) कंपनियों के शेयर बहुत तेजी से बढ़े हैं। अब जानकारों का कहना है कि इन शेयरों की यह तेजी ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। इनकी कीमतें बहुत महंगी हो गई हैं, इसलिए अब कई विदेशी निवेशक भारत जैसे देशों की ओर लौट सकते हैं।

क्या सेमीकंडक्टर शेयरों में बन रहा है बुलबुला?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) अनुपात अब 53.5 गुना तक पहुंच गया है, जबकि पिछले 10 सालों का औसत सिर्फ 28.4 गुना रहा है। यानी, इन शेयरों की कीमतें उनकी कमाई के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। इस साल अब तक यह इंडेक्स 40% तक ऊपर गया है। इसी दौरान ‘मैग्निफिसेंट 7’ इंडेक्स में 24% और नैस्डैक 100 में 21.5% की बढ़त हुई है। अमेरिका का S&P 500 इंडेक्स 16.4% चढ़ा है, जबकि भारत का निफ्टी50 इसी समय में 8.7% ऊपर गया है।

कौन सी बड़ी कंपनियों के शेयर उड़े – और अब क्यों गिर रहे हैं?

दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर इस साल अब तक 95% बढ़ चुके हैं, जबकि ताइवान की TSMC में 37% की बढ़त हुई है। अमेरिका की एनविडिया (Nvidia) के शेयर 40% और एएमडी (AMD) के शेयर 97% तक चढ़ गए हैं। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों में फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स और ‘मैग्निफिसेंट 7’ दोनों ही अपने सबसे ऊंचे स्तर से करीब 5% नीचे आ गए हैं।

AI ट्रेड से आसान पैसा निकल चुका है

जेफरीज के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रैटेजी हेड क्रिस्टोफर वुड ने अपनी वीकली रिपोर्ट GREED & Fear में लिखा है कि AI से जुड़ी कंपनियों में आसान पैसा अब निकल चुका है। उनके मुताबिक, अब तक एनविडिया (Nvidia), हाइनिक्स (Hynix) और माइक्रोन (Micron) जैसी कंपनियों ने सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया है। वुड ने चेतावनी दी कि “AI बुलबुले” की बढ़ती चर्चा यह संकेत है कि बाजार अभी अपनी ऊंचाई पर तो नहीं पहुंचा है, लेकिन अब जोखिम बढ़ गया है।

क्या भारत बन सकता है “AI सुधार” के दौर में सुरक्षित ठिकाना?

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल में वैश्विक बाजारों में आई गिरावट यह दिखाती है कि शेयरों के दाम (वैल्यूएशन) हकीकत से कहीं ज्यादा बढ़ गए थे। ब्याज दरें बढ़ने और पूंजी जुटाने की लागत ज्यादा होने से अब निवेशक सावधान हो गए हैं। कोटक ने कहा है कि इस माहौल में भारत एक “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित बाजार बनकर उभर रहा है।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड सिक्योरिटीज इंडिया के इक्विटी स्ट्रैटेजी हेड संजय होता ने कहा, “भारत AI पर निर्भर बाजार नहीं है, बल्कि घरेलू मांग पर टिका हुआ है। अगर अमेरिका, ताइवान और कोरिया में AI शेयरों की तेजी थमती है, तो कुछ विदेशी निवेश भारत की ओर लौट सकते हैं।”

HSBC के एशिया पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजी हेड हेराल्ड वैन डेर लिंडे ने भी कहा कि कई निवेशक अब AI शेयरों में भीड़ देखकर असहज हैं। उन्होंने कहा, “भारत इस समय एक अच्छा AI हेज है, यानी जो निवेशक AI शेयरों की ज्यादा तेजी से डर रहे हैं, वे भारत में निवेश करके संतुलन बना सकते हैं।”

स्वतंत्र विश्लेषक अजय बोडके के अनुसार, भारत के बाजार की हालिया कमजोरी की वजह यह थी कि फंड्स अमेरिका, ताइवान और कोरिया जैसे AI-केंद्रित बाजारों में चले गए थे। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उन्होंने बताया, “HSBC और गोल्डमैन सैक्स जैसी ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनियों ने भारत पर अपना रुख ‘ओवरवेट’ किया है, यानी अब वे भारत में ज्यादा निवेश की सिफारिश कर रही हैं। यह संकेत है कि विदेशी पैसा फिर भारत लौट सकता है।”

First Published - November 12, 2025 | 1:15 PM IST

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