facebookmetapixel
India-EU FTA पर मुहर: वैश्विक व्यापार में नई शुरुआत, अब असली परीक्षा सुधारों कीनिवेश आधारित विकास के लिए तटस्थ नीति और साफ-सुथरे भरोसेमंद नियम क्यों हैं जरूरीविकसित भारत का रास्ता: नवाचार, शिक्षा और रचनात्मक विनाश से आएगी तेज आर्थिक प्रगतिStock Market: India-EU FTA का असर! शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी चढ़ेIndia–EU FTA Final! 20 साल बाद हुआ बड़ा सौदा, भारत को क्या मिलेगा?Budget 2026: क्या डेट म्युचुअल फंड्स में लौटेगा इंडेक्सेशन बेनिफिट? जानें निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरीITR की डेडलाइन चूकी? घबराएं नहीं! ITR-U के जरिए सुधारें अपनी गलती और भारी पेनल्टी से खुद को बचाएंAsian Paints Q3 Results: मुनाफे में 4.6% की गिरावट, पर सेल्स और वॉल्यूम ग्रोथ ने दिखाई मजबूतीGoogle Pay से अब मिनटों में मिलेगा पर्सनल लोन, वो भी बिना किसी गारंटी के! जानें पूरा मामलाBudget 2026: सरकार हो राजी तो म्युचुअल फंड बनेंगे बुढ़ापे का सहारा, NPS जैसे ही टैक्स फायदे मिलने की उम्मीद  

विश्व हृदय दिवस 2025: अब सिर्फ बुजुर्गों को नहीं, युवाओं को भी हार्ट अटैक का खतरा

कभी बुजुर्गों की बीमारी समझी जाने वाली दिल की बीमारी अब 20 और 30 की उम्र के युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। विश्व हृदय दिवस 2025 चेतावनी है कि अब कार्रवाई जरूरी है

Last Updated- September 29, 2025 | 12:36 PM IST
World Heart Day
Representational Image

दिल की बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों की चिंता नहीं रही। दुनिया भर में युवा और दिखने में स्वस्थ लोग भी दिल के दौरे से जान गंवा रहे हैं। लंबे कार्य घंटे, बढ़ता तनाव और असंतुलित जीवनशैली के चलते युवा पीढ़ी भी उन खतरों का सामना कर रही है जो कभी केवल बुढ़ापे से जोड़े जाते थे। विश्व हृदय दिवस 2025 याद दिलाता है कि दिल की सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि आज की अनिवार्यता है।

विश्व हृदय दिवस क्या है और क्यों मनाया जाता है?

हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। इसे 2000 में वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन (WHF) ने शुरू किया था, ताकि हृदय रोगों (CVDs) के बारे में जागरुकता फैलाई जा सके। ये बीमारियां दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण हैं।

इस वर्ष की थीम है — “Don’t Miss the Beat!”, जो सभी लोगों तक जीवनरक्षक हृदय देखभाल पहुँचाने और 2030 तक लक्ष्य हासिल करने की अपील करता है।

युवाओं के लिए क्यों जरूरी है हृदय स्वास्थ्य?

भारत में शोध बताते हैं कि 20-30 की उम्र के युवाओं में दिल के दौरे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। तनाव भरी नौकरियां, नाइट शिफ्ट्स, प्रोसेस्ड डाइट और निष्क्रिय जीवनशैली — सब मिलकर खामोशी से खतरा बढ़ाते हैं।

डॉ बिलाल थंगल टी एम, मेडिकल लीड, NURA–AI हेल्थ स्क्रीनिंग सेंटर के अनुसार: “दिल की समस्याओं में हाल के वर्षों की वृद्धि यह बताती है कि हृदय रोग अक्सर बिना किसी चेतावनी के विकसित हो सकते हैं। ज्यादातर लोग तब ध्यान देते हैं जब नुकसान गंभीर और अपूरणीय हो चुका होता है। अब केवल जागरुकता नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।”

वैश्विक तस्वीर

वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक, हर साल 2.05 करोड़ मौतें दिल की बीमारियों से होती हैं — कैंसर, हादसों और संक्रमणों से भी अधिक। अच्छी खबर यह है कि इन मौतों का 80 प्रतिशत जीवनशैली में बदलाव और समय पर इलाज से रोका जा सकता है।

सबसे बड़े कारक हैं:

  • हाई ब्लड प्रेशर
  • धूम्रपान
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल
  • डायबिटीज
  • मोटापा
  • तनाव और निष्क्रियता

भारत में कितनी गंभीर है स्थिति?

भारत में हृदय रोग हर चार मौतों में से एक के लिए जिम्मेदार हैं। और सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीय युवाओं में हार्ट अटैक जल्दी आते हैं।

डॉ बिलाल कहते हैं: “युवाओं में दिल का दौरा तेजी से बढ़ना चिंताजनक है। नियमित चेकअप और स्क्रीनिंग से धमनियों में कैल्शियम जमा या छोटी रक्त नलिकाओं में बदलाव जैसे छिपे खतरों का पता लगाया जा सकता है।”

क्या दिल का स्वास्थ्य सिर्फ जीवनशैली पर निर्भर है?

नहीं। जीवनशैली के साथ-साथ जेनेटिक्स यानी डीएनए की भी अहम भूमिका है। डॉ संदीप शाह, जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर, न्यूबर्ग डायग्नॉस्टिक्स बताते हैं: “हृदय स्वास्थ्य केवल खानपान या तनाव पर निर्भर नहीं करता। हमारी आनुवंशिक संरचना भी उतनी ही अहम है। आज जेनेटिक टेस्टिंग से कोलेस्ट्रॉल मेटाबॉलिज्म, रिद्म एब्नॉर्मैलिटी और कुछ हृदय रोगों का पता लक्षणों से पहले ही लगाया जा सकता है।” भारत में अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में जेनेटिक और एडवांस स्क्रीनिंग जान बचाने में मदद कर सकती है।

दिल की सुरक्षा के आसान कदम

दिल की सुरक्षा के लिए हमेशा बड़े बदलाव ही नहीं, छोटे-छोटे रोजमर्रा के कदम भी कारगर हैं:

  • नियमित स्वास्थ्य जांच — ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, शुगर और जरूरत हो तो जेनेटिक टेस्ट
  • हर घंटे थोड़ी हलचल — पांच मिनट टहलना या स्ट्रेचिंग
  • संतुलित और पौधों पर आधारित आहार, प्रोसेस्ड फूड सीमित करें
  • रोजाना 7-8 घंटे की नींद
  • तनाव प्रबंधन तकनीकें — ध्यान, प्राणायाम या गहरी सांसें

First Published - September 29, 2025 | 12:36 PM IST

संबंधित पोस्ट