टीका संयंत्र का नहीं कोई लिवाल

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 4:46 AM IST

चेन्नई में सरकारी टीका विनिर्माण संयंत्र में टीका तैयार करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है जबकि कई राज्यों ने टीके की खुराक की भारी कमी के बारे में शिकायत की है। इस संयंत्र का स्वामित्व एचएलएल बायोटेक के हाथों में है और इसे इस सप्ताह आठवीं बार एकीकृत टीका विनिर्माण (आईवीसी) केंद्र के लिए बोली लगाने की समय-सीमा बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि कंपनी को जनवरी में अभिरुचि पत्र प्रकाशित कराने के बाद भी निजी कंपनियों की तरफ  से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
एचबीएल एचएलएल लाइफ केयर लिमिटेड की सहायक कंपनी है जो सरकार के स्वामित्व वाला सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) है और यह महामारी के दौरान चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए जिम्मेदार रही है। टीका निर्माता कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि इस संयंत्र को टीका उत्पादन के लिए तैयार करने के वास्ते भी करीब 600 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश की जरूरत होगी और इसलिए अस्थायी अवधि के लिए अनुबंध विनिर्माण का कोई मतलब नहीं है। 

अधिकारी ने बताया, ‘इस तरह के एक संयंत्र के लिए लंबी अवधि में टिकाऊ होना जरूरी है ताकि वे जरूरत के वक्त उपलब्ध हो सकें और इसमें लागत का पहलू भी अहम है। ऐसे में केवल कोविड-19 टीके के निर्माण के लिए संयंत्र को लेना ही पर्याप्त नहीं होगा बल्कि अन्य बीमारियों से निपटने के लिए भी दूसरे टीकों का निर्माण करना जरूरी है। इसके लिए आपको हिस्सेदारी वाली साझेदारी की जरूरत होगी न कि कोई टीका बनाया और फिर अनुबंध खत्म कर दिया।’ 
सूत्रों ने कहा कि कोविड टीकों के लिए निर्माण क्षमता बढ़ाने की जरूरत को महसूस करते हुए जनवरी में सरकार ने अभिरुचि पत्र की बात कही। एचबीएल के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी को टीका निर्माताओं से संयंत्र की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेने के बाबत संदेश मिला था जब टीकाकरण अभियान ने रफ्तार पकड़ी थी। एचएलएल के अधिकारी ने कहा, ‘इन पूछताछ के आधार पर, एचएलएल को अभिरुचि पत्र का आमंत्रण देने का निर्देश दिया गया था ताकि कोविड-19 या अन्य टीके तैयार करने के लिए अनुबंध विनिर्माण/दीर्घकालिक पट्टे या किसी अन्य पारस्परिक रूप से स्वीकार्य व्यवस्था के जरिये संभावित पक्षों/कंपनियों को चुना जा सके। कुछ पक्षों ने इस संयंत्र का दौरा भी किया था ताकि यह जायजा लिया जा सके कि यहां परिचालन शुरू करना कितना व्यावहारिक होगा।’ अधिकारी ने कहा, ‘इस संयंत्र में चार विनिर्माण लाइनें थी जो फ ॉर्मूलेशन और फि लिंग कर सकती हैं। इसमें वेयरहाउस, पैकेजिंग यूनिट, जानवरों पर प्रयोग की सुविधा भी है। इस संयंत्र में वायरल टीकों का भी थोक उत्पादन होता है। यहां एक साथ दो टीकों का निर्माण किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, रेबीज टीके और जापानी इंसेफेलाइटिस टीका दोनों को छह महीने की अवधि के लिए तैयार किया जा सकता है।’ उन्होंने कहा कि यहां दो तरह के बैक्टीरियल टीकों के उत्पादन की सुविधा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि इसकी अतिरिक्त लागत आएगी। उपकरण में नए सिरे से बदलाव करना होगा और संयंत्र के साथ-साथ उपकरणों की भी नए सिरे से पुष्टि की जाएगी। इन सभी प्रक्रियाओं को अंतरराष्ट्रीय नियामकों द्वारा भी अनुमोदित किए जाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, एक एकल विनिर्माण लाइन को फिर से शुरू करने में लगभग चार महीने का समय लगेगा।

उन्होंने कहा, ‘प्राइवेट कंपनियों ने निविदा शर्तों के बारे में कुछ चिंताएं जाहिर की हैं। कुछ पक्षों ने दिलचस्पी भी दिखाई थी और साइट का दौरा भी किया था। लेकिन बाद में उन्होंने ज्यादा पूंजीगत खर्च का हवाला देते हुए अपने हाथ पीछे खींच लिए। निजी कंपनियां अस्थायी उत्पादन के लिए संयंत्र को किराये पर नहीं लेना चाह रही हैं बल्कि वे हिस्सेदारी वाली भागीदारी चाहती हैं।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि निविदा की शर्तों में बदलाव करने के लिए कोई फैसला नहीं किया गया है। दवा कंपनियों को सलाह देने वाले एक सलाहकार ने परियोजना को असंभव करार देते हुए कहा कि भले ही सरकार इक्विटी साझेदारी की बात भी करे तब भी उसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकती है क्योंकि ज्यादातर भारतीय टीका निर्माताओं ने पिछले साल से निर्माण क्षमता तैयार करनी शुरू कर दी थी और अब वे इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा सकते हैं।

First Published : May 17, 2021 | 12:17 AM IST