भारत में कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर खतरनाक नहीं रह सकती है। इंडियन सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) के चेयरमैन नरेंद्र कुमार अरोड़ा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से यह बात कही। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर का प्रभाव बहुत अधिक नहीं दिख सकता है मगर देश को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। कोविड-19 से बचाव के टीके की तीसरी खुराक (बूस्टर डोज) और महामारी की तीसरी लहर आने की आशंका के बीच अरोड़ा ने कहा कि ऐसी कोई खुराक स्थानीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए लगाई जाएगी।
अरोड़ा ने कहा, ‘हमें मालूम है कि अमेरिका और इजरायल अपने नागरिकों को तीसरी खुराक लगा रहे हैं लेकिन भारत अपने यहां हालात और आंकड़ों पर विचार करने के बाद ही कोई निर्णय लेगा। देश में डेल्टा स्वरूप पहले ही संक्रमण फैला चुका है। अब अमेरिका और इजरायल जैसे देशों में कोविड-19 के इस स्वरूप का असर दिख रहा है।’
उन्होंने कहा कि तीसरी खुराक विषाणु के प्रसार और संक्रमण की गंभीरता के आधार पर लगाई जाएगी। आईएनएसएसीओजी एक राष्ट्रीय टीका निगरानी व्यवस्था भी शुरू कर रही है जिससे टीका लगने के बाद भी होने वाले संक्रमणों के आंकड़े उपलब्ध कराएगा। अरोड़ा ने कहा कि इस व्यवस्था की शुरुआत जल्द की जाएगी।
भारत में कोविड महामारी की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार डेल्टा स्वरूप टीकाकरण के बाद भी कई लोगों में होने वाले संक्रमण की मुख्य कारण रहा है। अरोड़ा ने कहा कि तीसरी खुराक देने के संबंध में कोई निर्णय लेने से पहले हम यह भी जरूर देखेंगे कि देश में आबादी के किसी खास हिस्से में टीकाकरण के बाद संक्रमण के मामले में देखे जा रहे हैं या नहीं।
उन्होंने जोर दिया कि वैज्ञानिक आधार पर ही टीका लगाने के संबंध में निर्णय लिए जाएंगे। हालांकि अरोड़ा ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों में टीकाकरण के बाद संक्रमण के दिखे मामलों के अध्ययन से पता चला है कि ये अधिक चिंता का विषय नहीं हैं। देश में कोविड महामारी से बचाव के टीके सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों को लगाए गए थे।
पीजीआई चंडीगढ़ ने टीके के प्रभाव पर एक शोध किया है जिसके अनुसार दो खुराक कोविड-19 संक्रमण से 98 प्रतिशत तक सुरक्षा देती है और टीके की एक खुराक भी 92 प्रतिशत तक कारगर रही है। यह अध्ययन पंजाब पुलिस के लोगों पर किया गया था। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेलूर ने भी एक अध्ययन किया है जिसमें उसने कहा है कि टीके की दोनों खुराक लेने वाले स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण होने की आशंका टीका नहीं लगाने वाले लोगों की तुलना में काफी कम है।
टीकाकरण में धनी एवं गरीब देशों के बीच बढ़ती असमानता के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि प्रत्येक देश में कम से कम 10 प्रतिशत आबादी को टीका लगाने के लिए तीसरी खुराक लगाने की प्रक्रिया कम से कम सितंबर अंत तक शुरू नहीं की जानी चाहिए। भारत में अब तक कुल आबादी के करीब 10 प्रतिशत लोगों को कोविड महामारी से बचाव की दोनों खुराक लगाई जा चुकी है। ऑर वल्र्ड इन डेटा के अनुसार करीब 24 प्रतिशत से कम लोगों को अब तक एक खुराक लगाई गई है। आईएनएसएसीओजी भी कोविशील्ड टीके की दो खुराक के बीच 12 से 16 हफ्ते के बीच अंतर पर नजर रख रहा है। अरोड़ा ने कहा, ‘इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि कोविशील्ड की दो खुराक के बीच अंतराल बढ़ाने से संक्रमण से पर्याप्त सुरक्षा मिलती है। हम इन पहलुओं पर लगातार नजर रख रहे हैं।’
टीकाकरण पर हो ध्यान
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा है भारत को फिलहाल अधिक से अधिक लोगों के टीकाकरण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। गुलेरिया ने कहा कि बूस्टर डोज लगाने के बजाय उन लोगों को टीके लगाने पर विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिनके संक्रमित होने का खबरा अधिक है। उन्होंने कहा कि इस बात के फिलहाल अधिक प्रमाण नहीं मिले हैं कि बूस्टर डोज या तीसरी खुराक अधिक लाभदायक है। गुलेरिया ने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को टीका लगा कर हम कई जीवन बचा पाएंगे।