वर्ष 2020 में तकनीक ने मानवता को बचाया है। कई लोग इसके विरोध में अपने तर्क दे सकते हैं लेकिन 2020 में सामान्य जीवन से जुड़ी सभी प्रकार की गतिविधियों को तकनीक ने ही सक्षम बनाया है। टीका आने के बाद पुराने तौर-तरीकों में वापस लौटने के बाद इसके कई अनुभव याद आएंगे। कोविड महामारी के आने के बाद की दुनिया में हमारे जीवन के लगभग हर पहलू में तकनीक के प्रभावी बने रहने की उम्मीद है। वर्ष 2021 में तकनीक के क्षेत्र में काफी उभार आने की संभावना है और उम्मीद है कि मानवता तकनीक को अपनी हर गतिविधि में शामिल कर सकती है। महामारी संकट के दौर में तकनीक जिस तरह हमारी मदद कर रही है उससे बेहतर तरीके से हमारे जीवन में शामिल होने की उम्मीद है। कोविड संकट आने से तकनीक के क्षेत्र में तेजी से प्रयोग हो रहे हैं। ऐसे सभी प्रयोगों के परिणाम और सीख साल 2021 में दिखाई देंगे। अब तकनीक के प्रति लोगों की मानसिकता और दृष्टिकोण बदल गया है। लोगों में अब अकल्पनीय तकनीकी उपायों को अपनाने की इच्छा हो रही हैं। हम 2021 में प्रौद्योगिकी का उपयोग न केवल महामारी से निपटने, बल्कि प्रगति करके आगे बढऩे के लिए भी करेंगे।
मोटे तौर पर तकनीक के क्षेत्र में आने वाले ट्रेंड को निम्नलिखित पांच श्रेणियों में विभाजित करके देखा जा सकता है। तकनीक का गहन उपयोग: तकनीक उपभोक्ता के दिमाग को समझने में बेहतर कार्य करेगी। इंटरनेट ऑफ थिंग्स से, डिवाइस एवं टेक प्लेटफॉर्म उपभोक्ताओं के व्यवहार को ट्रैक करने की कोशिश करेंगे। द इंटरनेट ऑफ बिहेवियर पैटर्न बनाने के लिए व्यक्ति के बारे में विभिन्न स्रोतों से जानकारी एकत्र करेगा। आने वाले वर्ष में क्लाउड कंप्यूटिंग उद्यमों और व्यक्तियों के लिए कामकाज का प्रमुख प्लेटफॉर्म बन जाएगा और विशिष्ट सर्वरों पर वे और अधिक तेजी के साथ व्यक्तिगत एवं आधिकारिक दस्तावेजों पर काम करेंगें। हालांकि यह जरूरी पारिस्थितिकी तंत्र पर भी निर्भर करेगा, लेकिन इस तरह कार्यालय की अवधारणा पुन: परिभाषित होगी। कुछ अहम कारणों से भारत में और विश्व स्तर पर निजी क्लाउड सेवाओं की आवश्यकता बढ़ रही है। डेटा की सुरक्षा और इसके भंडारण का स्वामित्व अपने पास रखने की आवश्यकता ने निजी क्लाउड के महत्त्व को बढ़ा दिया है। आसान शब्दों में कहें तो, निजी क्लाउड की मदद से कंपनी का सर्वर एवं डेटा संग्रहीत होने वाले स्थान पर नियंत्रण रहता है।
सैप के मुख्य ग्राहक अधिकारी और विपणन प्रमुख (भारतीय उपमहाद्वीप)कृष्णन चटर्जी कहते हैं, ‘महामारी के बाद के समय में, हमें क्लाउड बिजनेस में काफी तेजी देखने को मिलेगी। एंटरप्राइज मैनेजमेंट का अधिकांश स्टोरेज क्लाउड पर चला जाएगा। यह बाजार की गतिशीलता को बदलने के लिए तेजी से कॉन्सेप्ट बनाने एवं नए व्यवसाय मॉडल तैयार करने की क्षमता प्रदान करेगा।’ स्वचालित यंत्र के क्षेत्र में तकनीकी ट्रेंड: भौतिक रोबोट से लैस स्वचालन प्रक्रिया में काफी तेजी आएगी। सटीकता, दक्षता एवं पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सैकड़ों छोटी तथा बड़ी प्रक्रियाओं को स्वचालित किया जाएगा। रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन (आरपीए) छोटी कंपनियों को कर्मियों एवं बुनियादी ढांचे में कम निवेश के साथ तेजी से बढऩे में सहायता करेगा।
सेवा क्षेत्र में स्वचालित प्रक्रियाओं को प्रमुखता मिलेगी। यूआईपैथ के क्षेत्रीय विपणन प्रमुख (भारत एवं दक्षिण एशिया) राजेश कुमार ने कहा, ‘सॉफ्टवेयर रोबोट या आरपीए हर क्षेत्र को बेहतर बनाते हैं – यह खुद को डिजिटल करने का सबसे अच्छा तरीका है।’ गार्टनर के अनुसार, महामारी और आगामी मंदी ने कई उद्यमों की आरपीए में रुचि बढ़ाई हैं। गार्टनर ने अनुमान लगाया, ‘विश्व स्तर पर 90 प्रतिशत बड़े संगठन साल 2022 तक आरपीए को अपनाएंगे, क्योंकि वे इसे महत्त्वपूर्ण व्यावसायिक प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की नजर से देख रहे है।’
सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी पहल:
रिमोट कंप्यूटिंग एवं क्लाउड तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ सुरक्षा एक अहम पहलू होगा। अब कंपनियों या संगठनों के बजाय उपयोगकर्ताओं अथव निजी स्तर पर साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा। अब सुरक्षित कार्यालय के बजाय एक ऐसे स्थान की सुरक्षा की आवश्यकता हैं, जहां कर्मी सुरक्षित रूप से बैठकर कार्य कर सके। गार्टनर की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘साइबर सुरक्षा का जाल अनिवार्य रूप से किसी व्यक्ति या वस्तु की पहचान के इर्द-गिर्द सुरक्षा परिधि को परिभाषित करने की अनुमति देता है।’
दूरस्थ तरीके से काम करने पर डिवाइसों की सुरक्षा करना सबसे अहम होगा। शोध फर्म एनालिसिस मेसन के अनुसार, ‘उद्यमी फिलहाल मोबाइल उपकरणों की सुरक्षा पर धीमी गति से काम कर रहे हैं, लेकिन आगे वे इस पर अधिक ध्यान देंगे क्योंकि उन्हें लॉकडाउन के दौरान मोबाइल उपकरणों की उपयोगिता का अंदाजा लग गया है और इसे लेकर सुरक्षा संबंधी नए खतरे भी पैदा हुए हैं। हमारा अनुमान है कि साल 2019 से 2025 के बीच मोबाइल सुरक्षा पर खर्च 17 प्रतिशत सीएजीआर की दर से बढ़ेगा।’
विनियमन के क्षेत्र में तकनीकी पहल:
यूरोपीय संघ के बाद, अमेरिका भी बड़ी तकनीकी कंपनियों की ओर ध्यान दे रहा है। एकाधिकार को खत्म कर नया नियामकीय वातावरण वृहद स्तर पर तकनीकी उपयोग के लिए महत्त्वपूर्ण आयाम होगा। प्रौद्योगिकी उत्पादों एवं सेवाओं के प्रति जवाबदेही तथा कानूनी दायित्व के मुद्दे, दुनिया भर में नियामकीय प्रयासों पर हावी होंगे। ब्लॉकचेन के उपयोग के लिए नैतिक एआई और स्पष्ट नियमों की आवश्यकता उद्योग के साथ-साथ सरकार में भी समान रूप से महसूस की गई है। इसे लेकर कुछ प्रयास किए गए हैं और उम्मीद है कि बहुपक्षीय एवं वैश्विक साझेदारियों के साथ प्रौद्योगिकी के उपयोग के कुछ मानक बनाए जाएंगे। देश की सीमाओं से परे कारोबार करने वाले डिजटल मार्केटों के संचालन के सामान्य नियम बनाने होंगे।
कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तकनीकी पहल:
2021 में देश की आर्थिक ताकत तकनीक एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे की नींव पर आधारित होगी। चीन के आक्रामक व्यवहार और कोविड-19 के प्रभाव के बीच, भारत सहित कई देश अपनी सीमा की सुरक्षा को बढ़ाने के साथ ही डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहे हैं। 5जी सेवाओं के आने से कनेक्टिविटी के तकनीकों का प्रभाव बढेगा। दूरस्थ स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्यम प्रबंधन काफी सरल होगी। कई अवरोधों का सामना करने के बाद अखिरकार साल 2021 5जी का वर्ष होगा।
एरिक्सन द्वारा लगाये एक अनुमान के अनुसार साल 2026 के अंत तक 35 लाख 5जी सबस्क्रिप्शन हो सकते हैं तथा उस समय मोबाइल डेटा ट्रैफिक में आज के समय की तुलना में 50 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। उम्मीद है कि 5जी तकनीक से जुड़ी अधिकांश पहल साल 2021 में होगी। भारत द्वारा अपने नागरिकों को इंटरनेट कनेक्टिविटी देने का वादा सार्वजनिक वाईफाई वाणी परियोजना के माध्यम से संचालित किया जाएगा। 2021 के अंत तक सार्वजनिक वाईफाई हॉटस्पॉट की संख्या को 3.5 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ तक करने की उम्मीद है।