कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर के बीच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर कहा है कि निजी क्षेत्र को जरूरी फंड और रियायत मुहैया कराकर टीकों की आपूर्ति बढ़ाई जाए और राज्यों को टीका वितरण को लेकर कहीं अधिक पारदर्शी और लचीली नीति अपनाई जाए। सिंह ने अपने पांच बिंदुओं वाले पत्र में यह सलाह भी दी है कि एचआईवी/एड्स की दवाओं की तरह टीकों के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग की व्यवस्था की जाए ताकि एक ही लाइसेंस के अधीन कई कंपनियां टीका बना सकें। उन्होंने पत्र में लिखा, ‘मेरा मानना है कि यह ऐसा समय है जब कानून में मौजूदा अनिवार्य लाइसेंसिंग प्रावधान लागू किए जाएं ताकि एक ही लाइसेंस के अधीन कई कंपनियां टीके बना सकें। मैं याद दिलाना चाहूंगा कि एचआईवी/एड्स की दवाओं के मामले में पहले ऐसा हो चुका है।’
सिंह ने कहा कि चूंकि घरेलू टीका आपूर्ति सीमित है इसलिए यूरोपीय मेडिकल एजेंसी या यूएसएफडीए जैसे विश्वसनीय प्राधिकारों द्वारा मंजूरी प्राप्त टीकों के आयात को बिना घरेलू परीक्षण के आयात के लिए मंजूर किया जाना चाहिए।
सिंह ने कहा, ‘हमारे सामने असाधारण परिस्थितियां हैं और मैं समझता हूं कि विशेषज्ञ भी यह मानते हैं कि आपात स्थिति में ऐसी शिथिलता उचित होगी। नियमों को सीमित समय के लिए शिथिल किया जा सकता है और इस बीच देश में परीक्षण किए जा सकते हैं।’ सिंह ने कहा कि हमें टीकाकरण की कुल तादाद के बजाय इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आबादी के कितने प्रतिशत को टीके लग चुके हैं। उन्होंने पत्र में लिखा, ‘कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई में टीकाकरण के प्रयास बढ़ाना महत्त्वपूर्ण है। हमें टीकाकरण की कुल तादाद के आकर्षण से बचना होगा और देखना होगा कि आबादी के कितने हिस्से को टीका लग चुका।’ उन्होंने कहा कि अगर हम सही नीति के साथ आगे बढ़ें तो इस दिशा में बहुत जल्द बहुत अच्छे नतीजे हासिल कर सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री ने यह सुझाव भी दिया कि राज्यों को कोरोना के खिलाफ अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे लोगों के निर्धारण में छूट मिलनी चाहिए ताकि वे तय कर सकें कि 45 वर्ष से कम उम्र के किन लोगों को टीका लगाया जाए। अभी केवल 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को टीका लग रहा है। उन्होंने लिखा कि कुछ राज्य स्कूली शिक्षकों, बस-तीन पहिया और टैक्सी चालकों, नगर निकाय तथा पंचायत कर्मियों और शायद अधिवक्ताओं को भी इस श्रेणी में रखना चाहें। उन्हें इसकी इजाजत मिलनी चाहिए ताकि वे इनका टीकाकरण कर सकें।
सिंह ने यह भी कहा कि केंद्र को इस बात का प्रचार करना चाहिए कि विभिन्न टीका निर्माताओं को अगले छह महीने में कितनी खुराक बनाने के ऑर्डर दिए गए हैं और आपूर्ति के कितने ऑर्डर स्वीकार किए गए हैं। उन्होंने लिखा कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि विभिन्न राज्यों के बीच टीकों का पारदर्शी वितरण किस प्रकार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार एक दिन पहले ही कांग्रेस कार्य समिति ने बैठक कर कोविड महामारी से निपटने पर चर्चा की थी। सिंह ने पत्र में लिखा, ‘यदि हम इस अवधि (छह माह) में एक निश्चित तादाद में टीकाकरण करना चाहते हैं तो हमें अग्रिम आदेश देने होंगे ताकि उत्पादक समय पर आपूर्ति कर सकें।’ उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार 10 फीसदी वितरण को आपात जरूरत के लिए रख सकती है और राज्यों को संभावित उपलब्धता की पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि वे उसके अनुसार टीकाकरण कर सकें। पहले ही अनिवार्य लाइसेंसिंग लागू कर चुके इजरायल का उदाहरण देते हुए सिंह ने कहा कि भारत जल्द से जल्द ऐसा करे तो अच्छा होगा।
पत्र के अंत में सिंह ने कहा कि उन्होंने हमेशा रचनात्मक सहयोग में यकीन किया है और उसके मुताबिक ही काम किया है। उन्होंने लिखा कि वह इसी भरोसे पर अपने सुझाव प्रस्तुत कर रहे हैं।
सिंह ने लिखा, ‘मैं आशा करता हूं कि सरकार इन सुझावों को तत्काल स्वीकार करेगी और इन पर जल्दी कदम उठाएगी।’ उन्होंने याद किया कि कैसे बीते एक वर्ष में कोविड-19 महामारी ने भारत और शेष विश्व को चपेट में लिया है और कई मातापिता साल भर से अपने बच्चों को नहीं देख पाए हैं। कई लोगों ने अपनी आजीविका गंवा दी और लाखों लोग गरीबी के भंवर में उलझ गए। भारत कोविड-19 की दूसरी लहर की चपेट में आ चुका है और बीते चार दिनों से संक्रमण के करीब दो लाख से अधिक नये मामले रोज सामने आए हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल सहयोगी रह चुके पी चिदंबरम ने आशा जताई कि सरकार इन सुझावों पर अमल करेगी। चिदंबरम ने कहा कि सरकार इस पत्र पर जो कदम उठाएगी उससे पता चल जाएगा कि सरकार अच्छे सुझावों को लेकर क्या रुख रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार महामारी के प्रसार को रोकने के लिए कितनी गंभीर है यह भी इससे पता चल जाएगा।