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उत्तराखंड आपदा: ड्रोन से फंसे लोगों की तलाश जारी

Last Updated- December 12, 2022 | 8:31 AM IST

उत्तराखंड के चमोली जिले में ऋषिगंगा घाटी में रविवार को आई विकराल बाढ़ से क्षतिग्रस्त तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश के लिए ड्रोन तथा रिमोट संवेदी उपकरणों की मदद ली जा रही है और 174 लोग लापता हैं। ऋषिगंगा जलविद्युत परियोजना स्थल से लापता हुए लोगों के परिजनों ने बुधवार को अधिकारियों पर बचाव अभियान सही से नहीं चलाने का आरोप भी लगाया। उत्तराखंड पुलिस के मुख्य प्रवक्ता और पुलिस उपमहानिरीक्षक नीलेश आनंद भरणे ने बताया, ‘इस समय हमारा सारा ध्यान हमारे पास उपलब्ध सभी संसाधनों जैसे ड्रोन और रिमोट संवेदी उपकरणों की मदद से सुरंग के अंदर फंसे लोगों को बचाने पर है।’
 रविवार को ऋषिगंगा घाटी में पहाड़ से गिरी लाखों टन बर्फ के कारण ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों में अचानक आई बाढ़ से 13.2 मेगावॉट ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना पूरी तरह तबाह हो गई थी जबकि बुरी तरह क्षतिग्रस्त 520 मेगावॉट तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना की सुरंग में काम कर रहे लोग उसमें फंस गए थे।
 घटना के बाद से ही लगातार तलाश और बचाव अभियान चलाया जा रहा है जिसमें सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) के करीब 600 कर्मी लगे हुए हैं। भरणे ने बताया कि बचाव दल अब तक सुरंग के 80 मीटर अंदर तक पहुंच चुके हैं और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए उन्हें टनों मलबे के बीच में से कम से कम 100 मीटर का और रास्ता तय करना पड़ेगा।
 भरणे ने बताया कि सुरंग के अंदर जमा गाद के सूखने और सख्त होने के कारण मलबे को ड्रिल करना और मुश्किल हो गया है। यहां राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, आपदा ग्रस्त क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों से अब तक कुल 32 शव बरामद हो चुके हैं जबकि 174 लापता हैं।

First Published - February 10, 2021 | 11:34 PM IST

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