facebookmetapixel
Advertisement
Meta साझा करेगी बाल यौन शोषण से जुड़े खातों की जानकारी, भारत में ऐसा करने वाली पहली सोशल मीडिया कंपनीफ्लिपकार्ट ने त्योहारी मांग के लिए खोले 2.5 लाख रोजगार के मौके, 60% नौकरियां डिलिवरी मेंPhonePe की अगले दशक की योजना, भुगतान से निवेश और कर्ज तक बढ़ेगा कारोबार₹2,000 से ज्यादा के पर्सन-टु-मर्चेंट UPI पेमेंट पर देना होगा 0.4% चार्ज, 15 अक्टूबर से होगा लागूहिमाद्रि का 70% टायर निर्यात करने का लक्ष्य, बिड़ला टायर्स का होगा विस्तारनॉन-लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम में अगस्त में आया 10% का इजाफा, हेल्थ इंश्योरेंस ने दिया सबसे ज्यादा सहाराडीलरों संग ठोस करार करें वाहन निर्माता, FADA ने बताई जरूरतभारत-EU व्यापार समझौते से Schaeffler को क्यों नहीं मिलेगा खास लाभ? CEO ने बताई वजहभारत का व्यापार घाटा पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंचा, अगस्त में घटकर हुआ 26.86 अरब डॉलरRBI बढ़ा सकता है ब्याज दर, अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 आधार अंक की बढ़ोतरी का अनुमान

एचएफसी के लिए रिजर्व बैंक का मसौदा

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 12:36 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों (एचएफसी) के लिए मौजूदा कानून में सुधार करने का प्रस्ताव किया है। केंद्रीय बैंंक इन फर्मों का भी नियामक है।
रिजर्व बैंक ने अगस्त 2019 में नैशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) से एचएफसी के नियमनन का काम अपने हाथ में ले लिया था। उसके पहले एचएफसी का नियमन एनएचबी द्वारा तय किए गए नियमों के आधार पर होता था।
रिजर्व बैंक के मुताबिक उन नियमों में हाउसिंग फाइनैंस को लेकर कोई औपचारिक परिभाषा नहीं थी। वेबसाइट पर जारी मसौदे के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने इसके लिए एक औपचारिक परिभाषा दी है। हाउसिंग फाइनैंस में अब आवासीय इकाइयों की खरीद, निर्माण, पुनर्निर्माण, नवीकरण और मरम्मत कार्यों के लिए दिया जाने वाला ऋण शामिल होगा।
रिजर्व बैंक के मसौदे में कहा गया है, ‘मकान की मरम्मत, मकान को खरीदने या नया मकान बनाने या मौजूदा मकान के नवीकरण के अलावा अन्य सभी कर्ज को गैर आवासीय ऋण माना जाएगा।’
अपने मसौदा दिशानिर्देशों में रिजर्व बैंक ने एचएफसी को व्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण और  व्यवस्था के लिए गैर महत्त्वपूर्ण में विभाजित किया है। 500 करोड़ रुपये और उससे ऊपर संपत्ति वाले और जमा न लेने वाले एचएफसी और संपत्ति के आकार के बगैर जमा कराने वाले सभी एचएफसी को व्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण एचएपसी की श्रेणी में रखा गया है। जिन एचएफसी का आकार 500 करोड़ रुपये से नीचे है, उन्हें व्यवस्था के लिए गैर महत्त्वपूर्ण की श्रेणी में रखा गया है।
मसौदे में कहा गया है कि गैर व्यवस्थित महत्त्वपूर्ण एचएफसी के लिए दिशानिर्देश कमोबेश सामान्य एनबीएपसी जैसे नियम होंगे। इसके बाद नकदी जोखिम ढांचे और नकदी कवरेज अनुपात, प्रतिभूतिकरण आदि के रिजर्व बैंक के दिशानिर्देश एचएफसी पर लागू होंगे, जो एनबीएफसी के लिए बनाए गए हैं। इस तरह का तालमेल 2 साल में किया जाएगा और रिजर्व बैंक ने कहा है कि तब तक एचएफसी, एनएचबी के मानकों का पालन कर सकते हैं।
 एचएफसी को एनबीएफसी के एक अन्य प्रारूप की तरह मानने के साथ रिजर्व बैंक के मसौदे में प्रस्ताव किया गया है कि एचएफसी के लिए थोड़ा अलग नियम पेश किए जाएं। रिजर्व बैंक ने कहा है कि क्वालीफाइंग असेट से आशय हाउसिंग फाइनैंस या हाउसिंग के लिए मुहैया कराया जाने वाला फाइनैंस होगा, जो शुद्ध संपत्ति के 50 प्रतिशत से कम नहीं होगा, उसे क्वालीफाइंग असेट माना जा सकता है।
अगर एचएफसी मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं तो उन्हें एनबीएफसी के रूप में माना जाएगा। निवेश और क्रेडिट कंपनियों (एनबीएफसी-आईसीसी) को अपने प्रमाणपतत्र को एचएफसी से बदलकर एनबीएफसी-आईसीसी करने के लिए संपर्क करना होगा। नए दिशानिर्देशों में कहा गया है कि एचएफसी को रिजर्व बैंक के नए दिशानिर्देशों को चरणबद्ध तरीके से पालन के लिए 4 साल का वक्त दिया जाएगा।

Advertisement
First Published - June 17, 2020 | 11:37 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement